नई दिल्ली (Action Bharat) | यूपीआई से भुगतान करने वाले ग्राहकों और कारोबारियों से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI Person-to-Merchant (P2M) लेनदेन पर लगाए गए Merchant Discount Rate (MDR) को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा।
केंद्र सरकार के फैसले के अनुसार 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया जाना है। ₹75,000 या उससे अधिक के भुगतान पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा।
हालांकि, Person-to-Person (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले UPI लेनदेन को इस शुल्क से बाहर रखा गया है और वे मुफ्त रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट में क्या है मामला?
यह जनहित याचिका अधिवक्ता रंजन दत्ता ने दायर की है। याचिका में 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर के MDR ढांचे को चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि शुल्क लागू करने की प्रक्रिया में पर्याप्त वैधानिक सुरक्षा, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श का पालन नहीं किया गया। याचिका में Payment and Settlement Systems Act, 2007 की संशोधित धारा 10A की संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
याचिका में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि बिना विधिवत प्रकाशित वैधानिक दस्तावेज के केवल प्रेस विज्ञप्ति या FAQ के आधार पर शुल्क लगाया जाना उचित है या नहीं।
इसके अलावा, UPI और RuPay डेबिट कार्ड के बीच शुल्क व्यवस्था में अंतर को भी चुनौती दी गई है।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि ₹2,000 से अधिक के इन UPI मर्चेंट भुगतानों पर प्रस्तावित MDR को लेकर आगे क्या कानूनी स्थिति बनती है।
