नई दिल्ली (Action Bharat) | घर में खिड़कियां सिर्फ रोशनी और हवा के लिए ही नहीं, बल्कि वास्तु शास्त्र में भी इन्हें महत्वपूर्ण माना गया है। वास्तु की मान्यताओं के अनुसार, घर की खिड़कियां हमेशा बंद रखने से ऊर्जा का प्रवाह प्रभावित हो सकता है और घर के वातावरण पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
बंद खिड़कियों से नकारात्मकता की मान्यता
वास्तु शास्त्र के अनुसार, लंबे समय तक बंद रहने वाली खिड़कियों से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो सकता है। इससे घर में तनाव, आपसी कलह और आर्थिक परेशानियां बढ़ने जैसी मान्यताएं बताई जाती हैं।
हालांकि, ये वास्तु संबंधी मान्यताएं हैं, वैज्ञानिक रूप से स्थापित कारण-परिणाम नहीं।
स्वास्थ्य के लिहाज से भी जरूरी है हवा और रोशनी
वास्तु की मान्यता से अलग, घर में पर्याप्त वेंटिलेशन और प्राकृतिक रोशनी होना व्यावहारिक रूप से महत्वपूर्ण है। लगातार बंद रहने वाले कमरे में हवा का आवागमन कम हो सकता है और नमी या घर के अंदर के प्रदूषक बढ़ सकते हैं।
इसलिए मौसम और बाहरी हवा की गुणवत्ता अनुकूल होने पर घर की खिड़कियां कुछ समय के लिए खोलना उपयोगी हो सकता है।
गंदी खिड़कियों से भी बचें
वास्तु में साफ खिड़कियों को प्राकृतिक प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा के बेहतर प्रवाह से जोड़ा जाता है। इसलिए खिड़कियों के शीशे और फ्रेम की नियमित सफाई करने की सलाह दी जाती है।
साफ खिड़कियों से प्राकृतिक रोशनी भी आसानी से घर के अंदर पहुंचती है।
भारी पर्दों की जगह हल्के पर्दे
वास्तु संबंधी सलाह में खिड़कियों पर बहुत भारी पर्दों के बजाय ऐसे पर्दे लगाने की बात कही जाती है, जो हवा और रोशनी को पूरी तरह न रोकें।
अगर घर की खिड़कियां ज्यादातर समय बंद रहती हैं, तो वेंटिलेशन, मौसम, सुरक्षा और बाहरी वायु गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए उन्हें उचित समय पर खोलना बेहतर है।
नोट: वास्तु से जुड़े दावे धार्मिक/पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं; इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं लेना चाहिए।
