नई दिल्ली (Action Bharat) | दिल्ली हाई कोर्ट ने राजधानी के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर को लेकर बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने पूरे नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर को नो-हॉकिंग और नो-वेंडिंग जोन घोषित कर दिया है। अदालत के आदेश के बाद अब 12 अक्टूबर से दिल्ली नगर निगम (MCD) को इलाके में मौजूद अनधिकृत वेंडरों के खिलाफ कार्रवाई करने की छूट होगी।
यह फैसला लंबे समय से नेहरू प्लेस में चल रहे अतिक्रमण, अव्यवस्थित वेंडिंग और जाम की समस्या को देखते हुए आया है। अदालत ने साफ किया है कि जिन स्थानों को वेंडिंग के लिए विशेष रूप से चिह्नित किया गया है, उन्हें छोड़कर पूरे डिस्ट्रिक्ट सेंटर में वेंडिंग करना अवैध माना जाएगा।
12 अक्टूबर के बाद MCD हटाएगी अनधिकृत वेंडर
दिल्ली हाई कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि 12 अक्टूबर के बाद MCD नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर से अनधिकृत वेंडरों को हटाने और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अनधिकृत वेंडरों को हटाए जाने के बाद दिल्ली फायर सर्विस पूरे डिस्ट्रिक्ट सेंटर का निरीक्षण करेगी और अदालत के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करेगी।
इस निरीक्षण का उद्देश्य यह देखना होगा कि अतिक्रमण और अनधिकृत वेंडिंग हटाए जाने के बाद इलाके में सुरक्षा और आवाजाही की स्थिति अदालत के निर्देशों के अनुरूप है या नहीं।
90 वेंडरों को फिलहाल वैकल्पिक जगह
हालांकि अदालत ने सभी वेंडरों को तत्काल बेरोजगार करने का आदेश नहीं दिया है। पीठ ने 90 वेंडरों को 12 अक्टूबर से पास की एक वैकल्पिक जगह पर वेंडिंग करने की अनुमति दी है।
इन 90 वेंडरों के वास्तविक अधिकारों और वेंडिंग सर्टिफिकेट की पात्रता का फैसला टाउन वेंडिंग कमेटी-2 (TVC-2) करेगी।
अदालत ने निर्देश दिया है कि TVC-2 के गठन के बाद यह तय किया जाए कि संबंधित वेंडर स्ट्रीट वेंडर्स कानून के तहत वेंडिंग सर्टिफिकेट के हकदार हैं या नहीं। यदि वे पात्र पाए जाते हैं तो उन्हें किस क्षेत्र में वेंडिंग की अनुमति दी जाएगी, इसका फैसला कमेटी के गठन के दो महीने के भीतर किया जाना होगा।
400 से ज्यादा वेंडर, लेकिन अधिकृत केवल 90
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि वर्तमान में नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर में 400 से अधिक वेंडर सामान बेच रहे हैं। इनमें से बड़ी संख्या में वेंडर बिना वैध अनुमति के काम कर रहे हैं।
बताया गया कि फिलहाल केवल 90 वेंडर ही अधिकृत हैं। अदालत ने इसी स्थिति को देखते हुए स्पष्ट किया कि निर्धारित वेंडिंग क्षेत्र के अलावा किसी अन्य स्थान पर सामान बेचने का अधिकार अन्य वेंडरों के पास नहीं है।
अदालत ने यह भी कहा कि नेहरू प्लेस को पहले ही कई न्यायिक आदेशों के माध्यम से नो-हॉकिंग और नो-वेंडिंग जोन घोषित किया जा चुका है।
2009 से चल रहा है विवाद
नेहरू प्लेस में वेंडिंग का विवाद नया नहीं है। यह मामला वर्ष 2009 के एक पुराने निर्णय से जुड़ा हुआ है। उस समय शुरुआत में 67 वेंडरों को नेहरू प्लेस के एक निर्धारित क्षेत्र में सामान बेचने की अनुमति दी गई थी।
बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने नेहरू प्लेस डिस्ट्रिक्ट सेंटर को नो-हॉकिंग और नो-वेंडिंग जोन घोषित कर दिया था। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप नहीं किया।
इसके बावजूद समय के साथ नेहरू प्लेस में बड़ी संख्या में वेंडरों और हाकरों की मौजूदगी बढ़ती गई, जिससे इलाके में अतिक्रमण और यातायात संबंधी समस्याएं सामने आती रहीं।
अब क्या होगा?
हाई कोर्ट के ताजा आदेश के बाद 12 अक्टूबर के बाद नेहरू प्लेस में MCD की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। निगम को अनधिकृत वेंडरों को हटाने की कार्रवाई करनी होगी, जबकि अधिकृत 90 वेंडरों के लिए फिलहाल वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था की गई है।
इसके बाद TVC-2 यह तय करेगी कि कौन से वेंडर कानून के तहत वेंडिंग के लिए पात्र हैं और उन्हें भविष्य में किस स्थान पर वेंडिंग की अनुमति दी जा सकती है।
वहीं, दिल्ली फायर सर्विस द्वारा इलाके का निरीक्षण कर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल किए जाने से यह भी स्पष्ट होगा कि अतिक्रमण हटने के बाद नेहरू प्लेस में आपातकालीन आवाजाही और अग्नि सुरक्षा की स्थिति कितनी बेहतर हुई है।
नेहरू प्लेस दिल्ली का प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर मार्केट होने के कारण बेहद व्यस्त इलाका है। ऐसे में हाई कोर्ट के इस आदेश का असर वेंडरों, दुकानदारों, ग्राहकों और पूरे डिस्ट्रिक्ट सेंटर की यातायात व्यवस्था पर पड़ना तय माना जा रहा है।
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