US Fed Policy: ब्याज दरों के फैसले से पहले भारतीय बाजारों की धड़कन तेज, डॉलर-रुपया और सोने-चांदी पर नजर

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नई दिल्ली (Action Bharat) | अमेरिका के फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर दुनियाभर के वित्तीय बाजारों की नजर टिकी हुई है। 16 सितंबर की देर रात अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी घोषणा प्रस्तावित है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर बाजार में चर्चा है। अगर ऐसा होता है तो जुलाई 2023 के बाद यह पहली दर वृद्धि होगी।

हालांकि, बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक केवल ब्याज दर का फैसला ही महत्वपूर्ण नहीं होगा। फेड की ओर से आगे की मौद्रिक नीति को लेकर दिए जाने वाले संकेत यानी Forward Guidance भी भारतीय शेयर बाजार, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेश के लिहाज से अहम भूमिका निभा सकते हैं।

फेड के फैसले पर क्यों है पूरी दुनिया की नजर?

  • अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव का असर वैश्विक पूंजी प्रवाह पर पड़ सकता है।
  • अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने पर डॉलर की मजबूती की संभावना बन सकती है।
  • इससे उभरते बाजारों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर विदेशी पूंजी के दबाव का असर पड़ सकता है।
  • अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बदलाव का असर दुनिया के दूसरे वित्तीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।
  • सोने-चांदी जैसी परिसंपत्तियों और शेयर बाजार में अल्पावधि में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

स्रोत रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ब्याज दर बढ़ने की स्थिति में भारतीय रुपये पर दबाव और डॉलर में मजबूती देखने को मिल सकती है।

25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी से ज्यादा महत्वपूर्ण क्या?

एनरिच मनी के फाउंडर और CEO पोनमुडी आर के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि बाजार की नजर केवल संभावित 25 बेसिस प्वाइंट (0.25 प्रतिशत अंक) की बढ़ोतरी पर नहीं होनी चाहिए।

उनके मुताबिक:

  • संभावित दर वृद्धि का एक हिस्सा बाजार पहले ही कीमतों में शामिल कर चुका है।
  • असली संकेत फेड की आगे की नीति को लेकर भाषा और संकेतों से मिल सकता है।
  • इसके साथ अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड की दिशा भी भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण होगी।
  • यदि फेड आगे भी सख्त मौद्रिक नीति का संकेत देता है, तो बाजार की प्रतिक्रिया ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।

महंगाई का जोखिम बना रहा तो क्या हो सकता है?

पोनमुडी आर के अनुसार, अगर फेड की ओर से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका में महंगाई का जोखिम अभी बना हुआ है और आगे भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना है, तो अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर दोनों मजबूत हो सकते हैं।

इस स्थिति में ग्लोबल कैपिटल के Risk-off mode में रहने की संभावना बताई गई है।

भारत के संदर्भ में रिपोर्ट में संभावित प्रभाव इस तरह बताए गए हैं:

  • विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की बिकवाली का दबाव बना रह सकता है।
  • रुपये पर कमजोरी का दबाव बढ़ सकता है।
  • भारतीय शेयरों के वैल्यूएशन पर असर पड़ सकता है।
  • हाई-बीटा और ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील सेक्टर ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।

निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर क्यों अहम?

रिपोर्ट में निफ्टी के 23,000 स्तर को महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्र बताया गया है।

एक्सपर्ट के आकलन के मुताबिक:

  • अगर निफ्टी 23,000 के ऊपर टिकता है, तो 23,200–23,400 तक रिकवरी की गुंजाइश बन सकती है।
  • वहीं 23,000 के नीचे लगातार बने रहने की स्थिति में बाजार में एक और Risk-off selling दौर की संभावना जताई गई है।

यह बाजार का विशेषज्ञ आकलन है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।

केविन वॉर्श के पिछले संकेत भी चर्चा में

रिपोर्ट के मुताबिक, फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के जैक्सन होल भाषण के बाद अमेरिका से मजबूत आर्थिक आंकड़े सामने आए हैं। उनके भाषण को रिपोर्ट में अपेक्षाकृत हॉकिश, यानी महंगाई और मौद्रिक नीति पर सख्त रुख के संकेत देने वाला, बताया गया है।

इसी वजह से बाजार में फेड की आगे की नीति को लेकर सख्त रुख की उम्मीदों पर भी चर्चा है।

सोना-चांदी, रुपया और शेयर बाजार पर नजर

फेड के फैसले के बाद निवेशकों की निगाह कई बाजार संकेतकों पर रहेगी।

डॉलर और रुपया

  • सख्त अमेरिकी मौद्रिक नीति से डॉलर को मजबूती मिल सकती है।
  • इसका असर भारतीय रुपये पर दबाव के रूप में दिखाई दे सकता है।

बॉन्ड यील्ड

  • अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड की दिशा वैश्विक निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है।
  • यील्ड में तेज बदलाव से उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह प्रभावित हो सकता है।

सोना और चांदी

  • अमेरिकी ब्याज दरों और डॉलर में बदलाव का असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
  • इसलिए फेड की घोषणा के बाद सोना-चांदी में भी उतार-चढ़ाव पर नजर रहेगी।

शेयर बाजार

  • भारतीय इक्विटी बाजार में शुरुआती प्रतिक्रिया फेड के फैसले और आगे के संकेतों पर निर्भर कर सकती है।
  • खासतौर पर विदेशी निवेश और ब्याज दर संवेदनशील क्षेत्रों पर बाजार की नजर रहेगी।

बाजार के लिए असली सवाल क्या?

फेड के फैसले के बाद निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि ब्याज दर बढ़ी या नहीं। उससे आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक भविष्य की दरों को लेकर क्या संकेत देता है।

यानी बाजार की दिशा तय करने में तीन संकेत महत्वपूर्ण हो सकते हैं:

  • फेड का वास्तविक ब्याज दर फैसला
  • फेड की Forward Guidance
  • अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर की प्रतिक्रिया

नोट: इस खबर में दिए गए बाजार संबंधी प्रभाव और निफ्टी के स्तर विशेषज्ञों/स्रोत रिपोर्ट के आकलन पर आधारित हैं। शेयर बाजार, मुद्रा और कमोडिटी की कीमतों में वास्तविक प्रतिक्रिया अलग हो सकती है और निवेश में बाजार जोखिम बना रहता है।

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