चेन्नई | तमिलनाडु की राजनीति में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय सरकार के एक फैसले ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार ने राज्य के सभी 234 विधायकों के लिए सरकारी वाहन और उससे जुड़े खर्च के लिए हर महीने ₹75,000 की सहायता देने की घोषणा की है। इसके अलावा विधायकों के कार्यालय में सचिव रखने के लिए ₹25,000 का मासिक सरकारी अनुदान भी दिया जाएगा।
इस पैकेज में निर्वाचित प्रतिनिधियों के स्वास्थ्य बीमा कवर को ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख किए जाने की घोषणा भी शामिल है।
🚘 हर विधायक को सरकारी कार
सरकार के मुताबिक विधायकों को अपने विधानसभा क्षेत्रों में लगातार दौरे करने पड़ते हैं। जनता की समस्याओं, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कामों की निगरानी के लिए परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक विधायक को सरकारी वाहन देने का फैसला किया गया है।
वाहन के साथ ड्राइवर, ईंधन और मेंटेनेंस से जुड़े खर्चों के लिए ₹75,000 प्रति माह का प्रावधान किया गया है।
👨💼 सचिव रखने के लिए ₹25 हजार
सरकार ने विधायकों के कार्यालय में सचिव/सहायक रखने के लिए भी ₹25,000 प्रतिमाह की अतिरिक्त सरकारी सहायता देने की घोषणा की है।
सरकार का तर्क है कि इससे विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े कामों, शिकायतों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को बेहतर ढंग से संभालने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे कुछ रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
🏥 हेल्थ कवर ₹5 लाख से ₹25 लाख
इस फैसले का एक और बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य बीमा से जुड़ा है। तमिलनाडु सरकार ने मुख्यमंत्री व्यापक स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत वार्षिक स्वास्थ्य कवरेज को ₹5 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख करने की घोषणा की है। यह वृद्धि राज्य की व्यापक स्वास्थ्य नीति का भी हिस्सा है।
यहां एक जरूरी बात यह है कि ₹25 लाख का स्वास्थ्य कवर केवल विधायकों के लिए बनाई गई अलग योजना नहीं है। राज्य की व्यापक स्वास्थ्य बीमा नीति में भी परिवारों के लिए ₹25 लाख तक के कवर का प्रावधान घोषित किया गया है। TVK के आधिकारिक घोषणापत्र में भी हर परिवार के लिए ₹25 लाख के स्वास्थ्य बीमा का वादा दर्ज है।
सरकार ने फैसले का क्या दिया तर्क?
सरकार का कहना है कि मौजूदा विधानसभा में कई विधायक पहली बार चुने गए हैं और उनके लिए निर्वाचन क्षेत्र में लगातार यात्रा करना तथा कार्यालयी काम संभालना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
विधायकों की ओर से विधानसभा में लॉजिस्टिक सहायता की मांग भी उठाई गई थी। इसी मांग के बाद सरकार ने वाहन और कार्यालय संबंधी सहायता का फैसला लिया।
💰 कितना पड़ेगा सरकारी खजाने पर बोझ?
234 विधायकों के लिए केवल ₹75,000 मासिक वाहन/ड्राइवर/संबंधित खर्च को देखें तो:
₹75,000 × 234 = ₹1.755 करोड़ प्रति माह
यानी सालाना करीब ₹21.06 करोड़।
इसके अलावा:
₹25,000 × 234 = ₹58.5 लाख प्रति माह
अर्थात सचिव/सहायक सहायता के लिए सालाना करीब ₹7.02 करोड़।
इस तरह सिर्फ इन दोनों मासिक मदों का मोटा हिसाब लगभग ₹28.08 करोड़ सालाना बैठता है। इसमें नई कारों की खरीद, बीमा, अन्य सरकारी खर्च और स्वास्थ्य बीमा की वास्तविक लागत शामिल नहीं है।
⚡ विपक्ष ने उठाए सवाल
सरकार के इस फैसले पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि जब राज्य के सामने बड़े वित्तीय दबाव हैं, तब सभी विधायकों को नई गाड़ियां और अतिरिक्त भत्ते देना सरकारी खजाने पर अनावश्यक बोझ बढ़ा सकता है। मीडिया रिपोर्टों में DMK की ओर से इसे फिजूलखर्ची बताते हुए आलोचना का उल्लेख किया गया है।
Action Bharat की नजर
यह फैसला सिर्फ 234 विधायकों को मिलने वाली सुविधाओं का मामला नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि जनप्रतिनिधियों को बेहतर काम करने के लिए संसाधन देना और सरकारी खर्च को नियंत्रित रखना—इन दोनों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
सरकार इसे विधायकों की कार्यक्षमता और जनता तक सरकारी योजनाओं की पहुंच बेहतर करने वाला कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे सरकारी धन के इस्तेमाल का मुद्दा बना रहा है। आने वाले दिनों में विधानसभा और राजनीतिक मंचों पर इस पैकेज को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।
मुख्य तथ्य:
🚘 234 विधायक — सरकारी कार
💰 ₹75,000/माह — वाहन, ड्राइवर, ईंधन व संबंधित खर्च
👨💼 ₹25,000/माह — सचिव/सहायक के लिए
🏥 ₹25 लाख — घोषित स्वास्थ्य कवर
⚖️ विपक्ष — सरकारी खजाने पर बोझ का सवाल
