क्लाइमेट चेंज पर भारत का ग्रीन विजन: हाइड्रोजन ट्रेन से न्यूक्लियर एनर्जी तक, PM मोदी ने गिनाईं उपलब्धियां

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नई दिल्ली (Action Bharat) | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ सम्मेलन में भारत की पर्यावरणीय उपलब्धियों और भविष्य की ऊर्जा रणनीति पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत क्लीन मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और न्यूक्लियर एनर्जी जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में हाइड्रोजन ट्रेन, विंड एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहनों, मेट्रो नेटवर्क, रेलवे विद्युतीकरण, जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती और वन क्षेत्र जैसे कई क्षेत्रों का उल्लेख किया।

हाइड्रोजन ट्रेन को बताया क्लीन मोबिलिटी की दिशा में कदम

पीएम मोदी ने कहा कि हाल ही में भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चली है और इसे उन्होंने क्लीन मोबिलिटी के नए दौर की शुरुआत बताया।

उनके अनुसार यह ट्रेन दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन है। इसे भारत में स्वच्छ परिवहन तकनीक की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में प्रस्तुत किया गया।

12 साल में तीन गुना हुई विंड एनर्जी क्षमता

प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत की विंड एनर्जी क्षमता तीन गुना बढ़ी है। उन्होंने हाइड्रो-एनर्जी क्षमता में भी वृद्धि का उल्लेख किया।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत न्यूक्लियर एनर्जी पर भी फोकस कर रहा है और इन क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के लिए भी रास्ते खोले जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री के अनुसार इन प्रयासों के चलते भारत की नॉन-फॉसिल एनर्जी क्षमता में 400 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में बड़ा बदलाव

ई-मोबिलिटी का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री के आंकड़ों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि 2014 से पहले भारत में हर साल करीब 3,000 इलेक्ट्रिक वाहन बिकते थे, जबकि पिछले साल करीब 25 लाख ईवी की बिक्री हुई।

सरकार की ओर से इसे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विस्तार के तौर पर पेश किया गया।

मेट्रो नेटवर्क 1,000 किलोमीटर से ज्यादा

प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक परिवहन और शहरी मोबिलिटी में भी बदलाव का जिक्र किया।

उनके मुताबिक—

  • 2014 तक देश के केवल 5 शहरों में मेट्रो थी।
  • उस समय कुल मेट्रो नेटवर्क 250 किलोमीटर से कम था।
  • अब 20 से अधिक शहरों में मेट्रो सेवाएं चल रही हैं।
  • भारत में मेट्रो नेटवर्क 1,000 किलोमीटर से अधिक हो चुका है।

उन्होंने फास्टैग का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे टोल बूथों पर वाहनों के इंतजार और ईंधन की बर्बादी को कम करने में मदद मिली है।

रेलवे का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण

पीएम मोदी ने रेलवे के विद्युतीकरण को भी पर्यावरणीय प्रयासों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण से करोड़ों लीटर डीजल की बचत हुई है।

उनके मुताबिक इससे पर्यावरण को लाभ हुआ है और भारत का विकास तेज होने के साथ-साथ टिकाऊ भी होना चाहिए।

70 हजार से ज्यादा अमृत सरोवर

जल संरक्षण के क्षेत्र में प्रधानमंत्री ने अमृत सरोवर और ‘कैच द रेन’ पहल का उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि देश में—

  • 70,000 से ज्यादा अमृत सरोवर बनाए गए हैं।
  • ‘कैच द रेन’ पहल के तहत करीब 1.5 करोड़ जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं।
  • नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत 12.5 लाख हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती के क्लस्टर बनाए गए हैं।
  • करीब 3,000 जलवायु-अनुकूल फसल किस्मों के विकास का भी उल्लेख किया गया।

प्रधानमंत्री ने एग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने को भी कार्बन फुटप्रिंट कम करने से जोड़ा।

घने वन क्षेत्र में 22 प्रतिशत वृद्धि का दावा

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत का बहुत घना वन क्षेत्र 22 प्रतिशत बढ़ा है।

उन्होंने प्लास्टिक कचरे की चुनौती का जिक्र करते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक और ‘रिड्यूस, रीयूज और रीसाइकल’ के सिद्धांत पर आधारित सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की बात कही।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत में हर दिन बड़ी मात्रा में कचरे को रिसाइकिल किया जा रहा है और गोबरधन योजना के जरिए गांवों में गोबर और अन्य जैविक कचरे को उपयोगी संसाधनों में बदलने पर काम हो रहा है।

हाइड्रोजन से न्यूक्लियर एनर्जी तक व्यापक रणनीति

प्रधानमंत्री के संबोधन में भारत की ऊर्जा रणनीति के कई अलग-अलग पहलू सामने आए। इसमें हाइड्रोजन आधारित परिवहन, विंड और हाइड्रो एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन, रेलवे विद्युतीकरण और न्यूक्लियर एनर्जी शामिल हैं।

इसके साथ ही जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती, वन क्षेत्र और कचरा प्रबंधन को भी पर्यावरणीय रणनीति का हिस्सा बताया गया।

इस तरह भारत की भविष्य की पर्यावरण नीति में स्वच्छ ऊर्जा, परिवहन, जल संरक्षण, कृषि और कचरा प्रबंधन जैसे कई क्षेत्रों को एक साथ जोड़ने की दिशा पर जोर दिया गया।

Action Bharat | Business & Environment Desk

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