किंशासा (Action Bharat) | डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में जारी संघर्ष ने एक खतरनाक आर्थिक तंत्र को जन्म दिया है। M23 विद्रोही समूह के साथ जारी युद्ध की आड़ में स्थानीय मिलिशिया हथियारों, सोने की खदानों, सड़क टोल और फिरौती के जरिए कथित तौर पर अपनी समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी कर रहे हैं।
देशभक्ति के नाम पर वसूली
दक्षिण-पूर्वी DRC के टैंगानिका प्रांत का म्वाला गांव इस स्थिति का उदाहरण बताया जा रहा है। M23 के हमलों के बाद जब सरकारी सेना पीछे हटी तो बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद पीछे छूट गए। स्थानीय लड़ाकों ने इन हथियारों पर कब्जा कर खुद को ‘वाजालेंडो’ यानी देशभक्त घोषित कर लिया।
रिपोर्ट के अनुसार, गांव में करीब 100 हथियारबंद लड़ाके मौजूद हैं। आरोप है कि वे एक चीनी कंपनी द्वारा संचालित सोने की खदान को सुरक्षा देने के बदले हर महीने 100 से 150 डॉलर तक वसूलते हैं।
तीर-कमान से भारी हथियारों तक
पूर्वी कांगो में कई स्थानीय सशस्त्र समूहों के पास अब पहले की तुलना में कहीं अधिक आधुनिक हथियार पहुंच गए हैं। सेना के पीछे हटने और हथियारों की लूट के बाद कुछ मिलिशिया समूहों के पास भारी मशीन गन और रॉकेट लॉन्चर तक पहुंचने की बात सामने आई है।
यह स्थिति उस क्षेत्र की शांति प्रक्रिया के लिए भी गंभीर चुनौती है, जहां पिछले वर्षों में जातीय हिंसा के बाद निरस्त्रीकरण और पुनर्वास पर बड़ी रकम खर्च की गई थी।
सोने की खदानों से रोड टोल और फिरौती तक
कांगो की खनिज संपदा लंबे समय से विदेशी निवेशकों को आकर्षित करती रही है। मिलिशिया समूहों पर आरोप है कि वे सोने की खदानों और खनन गतिविधियों को अपने नियंत्रण में लेकर या सुरक्षा के नाम पर कंपनियों से रकम वसूल रहे हैं।
इसके अलावा, नियंत्रण वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले व्यापारियों और माइनिंग कंपनियों से कथित तौर पर अवैध रोड टोल वसूला जाता है। विदेशी कर्मचारियों और नागरिकों के अपहरण तथा फिरौती के जरिए कमाई करने के आरोप भी सामने आए हैं।
इस तरह युद्ध के बीच एक ऐसी ‘कॉन्फ्लिक्ट इकोनॉमी’ विकसित हो रही है, जिसमें किसी इलाके पर नियंत्रण का मतलब सिर्फ सैन्य प्रभाव नहीं, बल्कि खनिज संसाधनों और नकदी के प्रवाह पर कब्जा भी है।
लिथियम की संपदा, लेकिन सुरक्षा संकट
टैंगानिका क्षेत्र में लिथियम सहित महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों की मौजूदगी बताई जाती है। इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते वैश्विक बाजार के बीच इन खनिजों की मांग बढ़ रही है। लेकिन लगातार हिंसा और मिलिशिया के प्रभाव के कारण बड़े निवेश के लिए सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
विश्लेषकों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की चिंता है कि M23 के साथ संघर्ष समाप्त होने के बाद भी संकट खत्म नहीं होगा, क्योंकि युद्ध के दौरान बने अवैध आर्थिक नेटवर्क और बड़ी संख्या में फैले आधुनिक हथियार लंबे समय तक अस्थिरता का कारण बन सकते हैं।
कांगो के सामने अब चुनौती सिर्फ विद्रोही समूहों से निपटने की नहीं, बल्कि हथियारों की बरामदगी, मिलिशिया के आर्थिक नेटवर्क को तोड़ने और खनिज संपदा पर वैध सरकारी नियंत्रण बहाल करने की भी है।
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