114 राफेल लड़ाकू विमानों की डील अंतिम चरण में, भारत के स्वदेशी हथियारों से लैस होंगे फाइटर जेट

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नई दिल्ली (Action Bharat) | भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में भारत सरकार 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को अंतिम रूप देने की तैयारी कर रही है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के अनुसार, इस बड़े रक्षा सौदे को चालू वित्त वर्ष के अंत तक फाइनल करने की योजना है। खास बात यह है कि इस बार राफेल विमानों में भारत में विकसित स्वदेशी हथियारों और रक्षा प्रणालियों को भी शामिल किया जाएगा।

रक्षा सचिव के मुताबिक, विमान निर्माता कंपनियों से प्राप्त प्रस्तावों की जांच जारी है। यह खरीद बाय एंड मेक कार्यक्रम के तहत होगी, जिसके अंतर्गत अधिकांश विमानों को भारत में ही असेंबल किया जाएगा। इससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

भारत पहले ही अप्रैल 2025 में फ्रांस के साथ भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन विमानों की खरीद का करीब 63,000 करोड़ रुपये का समझौता कर चुका है। अब 114 राफेल विमानों का प्रस्ताव भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

AMCA और तेजस Mk2 पर भी बड़ा अपडेट

रक्षा सचिव ने स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA को लेकर बताया कि परियोजना में शॉर्टलिस्ट किए गए वेंडरों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। भारत का फिलहाल पूरा ध्यान अपने स्वदेशी AMCA कार्यक्रम पर है और किसी विदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में शामिल होने की योजना नहीं है।

वहीं, तेजस Mk2 की पहली उड़ान अगले साल के मध्य में निर्धारित है। प्रोटोटाइप तैयार होने के बाद वायुसेना द्वारा विमानों का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।

29 स्क्वाड्रन पर टिकी वायुसेना की नजर

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वायुसेना के लड़ाकू स्क्वाड्रनों की संख्या घटकर 29 रह गई है। ऐसे में राफेल, तेजस Mk1A और अन्य स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजनाएं वायुसेना की भविष्य की क्षमता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

HAL द्वारा बनाए जा रहे 180 तेजस Mk1A विमानों की आपूर्ति पर भी काम जारी है। रक्षा सचिव के अनुसार, HAL के पास 27 एयरफ्रेम तैयार हैं और GE से 11 इंजन मिल चुके हैं। इंजन आपूर्ति में सुधार के बाद इस वर्ष के अंत तक कम से कम एक स्क्वाड्रन शामिल करने की उम्मीद जताई गई है।

सरकार की योजना के मुताबिक, HAL आगे प्रति वर्ष 24 विमानों का निर्माण करेगा और 2033 तक तेजस Mk1A के दोनों ऑर्डरों की आपूर्ति पूरी होने की उम्मीद है।

भारत की रक्षा रणनीति में अब केवल विदेशी विमानों की खरीद ही नहीं, बल्कि स्वदेशी हथियारों, तकनीक और उत्पादन क्षमता को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

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