₹650 करोड़ के कथित मेडिकल खरीद घोटाले में नया मोड़, ACB का दावा- ‘महत्वपूर्ण फाइलें जलाई गईं’

क्राइम

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार की केंद्रीय खरीद एजेंसी (CPA) से जुड़े करीब ₹650 करोड़ के कथित दवा और चिकित्सा उपकरण खरीद घोटाले की जांच में अब रिकॉर्ड नष्ट किए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने अदालत के समक्ष कहा है कि घोटाले से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण फाइलें केवल गायब नहीं हुईं, बल्कि उन्हें जानबूझकर नष्ट किए जाने की आशंका है।

सात महत्वपूर्ण फाइलों पर उठे सवाल

जांच में जिन रिकॉर्ड को अहम माना जा रहा है, उनमें दवाओं, सर्जिकल सामग्री, अस्पतालों के लिनेन और मेडिकल उपकरणों की खरीद से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार इनमें ORS, पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, सी-आर्म उपकरण, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, बेडशीट-लिनेन और जरूरी दवाओं की खरीद के रिकॉर्ड शामिल हैं।

इन फाइलों से टेंडर प्रक्रिया, खरीद दर, आपूर्ति, अस्पतालों में वितरण, स्टॉक और भुगतान की पूरी कड़ी जोड़ने में मदद मिल सकती थी।

एक्स-रे मशीन और ORS की खरीद पर भी सवाल

ACB की जांच में खरीद कीमतों को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। सार्वजनिक रिपोर्टों में आरोप है कि करीब ₹10 लाख कीमत वाली पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें लगभग ₹33 लाख प्रति मशीन की दर से खरीदी गईं। इसी तरह ORS के एक पैकेट की कीमत करीब ₹2.5 के मुकाबले ₹15 तक भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया है।

बेडशीट की खरीद में भी बाजार कीमत से कई गुना अधिक भुगतान किए जाने के आरोप सामने आए हैं।

जांच से पहले रिकॉर्ड नहीं मिले

रिपोर्टों के मुताबिक, जांच अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड मांगे जाने के बावजूद कई महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे। बाद में मामले की जांच ACB तक पहुंची और FIR दर्ज की गई। जांच एजेंसी अब खरीद प्रक्रिया, अधिकारियों की भूमिका, आपूर्तिकर्ताओं और भुगतान की पूरी कड़ी की पड़ताल कर रही है। मामले में ACB पहले ही कार्रवाई कर चुकी है और जांच में कई अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। जून 2026 में इस मामले में गिरफ्तारियां भी हुई थीं।

डिजिटल रिकॉर्ड से खुल सकता है राज

हालांकि कागजी फाइलों के नष्ट होने का आरोप जांच के लिए गंभीर है, लेकिन ई-टेंडर, भुगतान रिकॉर्ड, लेखा दस्तावेज और डिजिटल स्टॉक रिकॉर्ड के जरिए खरीद की कई जानकारियां दोबारा जुटाई जा सकती हैं।

अब बड़ा सवाल यही है कि फाइलें वास्तव में कैसे और किसके निर्देश पर नष्ट हुईं, और क्या रिकॉर्ड नष्ट करने का मकसद कथित खरीद अनियमितताओं से जुड़े सबूतों को छिपाना था। इसका जवाब ACB की आगे की जांच और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों से सामने आएगा।

नोट: ₹650 करोड़ का आंकड़ा और खरीद में अनियमितताओं से जुड़े आरोप जांच का विषय हैं। अंतिम जिम्मेदारी और दोष अदालत में साक्ष्यों के आधार पर तय होगा।

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