नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के पोस्ट-ग्रेजुएट (PG) इतिहास पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव सामने आया है। अंतिम सिलेबस में ‘द दिल्ली सल्तनत: स्ट्रक्चर्स ऑफ अथॉरिटी इन मेडिवल नॉर्थ इंडिया’ समेत कुल 22 प्रस्तावित पेपर शामिल नहीं किए गए हैं।
इतिहास विभाग ने सेमेस्टर-3 के लिए 38 Discipline Specific Elective (DSE) पेपर प्रस्तावित किए थे, लेकिन 7 अगस्त को जारी अंतिम अधिसूचना में इनमें से केवल 16 पेपर ही शामिल किए गए।
दिल्ली सल्तनत का पेपर क्यों अहम था?
हटाए गए पेपर में 13वीं-14वीं सदी के मध्यकालीन उत्तर भारत में राज्य व्यवस्था, राजनीतिक सत्ता, प्रशासन और सामाजिक-सांस्कृतिक विकास का अध्ययन कराया जाता था।
इसके अलावा ‘History of North India, c. 1400–1550’ भी अंतिम सूची में शामिल नहीं किया गया है।
सिर्फ दिल्ली सल्तनत ही नहीं, कई विषय हटे
अंतिम सिलेबस से बाहर किए गए प्रस्तावित विषयों में कई अन्य महत्वपूर्ण पेपर भी शामिल बताए गए हैं, जैसे—
- प्रारंभिक भारत में जेंडर और महिलाएं
- 1500 BCE से 1000 CE तक का इतिहास
- प्राचीन भारत में राजनीतिक प्रक्रियाएं
- शासन-व्यवस्था की संरचना
- प्राचीन भारतीय साहित्य में धर्म और समाज
कुछ प्रस्तावित पेपर पाठ्यक्रम अनुमोदन प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में थे, लेकिन अंतिम अधिसूचना में उन्हें जगह नहीं मिली।
UG और PG का सिलेबस अलग
डीयू के इतिहास विभाग से जुड़े एक प्रोफेसर के मुताबिक, PG में पढ़ाया जाने वाला दिल्ली सल्तनत का पेपर UG के पेपर से अलग और ज्यादा विशिष्ट था।
PG स्तर पर विद्यार्थियों को मध्यकालीन भारत के राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचे का अधिक गहन अध्ययन कराया जाता था।
NEP 2020 के तहत बदलाव
यह बदलाव नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत पाठ्यक्रम में किए जा रहे व्यापक पुनर्गठन के बीच सामने आया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि दिल्ली सल्तनत का पेपर केवल इसलिए हटाया गया क्योंकि वह मध्यकालीन इतिहास से संबंधित था। अंतिम सिलेबस में बदलाव की पूरी अकादमिक और प्रशासनिक प्रक्रिया को देखना जरूरी है।
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DU के PG History सिलेबस में बड़ा बदलाव—38 प्रस्तावित पेपर में से सिर्फ 16 अंतिम सूची में, दिल्ली सल्तनत समेत 22 पेपर बाहर। अब इस बदलाव को लेकर इतिहास के अध्ययन, पाठ्यक्रम की प्राथमिकताओं और NEP 2020 के प्रभाव पर बहस तेज होने की संभावना है।
