नई दिल्ली (Action Bharat) | नोएडा में मल्टी-स्टोरी फ्लैटों के मालिकाना हक को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधीर कुमार सक्सेना को एक सदस्यीय स्वतंत्र और उच्चाधिकार प्राप्त समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। समिति फ्लैटों के वास्तविक हकदारों और बाद में खरीदने वाले लोगों के दावों की जांच कर अंतिम सूची तैयार करेगी।
यह मामला केंद्रीय कर्मचारी सहकारी गृह निर्माण समिति से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्रशासन को सोसाइटी के 844 चिन्हित सदस्यों को मल्टी-स्टोरी फ्लैट आवंटित करने का निर्देश दिया था। साथ ही बाद में फ्लैट खरीदने वाले 133 लोगों के दावों की जांच करने को भी कहा गया था।
हालांकि, बाद की सुनवाई में अदालत के सामने अलग-अलग आंकड़े पेश किए गए। मूल खरीदारों की संख्या 844 से बढ़कर 863 बताई गई, जबकि बाद के खरीदारों की संख्या 133 के बजाय 120 बताई गई।
नोएडा प्रशासन ने बाद में फ्लैट खरीदने वालों को मान्यता देने का विरोध किया। प्रशासन ने आवंटन हस्तांतरण पर लगी पाबंदियों और वर्ष 1998 में मूल आवंटन रद्द किए जाने का हवाला दिया।
दूसरी ओर, सोसाइटी का कहना था कि नोएडा प्रशासन हस्तांतरण संबंधी आवेदनों पर कार्रवाई करने में विफल रहा है।
इस विवाद और विरोधाभासी दावों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस सक्सेना को संबंधित दस्तावेजों की जांच करने, अपनी प्रक्रिया निर्धारित करने और सभी दावेदारों की बात सुनने का अधिकार दिया है।
अब समिति की जांच के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि विवादित फ्लैटों पर किन लोगों का दावा मान्य है और किन दावों पर विचार किया जाना चाहिए।
#ActionBharat #SupremeCourt #NoidaNews #FlatDispute #JusticeSudhirKumarSaxena #NoidaAuthority #PropertyDispute #UttarPradeshNews
