नई दिल्ली (Action Bharat) | दिल्ली की प्रमुख सड़कों को गड्ढा-मुक्त करने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने समयबद्ध अभियान शुरू किया है। विभाग ने 30 नवंबर 2026 तक करीब 600 किलोमीटर प्रमुख सड़कों को गड्ढा-मुक्त करने का लक्ष्य तय किया है। सड़क निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ काम में लापरवाही की स्थिति में संबंधित एजेंसी और ठेकेदार की जवाबदेही तय करने की व्यवस्था भी की जा रही है।
दिल्ली के लोक निर्माण विभाग के मंत्री प्रवेश वर्मा ने सड़क निर्माण कार्यों की जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए देर रात औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सड़क की गुणवत्ता, निर्माण की मोटाई और काम की गति की जांच की तथा अधिकारियों को निर्धारित मानकों के अनुसार निर्माण कराने के निर्देश दिए।
देर रात अफ्रीका एवेन्यू मार्ग पर पहुंचकर किया निरीक्षण
PWD मंत्री प्रवेश वर्मा बृहस्पतिवार और शुक्रवार की दरम्यानी रात करीब 12 बजे अफ्रीका एवेन्यू मार्ग पर चल रहे सड़क निर्माण कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे।
इस दौरान उन्होंने मौके पर चल रहे निर्माण कार्य को देखा और अधिकारियों से काम की प्रगति तथा गुणवत्ता से संबंधित जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर ध्यान दिया गया—
- सड़क निर्माण की गुणवत्ता
- सड़क की निर्धारित मोटाई
- निर्माण कार्य की गति
- निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन
- निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी
मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता मानकों से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
30 नवंबर तक 600 किलोमीटर सड़कें गड्ढा-मुक्त करने का लक्ष्य
PWD ने दिल्ली की करीब 600 किलोमीटर प्रमुख सड़कों को 30 नवंबर तक गड्ढा-मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
सरकार की योजना केवल मौजूदा गड्ढों को भरने तक सीमित नहीं है। सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर भी विशेष निगरानी रखने की बात कही गई है, ताकि मरम्मत और निर्माण के बाद सड़क की स्थिति लंबे समय तक बेहतर बनी रहे।
दिल्ली में PWD के पास फिलहाल करीब 1,400 किलोमीटर सड़कों का नेटवर्क बताया गया है। इस पूरे नेटवर्क को चरणबद्ध तरीके से सुधारने की योजना पर काम किया जा रहा है।
सड़क की गुणवत्ता जांचने के लिए थर्ड-पार्टी एजेंसी
सड़क निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की निगरानी के लिए मौके पर ही थर्ड-पार्टी एजेंसी को विशेष मशीनों के साथ तैनात किया गया है।
इन मशीनों की मदद से निर्माणाधीन सड़क की गुणवत्ता और उसकी मोटाई की जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सड़क निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।
गुणवत्ता निगरानी में इन पहलुओं पर जोर
- सड़क की निर्धारित मोटाई की जांच
- निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की निगरानी
- निर्धारित मानकों के अनुसार काम की जांच
- निर्माण कार्य की मौके पर जांच
- लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय करना
ठेकेदार को पांच साल तक करना होगा सड़क का रखरखाव
सड़क निर्माण में ठेकेदारों की जवाबदेही बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था लागू करने की बात कही गई है।
जिस कंपनी को सड़क निर्माण का काम दिया जाएगा, उसे निर्माण पूरा होने के बाद अगले पांच वर्षों तक उसी सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी को सिर्फ सड़क बनाने तक सीमित न रखना है। यदि निर्माण के बाद सड़क की स्थिति खराब होती है, तो संबंधित ठेकेदार या एजेंसी की जवाबदेही तय करना आसान होगा।
लापरवाही मिलने पर एजेंसी और ठेकेदार पर कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने कहा कि निर्माण कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही सामने आने पर संबंधित एजेंसी और ठेकेदार की जवाबदेही तय की जाएगी।
इसका सीधा उद्देश्य सड़क निर्माण में गुणवत्ता को प्राथमिकता देना और निर्धारित मानकों के अनुरूप काम सुनिश्चित करना है।
सरकार की ओर से सड़क निर्माण कार्यों की निगरानी को मजबूत करने के लिए थर्ड-पार्टी जांच व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा है।
बिटुमिन की आपूर्ति प्रभावित होने से निर्माण में हुई देरी
PWD की ओर से सड़क निर्माण कार्य में हुई देरी के पीछे बिटुमिन यानी तारकोल की आपूर्ति प्रभावित होने को भी एक कारण बताया गया है।
मंत्री के निरीक्षण के बाद दी गई जानकारी के अनुसार, वैश्विक तनाव और युद्ध के हालात का असर बिटुमिन की आपूर्ति पर पड़ा। आपूर्ति प्रभावित होने के साथ इसकी कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई, जिसके चलते कुछ सड़क परियोजनाओं के काम में देरी हुई।
अब विभाग की ओर से नए सिरे से टेंडर जारी किए गए हैं और कई हिस्सों में सड़क निर्माण का काम दोबारा तेज गति से शुरू किया गया है।
1,400 किलोमीटर सड़क नेटवर्क को चरणबद्ध तरीके से सुधारने की योजना
दिल्ली PWD के पास करीब 1,400 किलोमीटर सड़कों का नेटवर्क है। विभाग इस नेटवर्क को चरणबद्ध तरीके से सुधारने की योजना पर काम कर रहा है।
पहले चरण में करीब 600 किलोमीटर प्रमुख सड़कों को 30 नवंबर तक गड्ढा-मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद सड़क नेटवर्क के अन्य हिस्सों में भी सुधार कार्य आगे बढ़ाए जाने की योजना है।
सिर्फ गड्ढे भरना नहीं, गुणवत्ता पर भी जोर
दिल्ली में मानसून और लगातार यातायात के कारण सड़कों पर गड्ढों की समस्या सामने आती रही है। ऐसे में PWD की मौजूदा योजना में सड़क की मरम्मत के साथ-साथ निर्माण की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही गई है।
थर्ड-पार्टी एजेंसी की निगरानी, निर्माण की मोटाई की जांच और पांच वर्ष तक ठेकेदार की रखरखाव जिम्मेदारी जैसे प्रावधानों का उद्देश्य सड़क निर्माण की जवाबदेही को मजबूत करना है।
अब देखना होगा कि 30 नवंबर की तय समयसीमा तक 600 किलोमीटर प्रमुख सड़कों को गड्ढा-मुक्त करने का लक्ष्य किस स्तर तक पूरा होता है और नई सड़कों की गुणवत्ता कितनी टिकाऊ साबित होती है।
Action Bharat | Delhi Desk
