सऊदी-UAE खोज रहे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का विकल्प, भारतीय कंपनी EIL को मिल सकता है बड़ा प्रोजेक्ट

कारोबार

नई दिल्ली (Action Bharat) | पश्चिम एशिया में तेल और गैस के परिवहन से जुड़े बुनियादी ढांचे को लेकर भारत की सरकारी कंपनी इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) के लिए नए कारोबारी अवसर बन सकते हैं। EIL सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ तेल एवं गैस इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को लेकर शुरुआती स्तर पर बातचीत कर रही है।

इन संभावित परियोजनाओं का उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक मार्ग और अवसंरचना तैयार करना है। EIL इन परियोजनाओं में परियोजना परामर्श और व्यवहार्यता अध्ययन से जुड़े काम हासिल करने की कोशिश कर रही है।

करीब 1 अरब डॉलर के निवेश की योजना

EIL के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अतुल गुप्ता ने कंपनी की वार्षिक आम बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि सऊदी अरब और UAE वैकल्पिक मार्गों के जरिए कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए करीब 1 अरब डॉलर के निवेश की योजना बना रहे हैं।

इस संभावित निवेश के तहत कई तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किए जा सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के लिए नई पाइपलाइनें
  • भंडारण सुविधाएं
  • तेल टर्मिनल
  • निर्यात से जुड़ी अन्य आवश्यक अवसंरचना
  • वैकल्पिक परिवहन एवं आपूर्ति व्यवस्था

गुप्ता के मुताबिक, परियोजनाएं फिलहाल योजना बनाने के चरण में हैं और EIL भी इसी शुरुआती स्तर पर संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रही है।

EIL को क्या काम मिल सकता है?

EIL इन प्रस्तावित परियोजनाओं में मुख्य रूप से प्रोजेक्ट कंसल्टेंसी और फिजिबिलिटी स्टडी से जुड़े काम हासिल करने की कोशिश कर रही है।

इसका मतलब है कि परियोजना शुरू होने से पहले संभावित मार्ग, तकनीकी व्यवहार्यता, लागत, क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े पहलुओं के अध्ययन में EIL की भूमिका हो सकती है।

हालांकि, अभी तक EIL को इन परियोजनाओं का अंतिम ठेका मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। कंपनी और खाड़ी देशों के बीच बातचीत फिलहाल शुरुआती चरण में बताई गई है।

क्यों तलाशे जा रहे हैं होर्मुज के विकल्प?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। पश्चिम एशिया से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इसी क्षेत्र से होकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचते हैं।

स्रोत के अनुसार, ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। लंबे समय तक संभावित व्यवधान की आशंका के बीच खाड़ी के तेल उत्पादक देश ऐसे वैकल्पिक रास्तों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर विचार कर रहे हैं, जिनसे ऊर्जा निर्यात को समुद्री मार्ग पर निर्भरता कम करके जारी रखा जा सके।

EIL के लिए पश्चिम एशिया क्यों अहम है?

पश्चिम एशिया EIL के अंतरराष्ट्रीय कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कंपनी की सऊदी अरब, UAE, बहरीन और कुवैत में परियोजनाओं तथा कारोबारी गतिविधियों में मौजूदगी है।

कंपनी ने सऊदी अरब में अपना कार्यालय भी खोला है, जिससे क्षेत्र में उसकी कारोबारी उपस्थिति को बढ़ाने की कोशिशों का संकेत मिलता है।

EIL के कुल ऑर्डर बुक में विदेशी परियोजनाओं की हिस्सेदारी करीब 43 प्रतिशत बताई गई है। ऐसे में पश्चिम एशिया में नए प्रोजेक्ट कंपनी के अंतरराष्ट्रीय कारोबार के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

संघर्ष के बाद नए ठेकों की रफ्तार हुई धीमी

अतुल गुप्ता के अनुसार, क्षेत्र में संघर्ष के बाद नए ठेके मिलने की रफ्तार फिलहाल धीमी हुई है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि वित्त वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही में ठेकों की गति बढ़ सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा परिस्थितियों ने EIL के लिए कुछ नए कारोबारी अवसर पैदा किए हैं। होर्मुज के विकल्प के रूप में प्रस्तावित तेल एवं गैस इंफ्रास्ट्रक्चर इन्हीं संभावित अवसरों में शामिल हो सकता है।

इंटरनेशनल कंसल्टेंसी से EIL को बड़ा कारोबार

वित्त वर्ष 2025-26 में EIL को मिले नए कारोबार में अंतरराष्ट्रीय परामर्श सेवाओं की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही। कंपनी को इस अवधि में अंतरराष्ट्रीय कंसल्टेंसी सेवाओं से करीब ₹4,929 करोड़ का नया कारोबार मिला, जो कुल नए कारोबार का लगभग 62 प्रतिशत था।

इससे संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय परामर्श और इंजीनियरिंग परियोजनाएं कंपनी की कारोबारी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

आगे क्या?

फिलहाल सऊदी अरब और UAE की प्रस्तावित वैकल्पिक ऊर्जा अवसंरचना परियोजनाएं योजना और बातचीत के शुरुआती चरण में हैं। करीब 1 अरब डॉलर के संभावित निवेश में पाइपलाइन, स्टोरेज और टर्मिनल जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।

EIL इन परियोजनाओं में परामर्श और व्यवहार्यता अध्ययन से जुड़े अवसर तलाश रही है। अंतिम परियोजना, निवेश संरचना और EIL को मिलने वाले ठेके को लेकर अभी औपचारिक पुष्टि का इंतजार है।

Action Bharat | Business Desk

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