श्रीराम से पहले इन 4 महाबलियों के सामने भी नहीं टिक पाया था रावण, पौराणिक कथाओं में मिलते हैं प्रसंग

धर्म-अध्यात्म

नई दिल्ली (Action Bharat) | लंकापति रावण को रामायण में अत्यंत शक्तिशाली योद्धा और महान विद्वान बताया गया है। आम तौर पर उसकी पराजय का उल्लेख भगवान श्रीराम के हाथों लंका युद्ध में किया जाता है। लेकिन विभिन्न रामायण परंपराओं और पौराणिक कथाओं में ऐसे प्रसंग भी मिलते हैं, जिनमें रावण को अन्य महाबलियों के सामने पराजित या विवश होना पड़ा था।

इन कथाओं में वानरराज बाली, सहस्त्रबाहु अर्जुन, राजा बलि और भगवान शिव के प्रसंग विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

वानरराज बाली ने बांह में दबाकर की समुद्रों की परिक्रमा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार रावण वानरराज बाली से युद्ध करने पहुंचा। उस समय बाली पूजा कर रहा था, लेकिन रावण लगातार उसे युद्ध के लिए ललकारता रहा।

कहा जाता है कि बाली ने रावण को अपनी बांह में दबा लिया और फिर चारों समुद्रों की परिक्रमा करने निकल पड़ा। रावण उसकी पकड़ से खुद को छुड़ा नहीं पाया। बाली को मिले वरदान के अनुसार, उससे युद्ध करने वाले प्रतिद्वंद्वी की आधी शक्ति उसमें समाहित हो जाती थी। इस कारण रावण भी उसके सामने कमजोर पड़ गया।

सहस्त्रबाहु अर्जुन ने किया रावण को पराजित

सहस्त्रबाहु अर्जुन, जिन्हें कार्तवीर्य अर्जुन भी कहा जाता है, पौराणिक कथाओं में अत्यंत पराक्रमी राजा माने गए हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि उनकी एक हजार भुजाएं थीं।

कथा के अनुसार, रावण उनसे युद्ध करने पहुंचा। उस समय सहस्त्रबाहु ने अपनी भुजाओं से नर्मदा नदी का प्रवाह रोक दिया। बाद में पानी छोड़े जाने पर तेज बहाव से रावण की सेना प्रभावित हुई। इसके बाद हुए युद्ध में रावण को पराजय का सामना करना पड़ा।

राजा बलि के महल में बच्चों ने रावण को बनाया बंदी

पाताल लोक के राजा बलि से जुड़ी एक कथा भी रावण के अहंकार और उसकी पराजय का प्रसंग सुनाती है। बताया जाता है कि रावण राजा बलि को युद्ध के लिए ललकारने उनके महल पहुंचा।

वहां कुछ बच्चे खेल रहे थे। कथा के अनुसार, उन्होंने रावण को पकड़कर अस्तबल में घोड़ों के साथ बांध दिया। रावण अपनी शक्ति के बावजूद खुद को मुक्त नहीं करा पाया। यह प्रसंग उसकी शक्ति के सामने भी विनम्रता और परिस्थितियों के महत्व को दर्शाता है।

भगवान शिव ने अंगूठे से दबाया कैलाश पर्वत

रावण भगवान शिव का परम भक्त माना जाता है, लेकिन एक कथा में उसके अहंकार का प्रसंग भी आता है। कहा जाता है कि रावण ने अपनी शक्ति दिखाने के लिए कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास किया।

तब भगवान शिव ने अपने पैर के अंगूठे से पर्वत को दबा दिया, जिससे रावण का हाथ उसके नीचे फंस गया। काफी प्रयास के बाद भी वह हाथ नहीं निकाल सका। अंततः रावण ने भगवान शिव से क्षमा मांगी और उनकी स्तुति की।

कथाओं में छिपा संदेश

इन पौराणिक प्रसंगों में रावण की पराजय केवल युद्ध-कौशल की कहानी नहीं है, बल्कि अहंकार और शक्ति के दुरुपयोग के परिणामों की ओर भी संकेत करती है। अलग-अलग ग्रंथों और रामायण परंपराओं में इन घटनाओं के विवरण भिन्न हो सकते हैं। इसलिए इन्हें पौराणिक कथाओं और धार्मिक परंपराओं के संदर्भ में समझना चाहिए।

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