‘सत्य के लिए लड़ना पड़ता है’, अमेरिका में क्रिमिनल केस खारिज होने के बाद बोले गौतम अदाणी; अब शेयरों पर भी नजर

कारोबार

नई दिल्ली। अमेरिकी अदालत से क्रिमिनल केस में बड़ी राहत मिलने के बाद अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने पहली बार विस्तार से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि करीब दो साल चली कानूनी प्रक्रिया ने उनके Rule of Law और न्याय व्यवस्था में विश्वास को और मजबूत किया है।

अमेरिका की न्यूयॉर्क स्थित Eastern District Court ने अमेरिकी न्याय विभाग की अपील पर गौतम अदाणी, सागर अदाणी और अन्य आरोपियों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को with prejudice खारिज कर दिया। इसका अर्थ है कि इन्हीं आरोपों पर यह आपराधिक मामला दोबारा उसी रूप में नहीं चलाया जा सकता।

‘सत्य के लिए खड़ा होना पड़ता है’

अदाणी ने अपने संबोधन में कहा कि कठिन दौर में केवल अपनी सच्चाई पर विश्वास करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके लिए खड़ा होना और पूरी निडरता के साथ लड़ना भी पड़ता है।

उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को लगभग दो साल लंबी और पीड़ादायक यात्रा बताया। उनके मुताबिक, इस दौरान न्यायिक प्रक्रिया में उनका विश्वास कमजोर होने के बजाय और मजबूत हुआ।

अमेरिका में आखिर हुआ क्या?

यह मामला नवंबर 2024 में सामने आया था। अमेरिकी अभियोजकों ने गौतम अदाणी और अन्य लोगों पर भारतीय सरकारी अधिकारियों को कथित रिश्वत देने और अमेरिकी निवेशकों को कथित तौर पर गुमराह करने से जुड़े आरोप लगाए थे। अदाणी समूह और संबंधित आरोपियों ने आरोपों से इनकार किया था।

मई 2026 में अमेरिकी न्याय विभाग ने मामले को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया। इसके बाद अदालत में औपचारिक रूप से केस खत्म करने की प्रक्रिया चली। न्यायाधीश निकोलस गारॉफिस ने DOJ से इस फैसले के आधार और प्रक्रिया को लेकर सवाल भी किए थे।

कोर्ट ने DOJ के फैसले पर सवाल क्यों उठाए?

मामला खत्म करने की अनुमति देते समय अदालत ने न्याय विभाग की प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। रिपोर्टों के मुताबिक, न्यायाधीश ने विशेष रूप से इस बात पर सवाल उठाया कि मामले को वापस लेने का फैसला DOJ के वरिष्ठ अधिकारी ट्रेंट मैककॉट्टर ने जांचकर्ताओं और मामले से जुड़े अभियोजकों की राय लिए बिना किस तरह लिया।

हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अदाणी की अमेरिका में प्रस्तावित करीब 10 अरब डॉलर की निवेश योजना को केस खत्म करने का कारण नहीं माना गया। DOJ ने भी कहा था कि निवेश योजना और अभियोजन खत्म करने के फैसले के बीच कोई संबंध नहीं था।

10 अरब डॉलर के निवेश का मुद्दा भी उठा

कार्यवाही के दौरान अदाणी की अमेरिका में बड़े निवेश की योजना का मुद्दा सामने आया था। अदाणी ने जुलाई में एक शपथ-पत्र में कहा था कि उन्हें किसी ऐसे समझौते, वादे या डील की जानकारी नहीं थी जिसके बदले आपराधिक मामला खत्म किया जाना हो।

यानी केस खारिज होना एक तथ्य है, लेकिन इसके पीछे किसी सौदे या निवेश के बदले राहत मिलने का दावा अदालत ने स्थापित नहीं किया है। इस अंतर को समझना जरूरी है।

हिंडनबर्ग विवाद और ₹20,000 करोड़ का FPO

अदाणी ने अपने संबोधन में 2023 में आई हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट के बाद पैदा हुए संकट को भी याद किया।

उन्होंने कहा कि समूह के पास करीब ₹20,000 करोड़ के FPO को आगे बढ़ाने का कानूनी अधिकार था, लेकिन निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए FPO वापस लेने और निवेशकों का पैसा लौटाने का फैसला किया गया।

अदाणी के मुताबिक, यह फैसला केवल कानूनी अधिकारों के आधार पर नहीं बल्कि निवेशकों के विश्वास को प्राथमिकता देते हुए लिया गया था।

क्या अब अदाणी के शेयर दौड़ेंगे?

अमेरिकी क्रिमिनल केस के खत्म होने से अदाणी समूह के लिए एक बड़ा कानूनी जोखिम जरूर कम हुआ है। बाजार में इसका असर भी देखने को मिला था—मई में DOJ द्वारा मामले को आगे न बढ़ाने की घोषणा के बाद अदाणी समूह की कई कंपनियों के शेयरों में 5 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई थी।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अब अदाणी के सभी शेयरों में लगातार तेजी तय है।

शेयरों की चाल पर आगे कई चीजों का असर पड़ेगा—

  • कंपनी की कमाई और कर्ज की स्थिति
  • नए प्रोजेक्ट और कैपेक्स
  • नियामकीय और कानूनी घटनाक्रम
  • वैश्विक बाजार की स्थिति
  • निवेशकों का जोखिम लेने का रुख

इसलिए अमेरिकी केस खत्म होना सकारात्मक खबर है, लेकिन इसे शेयर खरीदने की गारंटी मानना सही नहीं होगा।

क्या सभी अमेरिकी मामले खत्म हो गए?

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। क्रिमिनल केस का खारिज होना आपराधिक अभियोजन को खत्म करता है, लेकिन इससे हर प्रकार की नियामकीय या नागरिक कार्रवाई स्वतः खत्म नहीं मानी जा सकती।

अमेरिका में अदाणी से जुड़े अलग-अलग मामलों में SEC और अन्य नियामकीय प्रक्रियाएं भी रही हैं। SEC से जुड़े मामले में अदाणी और सागर अदाणी ने क्रमशः $6 मिलियन और $12 मिलियन के भुगतान पर समझौता किया था, जबकि अदाणी एंटरप्राइजेज ने ईरान-संबंधी प्रतिबंधों के आरोपों को लेकर अमेरिकी ट्रेजरी के साथ $275 मिलियन का समझौता किया था।

इसलिए यह कहना अधिक सटीक होगा कि अदाणी के खिलाफ प्रमुख अमेरिकी आपराधिक अभियोजन समाप्त हो गया है, न कि अमेरिका से जुड़े हर विवाद को एक ही फैसले में खत्म मान लिया जाए।

‘अदाणी परिवार’ को बताया सबसे बड़ी ताकत

गौतम अदाणी ने अपने संबोधन में कानूनी लड़ाई से ज्यादा उन कर्मचारियों और सहयोगियों का जिक्र किया जिन्होंने मुश्किल दौर में समूह का काम जारी रखा।

उन्होंने कहा कि इंजीनियरों, कर्मचारियों, श्रमिकों, सप्लायर्स, ठेकेदारों और साझेदारों ने कठिन परिस्थितियों में भी अपने काम को जारी रखा।

उन्होंने समूह के बड़े कैपेक्स का भी उल्लेख किया और कहा कि केवल वित्तीय आंकड़े किसी संस्था की पूरी कहानी नहीं बताते। उनके मुताबिक, संस्थान की असली पहचान इस बात से होती है कि संकट के समय वह किन मूल्यों की रक्षा करता है।

2047 को लेकर अदाणी का बड़ा संदेश

भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए अदाणी ने कहा कि आने वाले वर्षों में देश की सफलता केवल बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से नहीं मापी जाएगी।

उनके मुताबिक, असली सवाल यह होगा कि देश ने कितने अवसर पैदा किए, कितने मजबूत समुदाय बनाए और कितने ऐसे संस्थान खड़े किए जो लोगों का भरोसा हासिल कर सकें।

Action Bharat निष्कर्ष

अमेरिकी अदालत का फैसला गौतम अदाणी और अदाणी समूह के लिए निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण कानूनी राहत है। लेकिन इस फैसले को लेकर दो बातें अलग-अलग समझना जरूरी है—पहली, क्रिमिनल केस स्थायी रूप से खारिज हुआ है; दूसरी, इससे 2024 में लगाए गए आरोपों पर कोई ट्रायल या दोषसिद्धि नहीं हुई, क्योंकि मामला ट्रायल तक पहुंचा ही नहीं। साथ ही, अदालत की ओर से DOJ की केस वापस लेने की प्रक्रिया पर उठाए गए सवाल भी इस पूरे घटनाक्रम को केवल एकतरफा ‘क्लीन चिट’ की तरह पेश करने से पहले ध्यान में रखने चाहिए।

अब बड़ा सवाल यही है—क्या अमेरिकी कानूनी दबाव कम होने के बाद अदाणी समूह के शेयरों में टिकाऊ तेजी आती है, या बाजार का फोकस फिर कंपनी के कर्ज, कमाई और कारोबार की वास्तविक स्थिति पर लौटता है?

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