CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का मोर्चा तेज, महाभियोग से विरोध मार्च और गिरफ्तारी की मांग तक बढ़ा दबाव

राजनीति

नई दिल्ली (Action Bharat) | मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद और तेज हो गया है। मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों के बाद विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाने और देशभर में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है।

25 सितंबर को राज्यों में विरोध मार्च

कांग्रेस ने 25 सितंबर को सभी राज्यों की राजधानियों में राज्य चुनाव आयोग के कार्यालयों तक विरोध मार्च निकालने का फैसला किया है। पार्टी की ओर से ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनकी गिरफ्तारी की मांग उठाने की बात कही गई है।

इसके अलावा कांग्रेस ने अपनी सभी जिला इकाइयों को 28 सितंबर को संबंधित जिलों में कलेक्ट्रेट कार्यालयों तक विरोध मार्च निकालने का निर्देश दिया है।

कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक की तैयारी

विपक्ष की रणनीति को लेकर कांग्रेस की शीर्ष इकाई कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की 29 सितंबर को बैठक बुलाने की भी तैयारी है। रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में CEC के मुद्दे और केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़े आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें विपक्ष के राजनीतिक रुख के रूप में देखा जाना चाहिए।

महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी

कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने विपक्ष की ओर से CEC के खिलाफ दोबारा महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि संसद का सत्र चाहे जब हो, विपक्ष का एजेंडा ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर केंद्रित रहेगा।

तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन ने भी कहा कि उनकी पार्टी विपक्ष के प्रस्ताव में द्रमुक (DMK) और आम आदमी पार्टी (AAP) को शामिल कराने की पहल करेगी।

विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?

यह राजनीतिक टकराव SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों की खबरों के बाद बढ़ा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज की थीं।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इन मतभेदों को आंतरिक संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है और कहा है कि अलग-अलग विचार एवं टिप्पणियां आंतरिक विचार-विमर्श में सामान्य हैं तथा आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

विपक्ष की रणनीति

विपक्षी दलों की ओर से CEC को हटाने, SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाने और चुनाव आयोग के कामकाज की जांच की मांग की जा रही है। कांग्रेस ने संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव लाने के लिए विपक्षी दलों से संपर्क भी किया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और CEC की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

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