नई दिल्ली (Action Bharat) | भारत में फसल सुरक्षा और एग्रोकेमिकल उत्पादन को मजबूत करने के लिए एग्रो केम फेडरेशन ऑफ इंडिया (ACFI) ने केंद्र सरकार से ₹5,000 करोड़ से ₹7,500 करोड़ के विशेष सहायता कार्यक्रम की मांग की है। संगठन का कहना है कि लक्षित और समयबद्ध सरकारी सहायता के जरिए देश में एग्रोकेमिकल टेक्निकल्स और इंटरमीडिएट्स का घरेलू उत्पादन बढ़ाया जा सकता है और चीन पर निर्भरता को कम किया जा सकता है।
ACFI और KPMG इंडिया की रिपोर्ट “Redefining Indian Crop Protection Through Innovation: From Scale to Science” में भारतीय फसल सुरक्षा उद्योग को लेकर एक विस्तृत रोडमैप भी सामने रखा गया है। इसमें उत्पादन क्षमता के साथ-साथ आधुनिक तकनीक, जैविक समाधान, डिजिटल कृषि और रिसर्च पर जोर दिया गया है।
चीन पर निर्भरता घटाने की कोशिश
रिपोर्ट के मुताबिक भारत की रासायनिक उर्वरक और कृषि-रसायन आपूर्ति में चीन की महत्वपूर्ण भूमिका है। ACFI का प्रस्ताव घरेलू स्तर पर जरूरी टेक्निकल्स और इंटरमीडिएट्स के उत्पादन को बढ़ाने पर केंद्रित है।
संगठन के अनुसार, घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ने से:
- महत्वपूर्ण कृषि रसायनों के आयात पर निर्भरता घट सकती है।
- घरेलू उत्पादन और निवेश को बढ़ावा मिल सकता है।
- एग्रोकेमिकल सप्लाई चेन को मजबूत किया जा सकता है।
- भारत को वैश्विक फसल सुरक्षा उद्योग में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
7-8 साल का रोडमैप
ACFI-KPMG रिपोर्ट में सात से आठ साल की सहायता अवधि का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें शुरुआत के दो से तीन वर्षों में प्लांट स्थापित करने और इसके बाद उत्पादन के आधार पर सहायता देने की सिफारिश की गई है।
प्रस्तावित व्यवस्था में बड़े उद्योगों के साथ-साथ MSME कंपनियों को भी शामिल करने की बात कही गई है। यह सहायता ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड, दोनों तरह की परियोजनाओं पर लागू किए जाने का प्रस्ताव है।
इंसेंटिव और बिजली सब्सिडी की सिफारिश
ACFI-KPMG रिपोर्ट में घरेलू उद्योग को अंतरराष्ट्रीय लागत प्रतिस्पर्धा में मदद देने के लिए कई वित्तीय प्रोत्साहनों का सुझाव दिया गया है।
रिपोर्ट में प्रमुख सिफारिशें:
- अतिरिक्त बिक्री पर 5-8% इंसेंटिव।
- औद्योगिक बिजली पर 30-40% सब्सिडी।
- कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट यानी CETP के इस्तेमाल पर सहायता।
- PLI जैसी प्रोत्साहन योजना।
- रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए पूंजीगत अनुदान।
- उपयोगिता लागत को कम करने के लिए राहत।
विशेष एग्रोकेमिकल पार्क बनाने का प्रस्ताव
रिपोर्ट में देश में विशेष एग्रोकेमिकल मैन्युफैक्चरिंग पार्क और क्लस्टर आधारित पर्यावरणीय बुनियादी ढांचे के विकास पर भी जोर दिया गया है।
इसके साथ ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इंटरमीडिएट्स के लिए बैकवर्ड इंटीग्रेशन को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
सरकार से जुड़े नियामकीय सुधारों के तहत रिपोर्ट में:
- केंद्र और राज्य स्तर की मंजूरियों के लिए सिंगल-विंडो डिजिटल सिस्टम।
- जैविक फसल सुरक्षा उत्पादों के लिए स्पष्ट नियामकीय ढांचा।
- लॉन्ग टर्म फाइनेंस की सुविधा।
- क्लस्टर आधारित पर्यावरणीय बुनियादी ढांचे का विकास।
जैसे कदमों की सिफारिश की गई है।
जैविक फसल सुरक्षा उत्पादों पर भी जोर
ACFI-KPMG रिपोर्ट में बायोलॉजिकल क्रॉप प्रोटेक्शन को भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत की:
- जैव विविधता,
- वैज्ञानिक क्षमता,
- कृषि आधार
इस क्षेत्र में देश को आगे बढ़ने का आधार दे सकते हैं।
हालांकि, बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण के लिए गुणवत्ता में एकरूपता, फॉर्मुलेशन की स्थिरता, फील्ड वैलिडेशन और किसानों द्वारा व्यापक स्वीकार्यता जैसी चुनौतियों पर काम करना जरूरी होगा।
ACFI चेयरमैन ने किसानों तक तकनीक पहुंचाने पर दिया जोर
ACFI के चेयरमैन राहुल धानुका ने कहा कि किसानों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आधुनिकता, मजबूत सप्लाई चेन, डिजिटलाइजेशन और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी तकनीक की सफलता केवल उसके विकसित होने पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसे किसानों तक कितने प्रभावी, आसान और भरोसेमंद तरीके से पहुंचाया जा सकता है।
कृषि का भविष्य किन तकनीकों से जुड़ेगा?
ACFI की सालाना आम बैठक के बाद हुई पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने मॉडर्न एग्रीकल्चर, बायोटेक्नोलॉजी, नैनो टेक्नोलॉजी और डिजिटल एग्रीकल्चर की भूमिका पर चर्चा की।
विशेषज्ञों के मुताबिक भविष्य में फसल सुरक्षा, बायोलॉजिकल्स, बेहतर बीज, पोषण और डिजिटल तकनीकों को अलग-अलग नहीं बल्कि एकीकृत तरीके से विकसित करने की जरूरत होगी।
सरकार-उद्योग-किसान सहयोग पर जोर
रिपोर्ट के निष्कर्ष में कहा गया है कि भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी फसल सुरक्षा इकोसिस्टम विकसित करने के लिए सरकार, उद्योग, अनुसंधान संस्थानों, निवेशकों और किसानों के बीच मजबूत सहयोग की जरूरत होगी।
ACFI के प्रस्ताव में ₹5,000-7,500 करोड़ का विशेष सहायता कार्यक्रम इसी व्यापक रोडमैप का हिस्सा है। हालांकि, उपलब्ध स्रोत में इस सहायता पैकेज को लेकर सरकार की ओर से स्वीकृति की जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए फिलहाल इसे उद्योग संगठन की मांग और प्रस्ताव के रूप में देखा जाना चाहिए।
Action Bharat | Business Desk
