ICC के राजस्व मॉडल पर भड़के क्रिकेट वेस्टइंडीज के CEO क्रिस डेहरिंग, बोले—भारत के साथ सीरीज से ₹284 करोड़ तक कमाई, लेकिन हमें हिस्सा नहीं

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नई दिल्ली (Action Bharat) | क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) क्रिस डेहरिंग ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के द्विपक्षीय सीरीज से होने वाली कमाई के मौजूदा मॉडल पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस व्यवस्था में मेजबान देश को सीरीज से होने वाली पूरी कमाई मिलती है, जबकि दौरे पर आने वाली टीम को इससे कोई हिस्सा नहीं मिलता।

भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली जा रही सीरीज का उदाहरण देते हुए डेहरिंग ने कहा कि इस सीरीज से लगभग 20 से 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब ₹189 करोड़ से ₹284 करोड़ तक की कमाई होने की उम्मीद है। हालांकि, उनके मुताबिक, इस राजस्व में क्रिकेट वेस्टइंडीज को कोई हिस्सा नहीं मिलेगा।

द्विपक्षीय सीरीज की कमाई पर क्यों उठे सवाल?

डेहरिंग ने Wisden के कार्यक्रम ‘द स्कूप’ से बातचीत में मौजूदा राजस्व व्यवस्था की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस मॉडल में मेजबान क्रिकेट बोर्ड को घरेलू मैदान पर आयोजित सीरीज से होने वाली कमाई का पूरा लाभ मिलता है।

इस व्यवस्था के कारण आर्थिक रूप से मजबूत क्रिकेट बोर्डों को बड़ा फायदा हो सकता है, जबकि सीमित संसाधनों वाले बोर्डों के लिए वित्तीय स्थिति संभालना मुश्किल बना रह सकता है।

भारत जैसी लोकप्रिय टीम के दौरे से प्रसारण अधिकार, प्रायोजन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के जरिए बड़ी कमाई की संभावना रहती है। लेकिन डेहरिंग के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में मेहमान बोर्ड को इस राजस्व में प्रत्यक्ष हिस्सा नहीं मिलता।

1997 के मॉडल को बताया वेस्टइंडीज क्रिकेट के पतन की शुरुआत

क्रिस डेहरिंग ने 1997 में लागू किए गए वित्तीय मॉडल को वेस्टइंडीज क्रिकेट की गिरती स्थिति से जोड़ते हुए कहा कि उस बदलाव के बाद कैरेबियाई क्रिकेट की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा।

उन्होंने याद किया कि एक समय वेस्टइंडीज की टीम विश्व क्रिकेट की बड़ी ताकत हुआ करती थी और कई देश उसके साथ सीरीज खेलने के इच्छुक रहते थे। उस दौर में कैरेबियाई बोर्ड को विदेशी दौरों के लिए टूरिंग फीस भी मिलती थी, जो घरेलू सीरीज आयोजित करने से होने वाली कमाई से अधिक हो सकती थी।

डेहरिंग का मानना है कि राजस्व व्यवस्था में बदलाव ने वेस्टइंडीज जैसे क्रिकेट बोर्डों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया।

आर्थिक संकट से जूझ रहा क्रिकेट वेस्टइंडीज

वेस्टइंडीज क्रिकेट पिछले कई वर्षों से वित्तीय चुनौतियों और खिलाड़ियों की कमाई से जुड़े विवादों का सामना करता रहा है। आर्थिक दबाव का असर खिलाड़ियों की सुविधाओं, बोर्ड की योजनाओं और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की तैयारियों पर पड़ सकता है।

इसके साथ ही दुनिया भर में टी20 लीगों के बढ़ते आकर्षण ने खिलाड़ियों के सामने कमाई के नए विकल्प भी खोले हैं। कई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के साथ-साथ विभिन्न फ्रेंचाइजी लीगों में खेलने को प्राथमिकता देते हैं। इससे राष्ट्रीय बोर्डों के लिए खिलाड़ियों को उपलब्ध रखना और टीमों का संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

क्या ICC के राजस्व मॉडल में बदलाव होना चाहिए?

डेहरिंग की आलोचना ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कमाई के बंटवारे को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस को फिर सामने ला दिया है। सवाल यह है कि क्या द्विपक्षीय सीरीज से होने वाले राजस्व में मेजबान और मेहमान दोनों बोर्डों की भागीदारी होनी चाहिए, खासकर तब जब किसी दौरे की व्यावसायिक सफलता में दोनों टीमों की लोकप्रियता योगदान देती है।

हालांकि, द्विपक्षीय सीरीज से होने वाली कमाई का बंटवारा संबंधित प्रसारण अधिकारों, व्यावसायिक समझौतों और क्रिकेट बोर्डों के बीच तय शर्तों पर निर्भर करता है। डेहरिंग की टिप्पणियां मौजूदा व्यवस्था पर उनकी आलोचना और वेस्टइंडीज क्रिकेट की आर्थिक चिंताओं को सामने रखती हैं।

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