परिसीमन बिल पर सियासी घमासान तेज, खरगे ने PM मोदी से मांगी सर्वदलीय बैठक

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नई दिल्ली (Action Bharat) | परिसीमन बिल को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सियासी खींचतान तेज होती नजर आ रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने सरकार को आगाह किया कि दूरगामी संवैधानिक महत्व वाले विधेयक को जल्दबाजी या दबाव के जरिए पारित कराने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

 

खरगे ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

रिपोर्ट के अनुसार, खरगे ने मानसून सत्र समाप्त होने के बाद भी संसद का सत्रावसान नहीं किए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे असामान्य स्थिति बताते हुए परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर सभी राजनीतिक दलों के साथ व्यापक चर्चा की जरूरत पर जोर दिया।

कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पत्र में 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री को लिखे गए पहले पत्र का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि किसी महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधेयक को लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।

पहले भी कई बार उठाई जा चुकी है मांग

खरगे के मुताबिक, उन्होंने 16 जुलाई और 27 अगस्त को भी सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया था। अब उन्होंने फिर से सरकार से मांग की है कि परिसीमन के नए प्रस्तावों को अंतिम रूप देने से पहले सभी दलों को चर्चा का अवसर दिया जाए।

कांग्रेस का तर्क है कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों को अपने विचार रखने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।

विशेष सत्र और विधेयक को लेकर फिर बढ़ीं अटकलें

समाचार रिपोर्ट के मुताबिक, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की ओर से परिसीमन पर सरकार की पहल जारी रहने के संकेतों के बाद विशेष संसदीय सत्र की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हुई हैं।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि अप्रैल में परिसीमन से संबंधित विधेयकों को लेकर विशेष सत्र बुलाया गया था, लेकिन लोकसभा में परिसीमन विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका।

कांग्रेस की चेतावनी—जबरन पारित कराने की कोशिश न हो

कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि परिसीमन के प्रस्तावों पर व्यापक सहमति बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक जरूरी है। पार्टी का कहना है कि सरकार को सभी पक्षों की चिंताओं पर विचार करना चाहिए और विधेयक को जबरन पारित कराने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

अब सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार परिसीमन के मुद्दे पर विपक्ष की मांग स्वीकार कर सर्वदलीय बैठक बुलाएगी, या इस मुद्दे पर संसद और राजनीतिक मंचों पर टकराव आगे भी जारी रहेगा?

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