कोलकाता। न्यू मार्केट के मिर्जा गालिब स्ट्रीट स्थित होटल ‘शिखा इन’ में मंगलवार देर रात हुए भीषण अग्निकांड ने कोलकाता की होटल और गेस्ट हाउस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में दम घुटने से 9 लोगों की मौत हुई, जिनमें 8 बांग्लादेशी नागरिक बताए जा रहे हैं। करीब 80 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाले जाने की जानकारी है, जबकि कई घायलों का इलाज चल रहा है।
प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है, लेकिन आग की वास्तविक वजह और मौतों के लिए जिम्मेदारी किसकी है, इसका फैसला विस्तृत जांच के बाद ही होगा।
आग से ज्यादा जानलेवा बना धुआं
दमकल विभाग के अनुसार आग होटल की तीसरी मंजिल से शुरू हुई। आग की लपटें बहुत तेज नहीं थीं, लेकिन कुछ ही समय में धुआं पूरे होटल में फैल गया।
रात का समय होने के कारण अधिकांश लोग कमरों में सो रहे थे। आग लगने के बाद लिफ्ट बंद हो गई और लोगों को सीढ़ियों के जरिए बाहर निकलना पड़ा। संकरी निकासी और घने धुएं के कारण कई लोग फंस गए।
कुछ लोगों ने बाथरूम और कमरों में छिपकर जान बचाने की कोशिश की। खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलने के प्रयास भी किए गए। एक व्यक्ति के ऊंचाई से छलांग लगाने की जानकारी भी सामने आई है।
चार दमकल गाड़ियों ने संभाला मोर्चा
सूचना मिलते ही दमकल, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचीं। चार दमकल गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पाया गया और बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।
करीब साढ़े चार बजे तक बचाव अभियान पूरा होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने शुरू किए।
सबसे बड़ा सवाल: क्या होटल में फायर सेफ्टी पर्याप्त थी?
हादसे के बाद सबसे गंभीर सवाल फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्जिट को लेकर है।
घटना से जुड़े शुरुआती दावों के मुताबिक इमारत में कई होटल और गेस्ट हाउस संचालित हो रहे थे। कमरों को छोटे हिस्सों में बांटे जाने और सीमित निकासी व्यवस्था की बातें भी सामने आई हैं।
अब जांच एजेंसियों के सामने कई अहम सवाल हैं—
- क्या होटल के पास वैध फायर एनओसी थी?
- आखिरी बार फायर ऑडिट कब हुआ था?
- क्या फायर अलार्म और अग्निशमन उपकरण काम कर रहे थे?
- क्या पर्याप्त इमरजेंसी एग्जिट मौजूद थे?
- क्या भवन का व्यावसायिक इस्तेमाल स्वीकृत नियमों के तहत हो रहा था?
इन सवालों का आधिकारिक जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
भवन के इस्तेमाल पर भी सवाल
हादसे के बाद इमारत के उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि आवासीय उपयोग वाली इमारत में बड़े पैमाने पर होटल और गेस्ट हाउस संचालित किए जा रहे थे।
हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अगर जांच में भवन उपयोग, निर्माण, ट्रेड लाइसेंस या फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
मृतकों में बांग्लादेशी परिवार के चार सदस्य
हादसे में मृत 9 लोगों में 8 बांग्लादेशी नागरिक बताए गए हैं। इनमें एक बांग्लादेशी पत्रकार, उनकी पत्नी, तीन वर्षीय बच्चा और परिवार के एक अन्य सदस्य के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।
बताया गया है कि कुछ लोग इलाज के सिलसिले में कोलकाता आए थे।
घायलों में भी बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
तारापीठ अग्निकांड के बाद दूसरी बड़ी घटना
कोलकाता की घटना से पहले तारापीठ में भी होटल में आग लगने से 9 लोगों की मौत हुई थी।
लगातार सामने आए इन हादसों ने पश्चिम बंगाल में होटल, लॉज और गेस्ट हाउस की अग्निसुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
अब सवाल सिर्फ ‘शिखा इन’ तक सीमित नहीं है। जरूरत इस बात की है कि क्या राज्यभर में संचालित होटल और गेस्ट हाउस वास्तव में सभी सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं।
सरकार ने फायर ऑडिट का फैसला लिया
हादसे के बाद राज्य सरकार ने होटल और गेस्ट हाउस की फायर सेफ्टी व्यवस्था का व्यापक ऑडिट कराने का फैसला किया है।
ऑडिट में फायर एनओसी, ट्रेड लाइसेंस, भवन की स्वीकृति, इमरजेंसी एग्जिट, फायर अलार्म और अग्निशमन उपकरणों की स्थिति की जांच महत्वपूर्ण होगी।
SIT जांच करेगी हादसे की पड़ताल
पुलिस मुख्यालय की ओर से मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
फोरेंसिक टीम भी घटनास्थल की जांच कर रही है। जांच के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि आग किस वजह से लगी और क्या किसी स्तर पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी ने हादसे को इतना भयावह बनाया।
आखिर जिम्मेदार कौन?
9 लोगों की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है—इस हादसे की जिम्मेदारी किसकी है?
फिलहाल किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। जांच के बाद यदि फायर सेफ्टी में लापरवाही, अवैध निर्माण, गलत भवन उपयोग, फायर एनओसी से जुड़ी अनियमितता या सुरक्षा उपकरणों की खराबी सामने आती है, तभी जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।
लेकिन एक बात साफ है—हादसे के बाद सिर्फ मुआवजा और जांच पर्याप्त नहीं होगी। सवाल यह भी है कि अगर नियम मौजूद थे तो उनका पालन क्यों नहीं हुआ और निगरानी व्यवस्था कहां थी?
ACTION BHARAT के 5 बड़े सवाल
1. होटल को संचालन की अनुमति किस आधार पर मिली?
2. क्या फायर एनओसी और फायर ऑडिट वैध था?
3. क्या भवन का इस्तेमाल स्वीकृत मानकों के मुताबिक हो रहा था?
4. इमरजेंसी एग्जिट और फायर अलार्म की वास्तविक स्थिति क्या थी?
5. अगर नियमों का उल्लंघन मिला तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
ACTION BHARAT | हादसा नहीं, जवाबदेही भी जरूरी।
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