नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने नागरिकता देने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। गृह मंत्रालय ने नागरिकता (तीसरा संशोधन) नियम, 2026 अधिसूचित करते हुए आठ राज्यों/केंद्र शासित क्षेत्रों में जिलाधिकारियों को पात्र आवेदकों को भारतीय नागरिकता देने का अधिकार दिया है।
📍 किन राज्यों/क्षेत्रों में लागू होगा?
नए प्रावधान गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा तथा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में लागू होंगे। असम और त्रिपुरा के कुछ आदिवासी क्षेत्रों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
🔴 अब क्या बदलेगा?
पहले जिन अधिकार प्राप्त समितियों और जिला स्तरीय समितियों के पास इन आवेदनों पर निर्णय की जिम्मेदारी थी, उनकी जगह अब जिलाधिकारी लेंगे।
डीएम यह संतुष्ट होने के बाद नागरिकता प्रदान कर सकेंगे कि आवेदक कानून के तहत पात्र और उपयुक्त है।
⚠️ आवेदक को खुद होना पड़ेगा मौजूद
नए नियमों में व्यक्तिगत उपस्थिति को लेकर सख्ती की गई है। आवेदक को आवेदन पर हस्ताक्षर करने और निष्ठा की शपथ लेने के लिए खुद उपस्थित होना होगा।
यदि उचित अवसर दिए जाने के बावजूद आवेदक उपस्थित नहीं होता है, तो कलेक्टर आवेदन खारिज कर सकता है।
📂 पुराने लंबित आवेदन भी ट्रांसफर होंगे
इन क्षेत्रों में अधिकार प्राप्त समितियों या जिला स्तरीय समितियों के पास लंबित आवेदन अब संबंधित जिलाधिकारियों को स्थानांतरित किए जाएंगे।
सरकार ने इससे जुड़े पुराने आदेशों को भी रद्द कर दिया है, हालांकि पहले किए गए कुछ कार्यों पर इसका असर नहीं होगा।
📝 क्या है इसका मकसद?
नए बदलाव से नागरिकता आवेदन की प्रक्रिया को जिला स्तर पर अधिक प्रत्यक्ष, जवाबदेह और नियंत्रित बनाने की कोशिश दिखाई देती है। साथ ही आवेदक की व्यक्तिगत पहचान और पात्रता की जांच को अधिक सख्त किया गया है।
Action Bharat | राष्ट्रीय समाचार
