नई दिल्ली | (Action Bharat) बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के पद पर बने रहने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनका लगातार लंबे समय तक चेयरमैन पद पर बने रहना BCI के नियमों और प्रतिनिधित्व की भावना के खिलाफ है।
⚖️ क्या है पूरा विवाद?
मामला हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के दीक्षांत समारोह से जुड़े विवाद के बाद और ज्यादा गरमा गया। BCI ने कथित तौर पर 2026 बैच के छात्रों के एनरोलमेंट को लेकर आदेश जारी किया था, जिसे करीब 15 मिनट बाद वापस ले लिया गया।
इसके बाद कुछ छात्रों और वकीलों की ओर से मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग उठी।
अब सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में उनके लंबे कार्यकाल को चुनौती दी गई है।
🔥 मनन मिश्रा का दो टूक जवाब
मनन मिश्रा ने इस्तीफा देने से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि वह चुनाव के जरिए इस पद पर पहुंचे हैं और देशभर के करीब 25 लाख वकीलों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उनके मुताबिक BCI चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का चुनाव स्टेट बार काउंसिलों से चुने गए प्रतिनिधियों के जरिए होता है।
मिश्रा ने दावा किया कि वह अपने सातवें कार्यकाल में हैं और पिछले छह कार्यकालों में निर्विरोध चुने गए।
📜 याचिका में क्या आरोप?
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में BCI के नियम 12(2) का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार चेयरमैन और वाइस चेयरमैन का कार्यकाल दो वर्ष या सदस्यता समाप्त होने तक होना चाहिए।
याचिका में 21 अप्रैल 2025 के गैजेट नोटिफिकेशन को भी चुनौती दी गई है, जिसके जरिए मिश्रा का कार्यकाल कथित तौर पर 2030 तक बढ़ाए जाने का दावा किया गया है।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से इस नोटिफिकेशन को रद्द करने और BCI को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश देने की मांग की है।
🏛️ 2012 से चेयरमैन पद से जुड़ा सफर
याचिका के मुताबिक मनन मिश्रा पहली बार 2012 में BCI चेयरमैन बने थे। वर्ष 2014 में कुछ समय के लिए पद छोड़ने के बाद उसी वर्ष नवंबर में वह दोबारा चेयरमैन बने और तब से लगातार इस पद पर बने हुए हैं।
याचिकाकर्ता का दावा है कि मार्च 2025 में उनका दोबारा चुना जाना लगातार सातवां कार्यकाल था।
🗣️ मिश्रा ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
मनन मिश्रा ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने BCI से जुड़े ट्रस्ट के कामकाज को पारदर्शी बताते हुए कहा कि उसके खातों का ऑडिट होता है और रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे कई आरोपों में कोई तथ्य नहीं है।
🎯 NALSAR विवाद पर भी दिया जवाब
मिश्रा के अनुसार NALSAR विवाद में BCI ने छात्रों के एनरोलमेंट को लेकर आदेश जारी किया था, लेकिन 15 मिनट के भीतर ही आदेश वापस ले लिया गया और छात्रों की शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया शुरू की गई।
उनका कहना है कि इसके बाद कुछ राजनीतिक और सामाजिक समूहों ने इस घटना को उनके इस्तीफे की मांग से जोड़ दिया।
🔴 Action Bharat की बड़ी हेडलाइन
“BCI चेयरमैन पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका… मनन मिश्रा बोले- इस्तीफा नहीं दूंगा, चुनाव से आया हूं!”
📌 Description
BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के लंबे कार्यकाल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में BCI नियम 12(2) और 2025 के गैजेट नोटिफिकेशन का हवाला देते हुए उनके पद पर बने रहने पर सवाल उठाए गए हैं। दूसरी ओर मनन मिश्रा ने इस्तीफा देने से इनकार करते हुए कहा है कि वह चुनाव के जरिए चुने गए प्रतिनिधि हैं। NALSAR यूनिवर्सिटी विवाद भी इस पूरे मामले का अहम हिस्सा बन गया है।
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