स्टारलिंक विवाद के बीच एलन मस्क ने फिर साझा किए स्क्रीनशॉट, भाजपा और रिलायंस के संबंधों पर उठाए सवाल

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नई दिल्ली (Action Bharat) | भारत में स्टारलिंक की व्यावसायिक शुरुआत को लेकर चल रहे विवाद के बीच अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दो मीडिया रिपोर्टों के स्क्रीनशॉट साझा किए हैं। इन रिपोर्टों में रिलायंस से जुड़ी कंपनियों और भाजपा को मिले राजनीतिक चंदे का जिक्र है। मस्क की पोस्ट के बाद स्टारलिंक, रिलायंस और भारत के दूरसंचार बाजार को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

भाजपा और रिलायंस के संबंधों से जुड़ी रिपोर्टें साझा कीं

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, मस्क ने अपनी पोस्ट में वर्ष 2022 की अल जजीरा की एक खबर का स्क्रीनशॉट साझा किया। इस खबर में आरोप लगाया गया था कि रिलायंस से फंड प्राप्त करने वाली एक कंपनी ने सोशल मीडिया पर भाजपा के अभियान को बढ़ावा देने में मदद की।

इसके साथ ही मस्क ने एक अंग्रेजी अखबार की पुरानी रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट भी साझा किया। इसमें क्विक सप्लाई से जुड़े चुनावी बॉन्ड के माध्यम से भाजपा को 385 करोड़ रुपये और शिवसेना को 25 करोड़ रुपये का चंदा दिए जाने का उल्लेख था।

इन स्क्रीनशॉट के जरिए मस्क ने रिलायंस और सत्तारूढ़ भाजपा के बीच संबंधों से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया। हालांकि, सोशल मीडिया पर रिपोर्ट साझा करना अपने आप में किसी आरोप को प्रमाणित नहीं करता।

पहले भी अंबानी पर साध चुके हैं निशाना

स्टारलिंक को भारत में परिचालन की मंजूरी मिलने के मुद्दे पर मस्क पिछले कुछ दिनों से लगातार सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने दावा किया था कि उनकी कंपनी ने पांच वर्षों तक भारतीय कानूनों का पालन किया है, फिर भी उसे लाइसेंस क्यों नहीं मिला।

मस्क ने इससे पहले मुकेश अंबानी को लेकर भी तीखी टिप्पणियां की थीं और भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा को लेकर सवाल उठाए थे। उनका पक्ष है कि स्टारलिंक की सेवाओं से भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी के विकल्प बढ़ सकते हैं।

सरकार ने भेदभाव के आरोपों को किया खारिज

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने दूरसंचार और सैटेलाइट सेवाओं के लिए मंजूरी की प्रक्रिया को निष्पक्ष और भेदभावरहित बताया है। सरकार का कहना है कि कंपनियों को लागू नियमों और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप ही परिचालन की अनुमति दी जाती है।

वहीं, रिपोर्ट में रिलायंस की ओर से मस्क के ताजा आरोपों पर किसी सार्वजनिक प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया है। रिलायंस जियो इन्फोकॉम के चेयरमैन आकाश अंबानी ने भी उपग्रह संचार सेवाओं पर जारी बहस पर टिप्पणी करने से इनकार किया और भारतीय उपभोक्ताओं पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।

स्टारलिंक विवाद में अब आगे क्या?

स्टारलिंक की भारत में संभावित शुरुआत को लेकर विवाद अब केवल इंटरनेट सेवाओं तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें बाजार में प्रतिस्पर्धा, कारोबारी हितों, राजनीतिक चंदे और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि स्टारलिंक को भारत में परिचालन की मंजूरी कब मिलेगी और क्या इस विवाद के बीच सरकार, रिलायंस या एलन मस्क की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान सामने आएगा?

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