लखनऊ (Action Bharat) | उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत को जाति, क्षेत्र और संकीर्ण स्वार्थों के आधार पर बांटने वाली शक्तियों को सफल नहीं होने देना चाहिए। सामाजिक एकता के जरिए ही राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों से युवाओं को संस्कार, कर्तव्यबोध और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ने का आह्वान किया।
शिक्षक समाज की चेतना और राष्ट्र के भविष्य के निर्माता
मुख्यमंत्री रविवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के डॉ. बीआर अंबेडकर सभागार में आयोजित प्रांतीय शिक्षक गौरव कार्यशाला में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज की चेतना हैं और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करते हैं। जागरूक शिक्षक युवा पीढ़ी का सही मार्गदर्शन करें तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई रोक नहीं सकता।
गीता प्रेस, RSS और गायत्री परिवार का किया उल्लेख
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1923 में गोरखपुर में गीता प्रेस, 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और 1926 में अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना हुई। तीनों संस्थाओं के कार्यक्षेत्र और रास्ते अलग रहे, लेकिन समाज में जनचेतना जगाना और भारतीय संस्कृति व सनातन मूल्यों से लोगों को जोड़ना उनका साझा उद्देश्य रहा।
मुख्यमंत्री ने अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने आध्यात्मिक शक्ति को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का काम किया। उन्होंने कहा कि विचार कभी समाप्त नहीं होते और विचारों के आधार पर चलने वाले संगठन लंबे समय तक प्रभावी रहते हैं।
संयुक्त परिवार और सामाजिक संस्थाओं की भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि संयुक्त परिवार पहले समाज की बड़ी ताकत हुआ करते थे, जहां परिवार के सदस्य एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहते थे। आज परिवारों के बिखरने के बीच समाज को जोड़ने वाली संस्थाओं की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार बच्चों को संस्कार देने और उन्हें गायत्री मंत्र से जोड़ने का कार्य कर रहा है। योगी ने धर्म और विज्ञान को एक-दूसरे का विरोधी नहीं, बल्कि सहयोगी मानने की विचारधारा पर भी जोर दिया।
युवाओं को ज्ञान परंपरा और राष्ट्र के कर्तव्यों से जोड़ने की अपील
योगी आदित्यनाथ ने चाणक्य-चंद्रगुप्त, महर्षि वशिष्ठ-श्रीराम और महर्षि सांदीपनि-श्रीकृष्ण की गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा ने दुनिया को दिशा दी है।
उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे युवाओं को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के साथ उनमें राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्यबोध भी विकसित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारों के साथ नागरिक कर्तव्यों की समझ भी जरूरी है।
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का जिक्र
मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 2017 से 2026 तक 275 करोड़ पौधारोपण किया गया है और इस वर्ष भी 35 करोड़ पौधे लगाए गए हैं।
उन्होंने नदियों को शरीर की धमनियों के समान बताते हुए उनके संरक्षण और पुनर्जीवन को आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी बताया।
2047 तक विकसित भारत का संकल्प
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को विरासत के गौरव, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण से जोड़ना शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
कार्यशाला में अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. चिन्मय पंड्या, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह सहित गायत्री परिवार से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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