गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा क्यों होती है? भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति से जुड़ी है मान्यता

धर्म-अध्यात्म

नई दिल्ली (Action Bharat) | हिंदू धार्मिक परंपराओं में कई पेड़-पौधों को विशेष पवित्र माना गया है। इन्हीं में केले का पौधा भी शामिल है। धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार केले के पौधे का संबंध गुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु से माना जाता है, इसलिए गुरुवार को इसकी पूजा करना शुभ माना जाता है।

केले के पौधे का गुरु बृहस्पति से संबंध

ज्योतिषीय मान्यताओं में केले के पौधे को बृहस्पति ग्रह से जोड़ा जाता है। शुभ कार्यों में केले के पौधे का मंडप बनाने, इसके पत्तों का इस्तेमाल तोरण और पूजा में करने तथा भोग आदि में केले के पत्ते का उपयोग करने की परंपरा रही है।

मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति कमजोर स्थिति में हो, वे गुरुवार को केले के पौधे की पूजा कर सकते हैं। पूजा के दौरान केले के पौधे पर हल्दी अर्पित करने की भी परंपरा है।

सुखी दांपत्य और स्वास्थ्य से जुड़ी मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में केले का पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करना शुभ माना जाता है। गुरुवार को केले के पौधे में जल अर्पित करने और पूजा करने से गुरु बृहस्पति की कृपा मिलने की मान्यता है।

इसे सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि से भी जोड़ा जाता है। हालांकि ये धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं, इनके वैज्ञानिक प्रभाव का दावा नहीं किया जा सकता।

भगवान विष्णु से क्या है संबंध?

धार्मिक परंपराओं में केले के वृक्ष को कदली वृक्ष कहा जाता है और इसे भगवान विष्णु से संबंधित माना जाता है। गुरुवार का दिन भी भगवान विष्णु के साथ-साथ गुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है।

इसी कारण गुरुवार को केले के पौधे की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि इस दिन केले के पौधे की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

कई परंपराओं में केले के पौधे के सामने घी का दीपक जलाने और जल अर्पित करने की भी विधि बताई गई है। धार्मिक विश्वास के अनुसार इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

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