कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद: सभी कृष्ण भक्तों का प्रतिनिधि कौन? SC ने हाई कोर्ट भेजने के दिए संकेत

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नई दिल्ली। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को संकेत दिया कि सभी कृष्ण भक्तों का प्रतिनिधित्व करने वाले पक्ष के चयन से जुड़े विवाद को वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजा जा सकता है।

जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने सुनवाई के दौरान इस बात पर गौर किया कि हाई कोर्ट ने अन्य हिंदू पक्षों को नोटिस दिए बिना एक पक्ष को सभी श्रद्धालुओं का प्रतिनिधि मान लिया था।

2 सितंबर को अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस आवेदन पर विवाद है, वह मूल रूप से किसी दूसरे विषय से संबंधित था और सभी संबंधित वादियों को नोटिस जारी नहीं किए गए थे।

पीठ ने संकेत दिया कि मामले को दोबारा विचार के लिए हाई कोर्ट भेजना उचित हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर 2026 को निर्धारित की है।

किसे बनाया जाए सभी भक्तों का प्रतिनिधि?

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि हिंदू पक्षों के बीच मुख्य याचिकाकर्ता के चयन को लेकर बातचीत चल रही है।

कुछ हिंदू पक्षों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने भी सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि प्रतिनिधित्व के सवाल पर नए सिरे से निर्णय लेने के लिए मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट वापस भेजा जाए।

हाई कोर्ट के आदेश को दी गई थी चुनौती

यह याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दाखिल की गई है, जिसमें एक हिंदू पक्ष को सभी भगवान कृष्ण भक्तों का प्रतिनिधि मानते हुए उसके मामले को प्रतिनिधि वाद के तौर पर आगे बढ़ाने की बात कही गई थी।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि दूसरे हिंदू पक्षों को उचित अवसर दिए बिना किसी एक पक्ष को सभी श्रद्धालुओं का प्रतिनिधि मानना सही नहीं है।

मथुरा के कई मुकदमों से जुड़ा विवाद

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में मथुरा की अदालतों में 20 से अधिक सिविल याचिकाएं दाखिल की गई थीं। बाद में इन मामलों को इलाहाबाद हाई कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया।

विवादित परिसर को लेकर हिंदू पक्ष का दावा है कि शाही ईदगाह उस स्थान पर बनी है जिसे वे भगवान कृष्ण का जन्मस्थान बताते हैं। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष इन दावों का विरोध करता रहा है।

पहले भी सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है मामला

इस विवाद से जुड़े कई मामले सुप्रीम कोर्ट के सामने पहले भी आ चुके हैं। वर्ष 2023 में शीर्ष अदालत ने कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह परिसर के सर्वे से संबंधित एक याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार किया था और संबंधित मुद्दों को हाई कोर्ट में लंबित कार्यवाही के संदर्भ में देखने की बात कही थी।

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