‘मैं दलित हूं…’ हल्द्वानी में शुद्धिकरण पर राज्यसभा में छलका खरगे का दर्द; नड्डा बोले- जांच करेंगे

राजनीति

नई दिल्ली। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद कार्यक्रम स्थल पर कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धिकरण’ हवन को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आठ अगस्त को रामलीला मैदान में खरगे की सभा के बाद हुए इस अनुष्ठान का मुद्दा 13 अगस्त को राज्यसभा में उठा, जहां खरगे ने इसे अपने लिए अपमानजनक बताते हुए सवाल उठाए।

राज्यसभा में खरगे ने उठाया मुद्दा

राज्यसभा में खरगे ने कहा कि उन्होंने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया था और उनके भाषण में किसी धर्म या समुदाय को निशाना नहीं बनाया गया था। इसके बावजूद उनके भाषण के बाद मंच के ‘शुद्धिकरण’ के लिए हवन किए जाने की बात सामने आई।

खरगे ने सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र और संविधान में विपक्ष के नेता के साथ इस तरह का व्यवहार उचित है। उन्होंने इसे अपने सम्मान और समानता के अधिकार से जोड़ते हुए सरकार से इस मामले पर जवाब मांगा।

‘मैं अनुसूचित जाति से आता हूं, मैं दलित हूं’

खरगे ने राज्यसभा में भावुक अंदाज में कहा कि वह अनुसूचित जाति से आते हैं और दलित हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी किसी से अपनी मदद या सुरक्षा की गुहार नहीं लगाई और राजनीतिक जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जैसे वह ‘अछूत’ हों। खरगे ने कहा कि उन्हें लड़ने की ताकत है और वह अपनी लड़ाई लड़ते रहे हैं, लेकिन इस तरह का ‘शुद्धिकरण’ उन्हें अपमानित करने वाला है।

नड्डा ने कहा- घटना दुखद, बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती

खरगे के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने राज्यसभा में जवाब दिया। नड्डा ने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियों का भाजपा समर्थन नहीं करती।

नड्डा ने कहा कि अगर खरगे की भावनाएं आहत हुई हैं तो यह गंभीर बात है और पूरे देश के लिए भी दुखद है। उन्होंने मामले की जांच कराने का भरोसा दिया।

नड्डा के मुताबिक, जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि वास्तव में वहां क्या हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती।

आखिर हल्द्वानी में हुआ क्या था?

रिपोर्टों के अनुसार, आठ अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खरगे की राजनीतिक रैली हुई थी। इसके करीब दो दिन बाद उसी स्थल पर ‘शुद्धिकरण’ हवन और गंगाजल छिड़कने की घटना सामने आई।

इस घटना को लेकर अलग-अलग पक्षों के अलग दावे हैं। कुछ हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए कथित आपत्तिजनक नारों को लेकर आपत्ति जताई और कहा कि रामलीला मैदान धार्मिक-सांस्कृतिक स्थल है, जिसका राजनीतिक इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। दूसरी तरफ कांग्रेस ने शुद्धिकरण की कार्रवाई को सामाजिक भेदभाव और अपमान से जोड़कर सवाल उठाए हैं।

यही वजह है कि इस पूरे मामले की राजनीतिक और सामाजिक व्याख्या को लेकर विवाद बढ़ गया है।

कांग्रेस ने बीजेपी पर साधा निशाना

कांग्रेस ने इस घटना को लेकर भाजपा और उसकी विचारधारा पर हमला बोला। पार्टी नेताओं ने कहा कि संविधान समानता और सम्मान की गारंटी देता है और किसी व्यक्ति के राजनीतिक कार्यक्रम के बाद उसके इस्तेमाल किए गए मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।

कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने भी घटना की आलोचना करते हुए इसे समानता के संवैधानिक सिद्धांत के खिलाफ बताया और उत्तराखंड सरकार से कार्रवाई की मांग की।

मामला केवल राजनीति का नहीं, सामाजिक संवेदनाओं का भी

हल्द्वानी की यह घटना अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जाति, सामाजिक समानता और सार्वजनिक जीवन में सम्मान जैसे मुद्दों से जुड़ गई है।

खरगे ने इसे अपने दलित होने के संदर्भ में उठाया है, जबकि भाजपा की ओर से नड्डा ने इस तरह की गतिविधि से पार्टी को अलग करते हुए जांच का भरोसा दिया है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच में ‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम के आयोजक कौन थे, उसका उद्देश्य क्या था और क्या किसी राजनीतिक संगठन की इसमें आधिकारिक भूमिका थी।

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हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खरगे की रैली के बाद हुए कथित शुद्धिकरण हवन ने संसद तक राजनीतिक बहस पहुंचा दी है। खरगे ने इसे अपमान और भेदभाव से जोड़ा, जबकि जेपी नड्डा ने घटना की निंदा करते हुए जांच का भरोसा दिया है। अब जांच की रिपोर्ट इस विवाद के कई सवालों का जवाब दे सकती है।

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