रांची (Action Bharat) | झारखंड में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए संगठन, सामाजिक समीकरण और क्षेत्रवार रणनीति पर काम तेज किया है। पार्टी के स्तर पर केंद्रीय नेतृत्व के साथ बैठकों से लेकर कुड़मी समाज के बीच संपर्क और संगठनात्मक जिम्मेदारियों में बदलाव तक कई स्तरों पर गतिविधियां सामने आई हैं।
अमित शाह के साथ झारखंड भाजपा नेताओं की बैठक
19 अगस्त को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ झारखंड भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक बैठक में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के साथ पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, रघुवर दास और चंपाई सोरेन समेत पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक में झारखंड के राजनीतिक हालात, संगठन और राज्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।
भाजपा ने सितंबर में छात्र मुद्दों को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन भी किया। पार्टी ने JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं तथा छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए और जांच की मांग उठाई।
कुड़मी समाज पर भी बढ़ा फोकस
भाजपा की रणनीति में कुड़मी समाज से जुड़ा राजनीतिक और सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण दिखाई दे रहा है। 20 सितंबर को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में कुड़मी समाज का करम महोत्सव आयोजित होना है। आयोजन में पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। असम और ओडिशा के मुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रित किया गया है।
कुड़मी समाज लंबे समय से एसटी दर्जे और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने जैसी मांगें उठाता रहा है। ऐसे में यह मुद्दा झारखंड के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
सुदेश महतो की अमित शाह से मुलाकात
11 सितंबर को आजसू पार्टी के अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने नई दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कुड़मी समुदाय को एसटी दर्जा देने और कुड़माली समेत विभिन्न स्थानीय भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग से संबंधित ज्ञापन सौंपा। उन्होंने JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग भी उठाई।
यह मुलाकात भाजपा और आजसू के बीच भविष्य के राजनीतिक संबंधों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
संगठन में बदलाव पर नजर
भाजपा राज्य संगठन में ऐसे नेताओं को जिम्मेदारी देने पर भी काम कर रही है जिनकी अलग-अलग सामाजिक समूहों में पकड़ हो। हाल में कुड़मी समुदाय से जुड़े नेताओं को संगठन में जिम्मेदारियां दिए जाने की रिपोर्टें भी सामने आई हैं।
पार्टी के सामने चुनौती यह है कि वह अपने संगठनात्मक आधार को कितना मजबूत कर पाती है और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच को किस तरह बढ़ाती है।
आजसू के साथ रिश्ते भी चर्चा में
झारखंड में भाजपा की राजनीति में आजसू पार्टी के साथ संबंध भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। हालिया चुनावी प्रदर्शन के बाद दोनों दलों के बीच भविष्य की रणनीति और सीटों के समीकरण को लेकर चर्चा बनी हुई है। इसी बीच सुदेश महतो की अमित शाह से मुलाकात ने कुड़मी समाज से जुड़े मुद्दों को फिर राजनीतिक चर्चा में ला दिया है।
अब नजर 2026 के राजनीतिक होमवर्क पर
भाजपा की मौजूदा गतिविधियों को देखें तो झारखंड में उसका फोकस केवल चुनावी गठबंधन तक सीमित नहीं दिखता। संगठन को मजबूत करना, सामाजिक समूहों के बीच संपर्क बढ़ाना, क्षेत्रवार मुद्दों को उठाना और सहयोगी दलों के साथ संबंधों की समीक्षा—इन सभी मोर्चों पर पार्टी की गतिविधियां जारी हैं।
हालांकि, इन प्रयासों का चुनावी परिणाम क्या होगा, यह भविष्य के राजनीतिक घटनाक्रम और मतदाताओं के रुख पर निर्भर करेगा। फिलहाल झारखंड में भाजपा की रणनीति का एक बड़ा हिस्सा संगठन विस्तार और सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करने पर केंद्रित दिखाई दे रहा है।
