नई दिल्ली | (Action Bharat) UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाए जाने को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे विदेशी दबाव के आरोपों पर केंद्र सरकार ने स्पष्टीकरण दिया है। वित्त मंत्रालय की ओर से बुधवार को कहा गया कि UPI से जुड़े फैसले भारत सरकार अपने स्तर पर लेती है और इनका किसी विदेशी दबाव से कोई संबंध नहीं है।
सरकार ने क्या कहा?
- वित्त मंत्रालय के अनुसार, UPI से जुड़े नीतिगत फैसले भारत सरकार द्वारा देश की जरूरतों और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए लिए जाते हैं।
- सरकार ने विपक्ष के उस आरोप को खारिज किया है जिसमें UPI पर संभावित चार्ज या MDR को लेकर किसी विदेशी दबाव की बात कही गई थी।
- सरकार का कहना है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूत, आसान और दीर्घकालिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना नीतिगत फैसलों का प्रमुख उद्देश्य है।
- MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी के लेनदेन से जुड़ा होता है और इसका भुगतान व्यवस्था में शामिल पक्षों के बीच किया जाता है।
UPI चार्ज का मुद्दा क्यों अहम है?
भारत में UPI डिजिटल भुगतान का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में UPI लेनदेन पर किसी तरह का शुल्क लगाए जाने का मुद्दा व्यापारियों, पेमेंट कंपनियों और आम उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है।
विपक्ष ने इस मुद्दे को विदेशी दबाव से जोड़कर सवाल उठाए हैं, जबकि केंद्र सरकार ने इस आरोप से इनकार किया है। फिलहाल इस मामले में सरकार के स्पष्टीकरण और UPI की शुल्क व्यवस्था को लेकर आगे आने वाले आधिकारिक फैसलों पर नजर बनी हुई है।
नोट: उपलब्ध जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने विदेशी दबाव के आरोपों का खंडन किया है। किसी नए MDR की दर या उसे लागू करने की अंतिम व्यवस्था की पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना होगा।
