वॉशिंगटन/अंकारा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर नाटो समिट के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को ऐसी जानकारी मिली थी कि ईरान को तुर्किये के अंकारा में ट्रंप की सटीक लोकेशन की जानकारी थी और उनके विमान पर संभावित मिसाइल हमले का खतरा पैदा हो गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, खतरे को देखते हुए अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने ट्रंप की वास्तविक यात्रा को छिपाने के लिए एक असाधारण सुरक्षा योजना बनाई। ट्रंप को सार्वजनिक रूप से पुराने एयर फोर्स वन में सवार होते दिखाया गया, लेकिन कुछ ही देर बाद उन्हें गुप्त तरीके से दूसरे सैन्य विमान तक पहुंचाया गया।
ईरान को होटल की मंजिल तक की जानकारी होने का दावा
रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि सुरक्षा एजेंसियों को आशंका थी कि ईरान ट्रंप की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। यहां तक कि उनके होटल की मंजिल की जानकारी होने की बात भी सामने आई है।
इसके अलावा, नाटो समिट के आसपास कथित तौर पर कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल से लैस व्यक्ति को देखे जाने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई है।
हालांकि, इन खुफिया सूचनाओं के सभी विवरण सार्वजनिक रूप से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए गए हैं।
एयर फोर्स वन बना ‘डिकॉय’
खतरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसी योजना बनाई, जिसमें ट्रंप की वास्तविक लोकेशन को छिपाया गया।
ट्रंप को पहले कैमरों के सामने पुराने एयर फोर्स वन में चढ़ते हुए दिखाया गया। इससे वहां मौजूद मीडिया और अन्य लोगों को यही लगा कि राष्ट्रपति इसी विमान से तुर्किये से रवाना होंगे।
लेकिन इसके बाद ट्रंप को एयरपोर्ट के एक हिस्से से कैटरिंग वाहन के जरिए बाहर ले जाया गया और एक छोटे सैन्य विमान C-32A में बैठाया गया।
पत्रकारों को भी नहीं थी असली जानकारी
इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि राष्ट्रपति के साथ यात्रा कर रहे कई पत्रकारों को भी विमान बदलने की जानकारी नहीं थी।
रिपोर्ट के अनुसार, मीडिया दल पुराने एयर फोर्स वन पर ही रहा। विमान की खिड़कियों के शेड बंद रखने को कहा गया, जिससे बाहर से विमान के भीतर की गतिविधियों का पता न चल सके।
C-32A और पुराने एयर फोर्स वन के ब्रिटेन पहुंचने के समय में भी कुछ ही मिनटों का अंतर बताया गया है।
ट्रंप ने खुद भी सुरक्षा कारणों की पुष्टि की
बाद में ट्रंप ने विमान बदलने की पुष्टि करते हुए कहा कि यह फैसला सीक्रेट सर्विस और सेना के निर्देश पर लिया गया था। उन्होंने संकेत दिया कि सुरक्षा एजेंसियों को खतरे की गंभीर आशंका थी और राष्ट्रपति के तौर पर उन्हें सुरक्षा अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना था।
नया विमान छोड़कर पुराने एयर फोर्स वन से क्यों निकले?
नाटो समिट के लिए ट्रंप तुर्किये एक नए और अपग्रेडेड विमान से पहुंचे थे। यह विमान कतर की ओर से अमेरिका को दिया गया था।
लेकिन वापसी के समय ट्रंप ने पुराने एयर फोर्स वन का इस्तेमाल करने की बात सार्वजनिक रूप से कही। बाद में सामने आया कि यह सार्वजनिक रूप से दिखाया गया विमान वास्तव में डिकॉय की भूमिका में था, जबकि राष्ट्रपति को दूसरे विमान से गुप्त रूप से रवाना किया गया।
नाटो समिट कहां और कब हुआ था?
2026 का नाटो शिखर सम्मेलन 7 और 8 जुलाई को अंकारा, तुर्किये में आयोजित हुआ था। ट्रंप समेत नाटो देशों के शीर्ष नेता इसमें शामिल हुए थे।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे कई सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया जानकारी की गोपनीयता को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
सबसे अहम सवाल यह है कि यदि किसी विदेशी शक्ति को राष्ट्रपति की सटीक लोकेशन और यात्रा संबंधी जानकारी मिल गई थी, तो वह जानकारी कितनी संवेदनशील थी और सुरक्षा एजेंसियों ने इसे रोकने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए।
फिलहाल रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान ने वास्तव में ट्रंप के विमान पर हमला करने की कोई अंतिम कार्रवाई की थी या नहीं। उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से संभावित खतरे और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया से संबंधित है।
एक्शन भारत न्यूज़
ट्रंप की सुरक्षा के लिए रचा गया खुफिया ऑपरेशन कितना बड़ा था? नाटो समिट के बाद सामने आई इस रिपोर्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
नोट: यह खबर न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉशिंगटन पोस्ट और अन्य उपलब्ध रिपोर्टों में सामने आए दावों पर आधारित है। खुफिया अभियानों से संबंधित सभी विवरण सार्वजनिक रूप से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किए जा सकते।
