नई दिल्ली (Action Bharat) | प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड की कथित हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। शुरुआती जांच में एजेंसी ने करीब 200 करोड़ रुपये के फंड की हेराफेरी का अनुमान लगाया है। जांच का दायरा कई कॉर्पोरेट घरानों, अस्पतालों, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और सरकारी बैंकों तक पहुंचा है।
ED के मुताबिक, इस कथित रैकेट में CSR फंड को चैरिटी के नाम पर ट्रस्टों तक पहुंचाया जाता था। इसके बाद कमीशन काटकर फंड का बड़ा हिस्सा कथित तौर पर नकद के रूप में संबंधित योगदानकर्ताओं तक वापस पहुंचाया जाता था।
फर्जी डॉक्टर के जरिए चल रहा था कथित नेटवर्क
ED के अनुसार, धर्मेंद्र कुमार चंद्रदेव नाम का व्यक्ति करीब तीन दशक से खुद को डॉक्टर बताकर लोगों को कथित तौर पर धोखा दे रहा था। आरोप है कि उसने टैक्स-फ्री चैरिटी के नाम पर कई ट्रस्ट बनाए, जिनमें कॉर्पोरेट संस्थाओं से CSR फंड लिया जाता था।
जांच एजेंसी के मुताबिक, कमीशन रखने के बाद रकम कथित तौर पर कैश के रूप में वापस की जाती थी। CSR फंड जारी कराने के लिए कुछ PSU और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत दिए जाने का भी आरोप है।
4 राज्यों और दिल्ली-NCR में छापेमारी
केंद्रीय एजेंसी ने 1 अक्टूबर को महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात और दिल्ली-NCR में आठ ठिकानों पर तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान PSU अधिकारियों और कॉर्पोरेट अस्पतालों से जुड़े दस्तावेजों तथा लेन-देन से संबंधित साक्ष्य जब्त किए गए। तलाशी में 21 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी भी बरामद होने की बात कही गई है।
ED को एजेंटों और बिचौलियों के ऐसे नेटवर्क का भी पता चला, जो CSR फंड को ट्रस्टों तक पहुंचाने में कथित तौर पर भूमिका निभाते थे। इसके बाद रकम को कथित रूप से शेल कंपनियों के जरिए घुमाया जाता था। एजेंसी के अनुसार, इनमें से कई कंपनियां पहले से GST धोखाधड़ी से जुड़ी जांच में संदिग्ध रही हैं।
40 PSU और सरकारी बैंकों की भूमिका की जांच
ED के मुताबिक, देशभर में कम से कम 40 PSU और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने आरोपियों द्वारा संचालित ट्रस्टों को CSR डोनेशन दिया।
जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि कई परियोजनाएं अधूरी रहीं या प्राप्त फंड के अनुपात में पूरी नहीं की गईं। वहीं, कुछ मामलों में वेंडर के बिल कथित तौर पर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए और अतिरिक्त धन को फर्जी या शेल कंपनियों के जरिए इधर-उधर किया गया।
ED अब कथित CSR फंड की पूरी मनी ट्रेल, रिश्वत के लेन-देन, बिचौलियों की भूमिका और संबंधित संस्थाओं के वित्तीय नेटवर्क की जांच कर रही है। ये सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।
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