नई दिल्ली | (एक्शन भारत) राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (दिल्ली चिड़ियाघर) में नर हॉग डियर ‘रॉकी’ की मौत ने चिड़ियाघर प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार रॉकी का शव कई दिनों तक बाड़े में पड़ा रहा और सड़ने के बाद उससे तेज दुर्गंध फैलने पर मामला सामने आया।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक रॉकी की गर्दन बाड़े में लगी लोहे की वायर मेश में फंसी हुई मिली। हालांकि मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि बाड़ों की नियमित पेट्रोलिंग और निरीक्षण हो रहा था, तो शव कई दिनों तक नजर से कैसे ओझल रहा। इस घटना ने वन्यजीवों की सुरक्षा, बीट निरीक्षण और सीसीटीवी निगरानी की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
सूत्रों के अनुसार चिड़ियाघर के एक कर्मचारी ने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर ड्यूटी रोस्टर, बीट रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने की मांग की है। कर्मचारी का आरोप है कि उसकी अनुपस्थिति के दौरान बाड़े की नियमित जांच नहीं की गई।
यह पहला मौका नहीं है जब दिल्ली चिड़ियाघर की निगरानी व्यवस्था सवालों में आई हो। इससे पहले सियार के बाड़े से निकलकर भालू की मांद तक पहुंचने की घटना और वर्ष 2014 में सफेद बाघ के बाड़े में गिरे युवक की मौत के बाद भी सुरक्षा प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न उठे थे।
चिड़ियाघर के निदेशक संजीत कुमार ने मामले की जांच कराने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
