UPI पर MDR को लेकर RBI का बड़ा बयान, कहा- लंबे समय तक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम

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मुंबई | (Action Bharat) UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर चल रही चर्चा के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुल्क व्यवस्था को लेकर अपना पक्ष रखा है। रिजर्व बैंक ने कहा है कि ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू करने का उद्देश्य भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की लंबे समय तक निरंतरता और विकास को बनाए रखना है।

RBI ने शुल्क को लेकर क्या कहा?

रिजर्व बैंक के मुताबिक, UPI इकोसिस्टम में MDR का उचित तरीके से बंटवारा होने से डिजिटल भुगतान से जुड़े तकनीक, बुनियादी ढांचे और पेमेंट स्वीकार करने वाले तंत्र में लगातार निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।

RBI का कहना है कि इससे UPI को देशभर में ग्राहकों और कारोबारियों के लिए आगे बढ़ाने, नई सेवाएं विकसित करने और डिजिटल भुगतान की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

आम यूजर के लिए क्या बदलेगा?

महत्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार UPI के सभी लेनदेन यूजर्स के लिए मुफ्त रहेंगे। इसमें:

  • व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI भुगतान शामिल हैं।
  • व्यक्ति से व्यापारी (P2M) UPI भुगतान भी यूजर के लिए मुफ्त रहेंगे।
  • ₹2,000 से कम के P2M लेनदेन पर व्यापारी के लिए भी MDR नहीं लगाया जाएगा।
  • ₹2,000 से अधिक के P2M लेनदेन के लिए 0.4% MDR की व्यवस्था बताई गई है।

इसका मतलब यह है कि प्रस्तावित/बताई गई MDR व्यवस्था का शुल्क सीधे UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहक से लेने की बात नहीं कही गई है।

UPI की निरंतरता पर RBI का जोर

RBI ने कहा कि डिजिटल भुगतान के इकोसिस्टम में शुल्क का उचित बंटवारा होने से पेमेंट सिस्टम में निवेश के लिए संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं। इससे UPI की स्वीकार्यता बढ़ाने और लेनदेन की संख्या में लगातार वृद्धि को समर्थन मिलने की उम्मीद जताई गई है।

केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि वह UPI को सुरक्षित, निर्बाध, सस्ता और सुलभ बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

UPI क्या है?

UPI का संचालन नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) करता है। NPCI की स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन की पहल के तहत हुई थी। UPI के जरिए बैंक खातों के बीच रियल-टाइम डिजिटल भुगतान किया जा सकता है और ग्राहक सीधे किसी व्यापारी को भुगतान कर सकते हैं।

अब आगे क्या?

UPI पर MDR को लेकर शुल्क का असर मुख्य रूप से पेमेंट इकोसिस्टम और व्यापारियों पर पड़ने वाली लागत से जुड़ा है। वहीं, ग्राहकों के लिए UPI भुगतान को मुफ्त बनाए रखने की बात कही गई है। इस व्यवस्था के लागू होने के तरीके और संबंधित अंतिम नियमों पर आगे की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

Action Bharat | डिजिटल भुगतान से जुड़ी खबर

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