नई दिल्ली/एक्शन भारत न्यूज़ संवाददाता
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने उस फैसले के अमल पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसके तहत हर महीने के पहले और तीसरे शनिवार को अदालतों में नियमित कार्यवाही होनी थी।
17 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार, 9 जुलाई 2026 को हुई फुल कोर्ट बैठक में इस निर्णय के क्रियान्वयन को स्थगित करने का फैसला लिया गया। साथ ही, इस पूरे विषय की दोबारा समीक्षा के लिए मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) द्वारा एक समिति गठित की जाएगी।
🎯 क्या था पहले का फैसला?
दिल्ली हाईकोर्ट ने 15 जनवरी 2026 को अधिसूचना जारी कर घोषणा की थी कि प्रत्येक महीने के पहले और तीसरे शनिवार को अदालतों में नियमित सुनवाई होगी। इसका उद्देश्य लंबित मामलों के निस्तारण की गति बढ़ाना बताया गया था।
🎯 वकीलों ने किया था विरोध
इस फैसले का दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने कड़ा विरोध किया था। बार एसोसिएशन का कहना था कि निर्णय लेने से पहले अधिवक्ताओं से कोई परामर्श नहीं किया गया और इससे वकीलों के कामकाज व व्यक्तिगत जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
विरोध के चलते 4 अप्रैल 2026 से अदालत की कार्यवाही के बहिष्कार का भी फैसला लिया गया था।
🎯 पहले भी लागू हुआ था शनिवार का रोस्टर
अक्टूबर 2025 में हाईकोर्ट ने लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के उद्देश्य से व्यवस्था बनाई थी कि प्रत्येक पीठ (Bench) महीने में एक शनिवार को बैठेगी। हालांकि इस व्यवस्था पर भी बार की ओर से आपत्ति जताई गई थी।
🎯 सर्वे में भी मिला विरोध
कानूनी समुदाय के बीच हुए एक सर्वे में भी इस प्रस्ताव का व्यापक विरोध सामने आया था।
🫵🏻 लगभग 70.8% प्रतिभागियों ने महीने में दो कार्यशील शनिवार का विरोध किया।
🫵🏻 69.5% लोगों का मानना था कि केवल कार्य दिवस बढ़ाने से लंबित मामलों में कोई बड़ा सुधार नहीं होगा।
🫵🏻 84.6% प्रतिभागियों ने कहा कि इससे वकीलों, न्यायाधीशों और न्यायालय कर्मचारियों के वर्क-लाइफ बैलेंस पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
अधिकांश प्रतिभागियों ने न्यायिक रिक्तियों को भरने और न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने को अधिक प्रभावी समाधान बताया।
🎯अब आगे क्या?
अब मुख्य न्यायाधीश द्वारा गठित समिति इस पूरे मुद्दे का पुनः परीक्षण करेगी। समिति की सिफारिशों के आधार पर भविष्य में शनिवार को अदालतों के संचालन को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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