मुंबई (Action Bharat) | IIT-बॉम्बे के बीटेक सेकंड ईयर के छात्र साहिल वाकोडे की आत्महत्या के बाद कैंपस में STEM और ह्यूमैनिटीज के नजरिए को लेकर बहस तेज हो गई है। साहिल की मौत के बाद उनके परिवार की ओर से जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं।
मामले में प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठी है। पुलिस ने मामले में शिकायत दर्ज कर जांच शुरू की है।
इस घटना के बाद IIT-बॉम्बे कैंपस में छात्रों और शिक्षकों के बीच घटना को देखने के अलग-अलग नजरिए सामने आए हैं। एक ओर जहां साहिल के परिवार की ओर से जातिगत भेदभाव के आरोपों की जांच की मांग की जा रही है, वहीं कुछ छात्रों और शिक्षकों ने अकादमिक दबाव तथा छात्र कल्याण से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देने की बात कही है।
मामले ने STEM यानी विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित तथा ह्यूमैनिटीज के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण को लेकर भी बहस छेड़ दी है।
IIM कोझिकोड के निदेशक प्रोफेसर देबाशीष चटर्जी ने इस अंतर को अलग-अलग विषयों के सवाल पूछने के तरीके से जोड़ते हुए कहा कि इंजीनियरिंग का नजरिया किसी समस्या के निश्चित उत्तर पर केंद्रित हो सकता है, जबकि साहित्य और ह्यूमैनिटीज का नजरिया यह सवाल उठा सकता है कि किसी निष्कर्ष तक पहुंचने की प्रक्रिया और उसके पीछे की धारणाएं क्या हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इन दोनों नजरियों में से किसी एक को बेहतर बताने का सवाल नहीं है, बल्कि दोनों अलग तरह के सवालों और परिस्थितियों को समझने के लिए विकसित हुए हैं।
इस पूरे विवाद के बीच IIT-बॉम्बे में यह बहस भी सामने आई है कि क्या एक ही कैंपस में अलग-अलग अकादमिक समुदाय किसी घटना को बिल्कुल अलग नजरिए से देख सकते हैं।
हालांकि, साहिल वाकोडे की आत्महत्या से जुड़े आरोपों और परिस्थितियों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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