नई दिल्ली। लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से पारंपरिक चाय पार्टी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत सत्ता पक्ष के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जबकि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और समाजवादी पार्टी (SP) के नेताओं ने कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी।
इस बीच DMK सांसद कनिमोझी के चाय पार्टी में शामिल होने से विपक्षी खेमे की एकजुटता को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि राज्यसभा में विपक्षी दलों के नेताओं की तस्वीर कुछ अलग रही और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा सोनिया गांधी समेत कई नेता राज्यसभा के सभापति द्वारा आयोजित चाय पार्टी में शामिल हुए।
ओम बिरला के चैंबर में हुई चाय पार्टी
लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने अपने चैंबर में पारंपरिक चाय पार्टी आयोजित की। यह संसद की पुरानी परंपरा है, जिसमें सदन का सत्र समाप्त होने के बाद विभिन्न दलों के सांसद और वरिष्ठ नेता अनौपचारिक मुलाकात करते हैं।
सूत्रों के अनुसार, इस बार लोकसभा की चाय पार्टी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे।
वहीं, कांग्रेस, TMC और SP समेत विपक्षी खेमे के कई दलों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया।
कांग्रेस, TMC और SP ने क्यों किया बहिष्कार?
विपक्षी दलों की ओर से चाय पार्टी से दूरी ऐसे समय पर बनाई गई है, जब संसद में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर लगातार टकराव देखने को मिला है।
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के मुताबिक कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, TMC और इंडी गठबंधन के अन्य दलों के नेताओं ने लोकसभा स्पीकर की चाय पार्टी में शामिल नहीं होने का फैसला किया।
हालांकि, सभी विपक्षी दलों का रुख एक जैसा नहीं रहा।
DMK की कनिमोझी पहुंचीं चाय पार्टी में
विपक्षी एकजुटता के बीच DMK सांसद कनिमोझी का लोकसभा स्पीकर की चाय पार्टी में शामिल होना चर्चा का विषय बन गया।
कनिमोझी के कार्यक्रम में पहुंचने से यह संदेश भी गया कि विपक्षी गठबंधन के भीतर हर मुद्दे पर सभी दलों की रणनीति एक जैसी नहीं है।
यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में इसे विपक्षी एकता के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
राज्यसभा में तस्वीर रही अलग
लोकसभा की चाय पार्टी से अलग राज्यसभा में विपक्ष के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी देखने को मिली।
राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन की ओर से आयोजित चाय पार्टी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत विपक्ष के कई नेता शामिल हुए।
इस तरह संसद के दोनों सदनों में आयोजित कार्यक्रमों में विपक्षी दलों की भागीदारी का पैटर्न अलग-अलग नजर आया।
क्या विपक्षी एकता पर असर पड़ेगा?
DMK की ओर से कनिमोझी की मौजूदगी और कांग्रेस-TMC-SP के बहिष्कार ने विपक्षी गठबंधन की रणनीति को लेकर नई राजनीतिक चर्चा शुरू कर दी है।
हालांकि केवल एक कार्यक्रम में शामिल होने या नहीं होने को विपक्षी गठबंधन में किसी बड़े बदलाव का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। अलग-अलग दल संसद के मुद्दों पर अपने राजनीतिक हित और रणनीति के आधार पर अलग रुख भी अपना सकते हैं।
लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल में ऐसी घटनाएं इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती हैं क्योंकि विपक्षी दल लगातार सरकार के खिलाफ साझा रणनीति बनाने की कोशिश करते रहे हैं।
संसद सत्र खत्म होने के बाद चाय पार्टी की परंपरा
संसद के दोनों सदनों का सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति की ओर से अपने-अपने चैंबर में चाय पार्टी आयोजित करना एक पुरानी संसदीय परंपरा है।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य राजनीतिक मतभेदों से अलग सांसदों के बीच अनौपचारिक संवाद और मेल-जोल का अवसर उपलब्ध कराना भी माना जाता है।
लेकिन इस बार लोकसभा की चाय पार्टी में विपक्षी दलों की गैरमौजूदगी और DMK सांसद कनिमोझी की मौजूदगी ने इस सामान्य संसदीय परंपरा को राजनीतिक चर्चा का विषय बना दिया।
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लोकसभा स्पीकर की चाय पार्टी में कांग्रेस, TMC और SP की गैरमौजूदगी, जबकि DMK की कनिमोझी की मौजूदगी ने विपक्षी खेमे के भीतर अलग-अलग रणनीतियों की चर्चा को हवा दे दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले संसद सत्र और राजनीतिक मुद्दों पर इन दलों की एकजुटता किस रूप में दिखाई देती है।
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