Action Bharat | दिल्ली सरकार अपनी कैबिनेट व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के विशेषज्ञों के साथ बैठक कर ई-कैबिनेट सिस्टम लागू करने को लेकर चर्चा की।
इस व्यवस्था के लागू होने के बाद कैबिनेट की बैठकों में कागजों के ढेर की जगह टैबलेट और डिजिटल दस्तावेज नजर आएंगे। सरकार का उद्देश्य कैबिनेट प्रक्रिया को पेपरलेस, तेज, सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
📱 टैबलेट पर मिलेंगे सभी जरूरी दस्तावेज
ई-कैबिनेट प्रणाली के तहत कैबिनेट नोट, एजेंडा, एनेक्सर, प्रस्ताव, निर्णय और बैठक की कार्यवाही यानी Minutes डिजिटल रूप में तैयार और सुरक्षित की जा सकेगी।
कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री, मंत्री और अधिकृत वरिष्ठ अधिकारी अपने टैबलेट पर संबंधित दस्तावेज देख सकेंगे।
इससे कागजी फाइलों की जरूरत कम होगी और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को तैयार करने, पहुंचाने और सुरक्षित रखने में लगने वाला समय भी घटेगा।
🔐 गोपनीय दस्तावेजों की सुरक्षा पर विशेष जोर
कैबिनेट में कई ऐसे दस्तावेज होते हैं जो सार्वजनिक होने से पहले बेहद संवेदनशील और गोपनीय होते हैं। इसलिए प्रस्तावित ई-कैबिनेट सिस्टम में साइबर सिक्योरिटी और डेटा एन्क्रिप्शन को महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री, मंत्री, मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और विभागीय सचिव जैसे अधिकृत अधिकारियों को उनकी भूमिका के अनुसार अलग-अलग डिजिटल एक्सेस दिया जा सकता है।
इससे यह तय किया जा सकेगा कि कौन अधिकारी किस दस्तावेज को देख सकता है और किस स्तर तक पहुंच रखता है।
🏛️ दूसरे राज्यों के मॉडल का अध्ययन
बैठक में NIC के विशेषज्ञों ने उन राज्यों में लागू ई-कैबिनेट प्रणालियों के बारे में जानकारी दी, जहां डिजिटल कैबिनेट व्यवस्था पहले से इस्तेमाल की जा रही है।
दिल्ली सरकार इन राज्यों के अनुभवों और तकनीकी मॉडल का अध्ययन करके राजधानी के लिए सुरक्षित और प्रभावी ई-कैबिनेट सिस्टम तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
👀 सिर्फ बैठक नहीं, फैसलों की भी होगी निगरानी
इस व्यवस्था की सबसे अहम विशेषताओं में से एक कैबिनेट के फैसलों के क्रियान्वयन की डिजिटल मॉनिटरिंग हो सकती है।
यानी कैबिनेट से कोई फैसला होने के बाद संबंधित विभाग ने उस पर क्या कार्रवाई की, काम किस स्तर तक पहुंचा और उसमें कितना समय लगा—इन चीजों की ऑनलाइन निगरानी संभव होगी।
इससे सरकार को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कैबिनेट के फैसले जमीन पर कितनी तेजी से लागू हो रहे हैं।
🗣️ रेखा गुप्ता ने बताई सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, तकनीक के माध्यम से शासन को अधिक तेज, पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
उनके मुताबिक, ई-कैबिनेट केवल बैठकों को डिजिटल बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कैबिनेट के फैसलों के बाद विभागों द्वारा की जा रही कार्रवाई की लगातार निगरानी में भी मदद करेगा।
📌 इसका सीधा फायदा क्या होगा?
- 📄 कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता घटेगी
- 📱 मंत्री टैबलेट पर कैबिनेट दस्तावेज देख सकेंगे
- 🔐 संवेदनशील दस्तावेजों की डिजिटल सुरक्षा बढ़ेगी
- ⚡ कैबिनेट प्रक्रिया तेज हो सकती है
- 🔎 फैसलों के क्रियान्वयन की ऑनलाइन निगरानी संभव होगी
- ♻️ कागज की खपत कम होने से पर्यावरण को भी फायदा होगा
- 👨💼 विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी
Action Bharat निष्कर्ष: दिल्ली सरकार का ई-कैबिनेट मॉडल लागू होने पर कैबिनेट की पारंपरिक कागजी कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। खास बात यह होगी कि डिजिटल सिस्टम सिर्फ फाइल और बैठक तक सीमित रहेगा या फैसलों के क्रियान्वयन की पूरी प्रक्रिया को भी ट्रैक करेगा, इससे दिल्ली की शासन व्यवस्था में तकनीक की भूमिका और मजबूत हो सकती है।
