नई दिल्ली (Action Bharat) | देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘मेक इन इंडिया’ पहल ने 12 साल पूरे कर लिए हैं। 25 सितंबर 2014 को शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य भारत को मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और इनोवेशन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना था।
पहल के 12 साल पूरे होने के मौके पर जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन, ऑटोमोबाइल, स्टील, फार्मास्युटिकल और रेलवे जैसे कई क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है।
इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 7 गुना बढ़ा
आंकड़ों के अनुसार, देश का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 के 1.9 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यानी इस अवधि में इसमें करीब सात गुना वृद्धि हुई।
मोबाइल फोन का उत्पादन भी 18,900 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 6.3 लाख करोड़ रुपये हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वॉल्यूम के आधार पर भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता है।
स्टील और ऑटोमोबाइल उत्पादन में भी बढ़ोतरी
देश में कच्चे स्टील का उत्पादन 2014-15 के 81.7 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 170 मिलियन टन हो गया।
वहीं, वाहनों का उत्पादन 2014-15 की तुलना में 2024-25 में 33 प्रतिशत बढ़कर 31.03 मिलियन यूनिट पहुंच गया। यात्री और वाणिज्यिक वाहनों के उत्पादन में इस दौरान 65 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
दोपहिया वाहनों का उत्पादन 30 प्रतिशत और तिपहिया वाहनों का उत्पादन 71 प्रतिशत बढ़ा।
फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर में भी विस्तार
भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग वॉल्यूम के लिहाज से दुनिया में तीसरे और वैल्यू के लिहाज से 11वें स्थान पर बताया गया है।
पिछले पांच वर्षों में औसतन 9.2 प्रतिशत की दर से बढ़ते हुए फार्मा सेक्टर का सालाना टर्नओवर 2025-26 में ₹5,08,630 करोड़ तक पहुंच गया। इसी अवधि में फार्मास्युटिकल निर्यात ₹2,62,697 करोड़ रहा।
मेडिकल डिवाइस का घरेलू उत्पादन भी 2019-20 के करीब ₹28,000 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹41,500 करोड़ हो गया।
रेलवे में बढ़ा घरेलू उत्पादन
भारतीय रेलवे ने 2014 से 2024 के दौरान 54,809 कोच बनाए। रिपोर्ट के मुताबिक, 2004-14 के दौरान रेलवे कोच का औसत वार्षिक उत्पादन 3,300 से कम था, जो 2014-24 में बढ़कर 5,481 प्रति वर्ष हो गया।
2025-26 में भारतीय रेलवे ने 1,674 लोकोमोटिव भी बनाए।
मैन्युफैक्चरिंग GVA में भी वृद्धि
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, स्थिर कीमतों पर मैन्युफैक्चरिंग ग्रॉस वैल्यू एडेड यानी GVA ने 2022-23 से 2025-26 के बीच 10.88 प्रतिशत की CAGR दर्ज की। रिपोर्ट में इसे देश की बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से जोड़ा गया है।
पीयूष गोयल ने क्या कहा?
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत अब केवल अपनी घरेलू जरूरतों के लिए ही उत्पादन नहीं कर रहा, बल्कि दुनिया के लिए भी उत्पाद तैयार कर रहा है।
गोयल ने कहा कि यह उपलब्धियां देश की क्षमताओं में विश्वास और लगातार किए गए सुधारों का परिणाम हैं। उन्होंने 2014 के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भारत में इस्तेमाल होने वाले कई उत्पाद आयात किए जाते थे।
Action Bharat | बिजनेस डेस्क
