नई दिल्ली (Action Bharat) | दिल्ली सरकार राजधानी के प्रमुख सरकारी अस्पतालों को आने वाले 30 वर्षों की जरूरतों के हिसाब से विकसित करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) समेत पांच प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के पुनर्विकास का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इस योजना में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ एयर एंबुलेंस की व्यवस्था, नए भवन, पार्किंग, आवास, शोध केंद्र और मरीजों के तीमारदारों के लिए सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव शामिल है।
MAMC में बनेगा हेलीपैड, एयर एंबुलेंस की मिलेगी सुविधा
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के प्रस्तावित मास्टर प्लान की सबसे अहम विशेषताओं में से एक हेलीपैड का निर्माण है। इसका उद्देश्य गंभीर मरीजों को एयर एंबुलेंस के जरिए तेजी से अस्पताल तक पहुंचाने और आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करना है।
योजना के तहत हेलीपैड को अस्पताल की आपात चिकित्सा व्यवस्था से जोड़ने पर भी विचार किया जा रहा है। मरीजों, मेडिकल स्टाफ और जरूरी उपकरणों की तेजी से आवाजाही के लिए परिसर के भीतर विशेष भूमिगत या ऊपरी संपर्क मार्ग विकसित करने की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी।
इस तरह की व्यवस्था गंभीर दुर्घटनाओं, आपात स्थितियों और ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, जहां मरीज को सड़क मार्ग के बजाय कम समय में अस्पताल पहुंचाना जरूरी हो।
पांच बड़े चिकित्सा संस्थान होंगे विकसित
पुनर्विकास योजना में केवल MAMC ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े चार अन्य प्रमुख संस्थानों को भी शामिल किया गया है। इनमें:
- मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC)
- लोकनायक अस्पताल
- जीबी पंत अस्पताल
- गुरु नानक आई सेंटर
- मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज
शामिल हैं।
पीडब्ल्यूडी ने इस व्यापक मास्टर प्लान को तैयार करने के लिए 36 महीने की कंसल्टेंसी सेवा लेने का टेंडर जारी किया है। इसका उद्देश्य मौजूदा अस्पताल परिसरों की स्थिति का अध्ययन कर अगले तीन दशकों की जरूरतों के अनुरूप चरणबद्ध विकास की योजना तैयार करना है।
करीब 90 एकड़ क्षेत्र में बनेगी विकास की रूपरेखा
पीडब्ल्यूडी के अनुसार, इस मास्टर प्लान के लिए कुल 3.64 लाख वर्गमीटर, यानी करीब 90 एकड़ क्षेत्र को ध्यान में रखा गया है।
मौजूदा पुराने और नए भवनों की स्थिति का सर्वे करने के बाद यह तय किया जाएगा कि किन भवनों को बनाए रखना है, किन्हें मजबूत करना है और किन पुराने भवनों को हटाकर उनकी जगह नए निर्माण किए जा सकते हैं।
योजना के तहत करीब एक लाख वर्गमीटर क्षेत्र में नए भवनों के निर्माण की संभावना भी रखी गई है।
पुराने भवनों का होगा स्ट्रक्चरल ऑडिट
पुनर्विकास योजना में पुराने भवनों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। वर्ष 2000 से पहले बने और 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले भवनों के करीब 75 हजार वर्गमीटर क्षेत्र का संरचनात्मक ऑडिट कराया जाएगा।
ऑडिट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन भवनों को मजबूत करने की जरूरत है और किन भवनों को भविष्य की पुनर्विकास योजना में शामिल किया जाना चाहिए।
सड़क और पार्किंग व्यवस्था भी होगी बेहतर
मास्टर प्लान केवल अस्पताल की इमारतों तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें अस्पताल परिसर के भीतर सड़क, प्रवेश और निकास मार्ग, आपातकालीन रास्ते और पार्किंग व्यवस्था को भी नए सिरे से विकसित करने की योजना है।
इसके अलावा डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए आवास, मेडिकल छात्रों और नर्सों के लिए छात्रावास तथा मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों के लिए भी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है।
शोध और शिक्षा पर भी रहेगा जोर
योजना में मेडिकल शिक्षा और शोध को मजबूत करने के लिए केंद्रीय पुस्तकालय और बहुविषयक शोध केंद्र विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही कन्वेंशन सेंटर और खेल सुविधाएं भी तैयार की जा सकती हैं।
दूर-दराज से इलाज के लिए आने वाले मरीजों के तीमारदारों के लिए डारमेट्री और बजट होटल जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना भी मास्टर प्लान में शामिल है।
फायर स्टेशन से लेकर कचरा प्रबंधन तक की व्यवस्था
अस्पताल परिसर को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से आधुनिक बनाने के लिए कई अन्य सुविधाओं का भी प्रस्ताव है। इनमें केंद्रीय रिसेप्शन और हेल्प डेस्क, सुविधा प्रबंधन केंद्र, मिनी फायर स्टेशन, कैफेटेरिया, अलग बिजली वितरण व्यवस्था और जैविक चिकित्सा कचरा प्रबंधन संयंत्र शामिल हैं।
इसके अलावा अस्पताल परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
30 साल की जरूरतों को ध्यान में रखकर होगा विकास
इस पूरी योजना का उद्देश्य केवल मौजूदा अस्पतालों की मरम्मत या नए भवन बनाना नहीं है, बल्कि दिल्ली की बढ़ती आबादी और भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए इन संस्थानों का दीर्घकालिक पुनर्विकास करना है।
अगर प्रस्तावित मास्टर प्लान तय योजना के अनुसार आगे बढ़ता है, तो MAMC और इससे जुड़े अस्पतालों में आपात चिकित्सा, एयर एंबुलेंस, मेडिकल शिक्षा, शोध, मरीजों और तीमारदारों की सुविधाओं के साथ-साथ अस्पताल परिसर की आधारभूत संरचना में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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