FSSAI की इंफ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटीज को चेतावनी, भ्रामक फूड दावों पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई

राष्ट्रीय

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर किसी फूड या हेल्थ प्रोडक्ट का प्रचार करने वाले सेलिब्रिटीज और इंफ्लुएंसर्स अब बिना जांचे-परखे दावे करने से बचें। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने फूड प्रोडक्ट्स के विज्ञापनों और एंडोर्समेंट में किए जाने वाले भ्रामक दावों को लेकर सख्त रुख अपनाया है।

FSSAI ने स्पष्ट किया है कि किसी खाद्य उत्पाद को प्रमोट करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसके बारे में किए जा रहे दावे सच्चे, वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित और खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुरूप हों। नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

इंफ्लुएंसर्स की भी होगी जिम्मेदारी

आज के दौर में फूड कंपनियां अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटीज का बड़े स्तर पर इस्तेमाल कर रही हैं। ऐसे में किसी चर्चित व्यक्ति की कही गई बात का सीधा असर उपभोक्ताओं के फैसले पर पड़ता है।

FSSAI का कहना है कि किसी ब्रांड से जुड़ने या उसका प्रचार करने से पहले प्रमोटर को यह देखना चाहिए कि उत्पाद के बारे में किए जा रहे दावे वास्तव में प्रमाणित हैं या नहीं।

खासकर “इम्युनिटी बढ़ाने”, “पोषक तत्वों से भरपूर”, “स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद” जैसे दावों को बिना पर्याप्त वैज्ञानिक आधार के प्रचारित करना सवालों के घेरे में आ सकता है।

सिर्फ विज्ञापन नहीं, उपभोक्ता के भरोसे का सवाल

FSSAI के रुख के पीछे एक बड़ा कारण सोशल मीडिया पर सेलिब्रिटी और इंफ्लुएंसर मार्केटिंग का तेजी से बढ़ना है। किसी लोकप्रिय चेहरे द्वारा किसी उत्पाद की तारीफ किए जाने पर उपभोक्ता उसे सामान्य विज्ञापन की तुलना में ज्यादा भरोसेमंद मान सकते हैं।

इसी वजह से रेगुलेटर ने संकेत दिया है कि एंडोर्समेंट करने वाले लोगों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण है। यदि किसी उत्पाद के बारे में ऐसा दावा किया जाता है जिसे वैज्ञानिक आधार या लागू नियमों का समर्थन हासिल नहीं है, तो उसके परिणाम हो सकते हैं।

किन दावों से बचना होगा?

फूड प्रोडक्ट्स के प्रचार में ऐसे दावे नहीं किए जाने चाहिए जो उपभोक्ता को उत्पाद की गुणवत्ता, पोषण या स्वास्थ्य लाभ के बारे में गलत धारणा दें।

FSSAI की गाइडलाइंस के मुताबिक खाद्य उत्पादों से जुड़े स्वास्थ्य दावे वैज्ञानिक प्रमाणों से समर्थित होने चाहिए और विज्ञापन उपभोक्ता को भ्रमित करने वाला नहीं होना चाहिए। FSSAI के अपने हालिया प्रकाशन में भी वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, स्पष्ट और गैर-भ्रामक दावों पर जोर दिया गया है।

नियम तोड़ने पर जुर्माने का भी प्रावधान

खाद्य उत्पादों के विज्ञापन और दावों को Food Safety and Standards Act, 2006 तथा Food Safety and Standards (Advertising and Claims) Regulations, 2018 के तहत नियंत्रित किया जाता है।

केंद्र सरकार की ओर से संसद में दिए गए जवाब के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या विज्ञापन से जुड़े पक्ष पर FSS Act की धारा 53 के तहत दंड लगाया जा सकता है, जिसमें जुर्माने का प्रावधान है।

उपभोक्ता भी कर सकते हैं शिकायत

FSSAI लगातार उपभोक्ताओं से खाद्य उत्पादों से जुड़े भ्रामक दावों और विज्ञापनों की शिकायत करने की अपील करता रहा है। ऐसे मामलों में उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध आधिकारिक शिकायत व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है।

अब सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट पर बढ़ेगी नजर

FSSAI की इस सख्ती का सीधा असर उन ब्रांड्स, विज्ञापन एजेंसियों और सोशल मीडिया प्रमोटर्स पर पड़ सकता है जो फूड और हेल्थ प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए बड़े नामों का इस्तेमाल करते हैं।

साफ संदेश यही है कि लोकप्रिय चेहरा होने से किसी दावे की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। किसी भी खाद्य उत्पाद का प्रचार करने से पहले उसके दावों की सत्यता और नियमों के अनुपालन की जांच जरूरी होगी।

News for Action Bharat की अपील: उपभोक्ता किसी भी फूड या हेल्थ प्रोडक्ट को केवल सेलिब्रिटी या इंफ्लुएंसर के प्रचार के आधार पर न खरीदें। उत्पाद की सामग्री, लेबल और आधिकारिक जानकारी की जांच जरूर करें।

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