दिल्ली में प्रदूषण पर CAQM का अल्टीमेटम! 31 अक्टूबर तक धूल-मलबा साफ करने का आदेश, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी

दिल्ली

नई दिल्ली (Action Bharat) | दिल्ली-NCR में सर्दियों से पहले वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने दिल्ली नगर निगम (MCD) को 31 अक्टूबर 2026 तक सड़कों, डिवाइडरों, फुटपाथों और खुले मैदानों में जमा धूल, कूड़ा और निर्माण मलबा हटाने के निर्देश दिए हैं। आदेशों के पालन में लापरवाही बरतने पर संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

सभी 12 जोन में सफाई अभियान तेज करने के निर्देश

जागरण की 13 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, CAQM के साथ हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में MCD के नरेला, रोहिणी, करोल बाग, पुरानी दिल्ली और शाहदरा सहित सभी 12 जोन के उपायुक्त शामिल हुए। बैठक में सफाई व्यवस्था और प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, निगम सड़कों की सफाई के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों का इस्तेमाल कर रहा है। प्रदूषण वाले संवेदनशील क्षेत्रों में डीप क्लीनिंग के लिए एंटी-स्मॉग गन, जेटिंग मशीनों और स्प्रिंकलर से पानी का छिड़काव भी किया जा रहा है।

टूटी सड़कों और खुले में कूड़ा जलाने पर भी नजर

CAQM ने धूल के स्रोतों को खत्म करने पर जोर दिया है। इसके तहत टूटी सड़कों और गड्ढों की मरम्मत, कच्चे हिस्सों को पक्का करने और हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसे उपायों पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा, खुले में कूड़ा जलाने और अवैध रूप से निर्माण मलबा फेंकने की घटनाओं पर निगरानी रखने को कहा गया है। इन गतिविधियों पर नियंत्रण प्रदूषण कम करने के प्रयासों का अहम हिस्सा है।

PWD, DDA और अन्य एजेंसियों की भी जिम्मेदारी

प्रदूषण नियंत्रण के लिए CAQM ने MCD को लोक निर्माण विभाग (PWD), दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली जल बोर्ड और रेलवे जैसी संबंधित एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल बनाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य सफाई, सड़क मरम्मत और मलबा हटाने से जुड़े कार्यों को समन्वित तरीके से पूरा करना है।

31 अक्टूबर के बाद सामने आएगी जमीनी कार्रवाई की तस्वीर

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि तय समयसीमा तक दिल्ली की सड़कों और खुले स्थानों से धूल व मलबा कितना हटाया जाता है। केवल मशीनें चलाने और निर्देश जारी करने से प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं होगा; नियमित निगरानी, कचरे का उचित निपटान और नियमों का प्रभावी पालन भी जरूरी है।

क्या MCD और दूसरी एजेंसियां 31 अक्टूबर तक तय लक्ष्य पूरा कर पाएंगी? दिल्लीवासियों के लिए इसका जवाब सफाई व्यवस्था और हवा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार से मिलेगा।

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