मुंबई। महाराष्ट्र के चर्चित IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे एक बार फिर अपने सख्त प्रशासनिक रवैये को लेकर सुर्खियों में हैं। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर का पद संभालने के बाद से उनकी कार्यशैली का असर पूरे राज्य में दिखाई देने लगा है। होटल, रेस्टोरेंट, फूड आउटलेट और खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों पर लगातार कार्रवाई ने विभाग को अचानक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
तुकाराम मुंडे ने 25 मई को FDA कमिश्नर का पद संभाला था। इसके बाद विभाग की गतिविधियों में तेजी देखने को मिली। उनके करीब दो दशक के प्रशासनिक करियर में लगभग 25 तबादलों का जिक्र किया जाता रहा है, लेकिन बार-बार होने वाले तबादले भी उनके सख्त तेवरों को बदल नहीं पाए।
जनता के लिए खुला रहता है कमिश्नर का दरवाजा
तुकाराम मुंडे की कार्यशैली का एक अलग पहलू यह है कि वह आम लोगों की शिकायतें सीधे सुनने पर जोर देते हैं। मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स स्थित FDA मुख्यालय में कार्यदिवसों के दौरान शाम 4 से 5 बजे तक जनता से मुलाकात का समय रखा गया है।
इस दौरान आम नागरिक अपनी शिकायतें लेकर सीधे कमिश्नर के पास पहुंच सकते हैं। हालांकि जनता से मुलाकात में आसानी का मतलब नियमों में ढील नहीं है। खाद्य सुरक्षा के मामले में मुंडे का रुख बेहद स्पष्ट बताया जाता है—लापरवाही या जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पद संभालते ही शुरू हुआ ताबड़तोड़ अभियान
FDA कमिश्नर बनने के बाद मुंडे के नेतृत्व में पूरे महाराष्ट्र में निरीक्षण और छापेमारी अभियान तेज हुआ। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विभाग ने बड़ी संख्या में खाद्य प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की।
रिपोर्ट के मुताबिक, 1,131 से अधिक स्थानों पर औचक निरीक्षण किए गए। कार्रवाई के दौरान करीब 49.57 करोड़ रुपये मूल्य का मिलावटी या संदिग्ध खाद्य स्टॉक जब्त किए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा लगभग 1.6 लाख लीटर कथित मिलावटी दूध भी पकड़े जाने की जानकारी दी गई है।
FDA की कार्रवाई का दायरा केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित नहीं रहा। बड़े होटल, रेस्टोरेंट और चर्चित खाद्य ब्रांड भी जांच के दायरे में आए।
56 रेस्टोरेंट के लाइसेंस पर कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामलों में FDA की ओर से कई प्रतिष्ठानों पर लाइसेंस संबंधी कार्रवाई की गई। रिपोर्ट के अनुसार अब तक 56 रेस्टोरेंट के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं।
मुंडे की अगुवाई में चल रही कार्रवाई का संदेश साफ है—ब्रांड कितना भी बड़ा क्यों न हो, खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई से छूट नहीं मिलेगी।
हालिया रिपोर्टों में Domino’s के कई आउटलेट्स के खिलाफ भी FDA कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
पुराने और मशहूर प्रतिष्ठान भी जांच के घेरे में
FDA की कार्रवाई में कई पुराने और चर्चित नाम भी सामने आए हैं। इनमें—
- के. रुस्तम एंड कंपनी
- नूर मोहम्मदी
- शालीमार
- पारसी डेयरी फार्म
- वारसा
- फ्लिंट
जैसे प्रतिष्ठानों का उल्लेख किया गया है।
इस कार्रवाई से यह संकेत गया कि FDA अब केवल छोटे खाद्य कारोबारियों तक सीमित निरीक्षण नहीं कर रहा, बल्कि बड़े और स्थापित कारोबारों में भी खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है।
Blinkit और बड़े ब्रांड भी रडार पर
मुंडे के नेतृत्व में FDA की कार्रवाई ऑनलाइन ग्रॉसरी और फूड डिलीवरी से जुड़े कारोबारों तक भी पहुंची है। हाल ही में मुंबई के एक Blinkit स्टोर में निरीक्षण के दौरान कथित स्वच्छता संबंधी खामियां सामने आने के बाद लाइसेंस कार्रवाई की रिपोर्ट आई। इस अभियान में बड़ी मात्रा में डेयरी उत्पाद भी जब्त किए गए।
इससे साफ है कि विभाग का फोकस सिर्फ पारंपरिक होटल-रेस्टोरेंट पर नहीं है, बल्कि खाद्य पदार्थों की पूरी सप्लाई चेन पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।
गुटखा कारोबार पर भी सख्ती
तुकाराम मुंडे के नेतृत्व में FDA की कार्रवाई खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ प्रतिबंधित और अवैध खाद्य उत्पादों के कारोबार तक भी पहुंची है। गुटखा के अवैध कारोबार के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की गई है।
विभाग की इस आक्रामक कार्रवाई से कारोबारियों में हलचल है, जबकि प्रशासन का कहना है कि जनता के स्वास्थ्य से जुड़े नियमों का पालन कराना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
FDA की लैब अब सातों दिन चलाने पर जोर
मुंडे की कार्यशैली का एक और उदाहरण FDA की प्रयोगशालाओं को लेकर उनका रुख है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि लैब का काम केवल सप्ताह के निर्धारित दिनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए और जरूरत के अनुसार सातों दिन कामकाज सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
कामकाज को लेकर उनकी सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने काम करने में अनिच्छुक अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ा संदेश दिया।
WhatsApp ग्रुप से लेकर सोशल मीडिया तक छाया नाम
तुकाराम मुंडे के FDA में आने के बाद विभाग की गतिविधियों को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा बढ़ी है। पहले अपेक्षाकृत शांत रहने वाले विभागीय मीडिया चैनलों में लगातार रेड, निरीक्षण, जब्ती और कार्रवाई से संबंधित तस्वीरें और प्रेस नोट सामने आने लगे।
इससे लोगों को महसूस हुआ कि FDA की कार्यशैली में बदलाव आया है और विभाग अब ज्यादा सक्रिय तरीके से कार्रवाई कर रहा है।
आखिर क्यों चर्चा में रहते हैं तुकाराम मुंडे?
तुकाराम मुंडे लंबे समय से अपनी सख्त और सीधे फैसले लेने वाली प्रशासनिक शैली के लिए चर्चित रहे हैं। उनके करियर में लगातार तबादलों का रिकॉर्ड भी अक्सर चर्चा का विषय रहा है।
लेकिन उनके समर्थकों के लिए यही उनकी पहचान है—पद बदला, विभाग बदला, जगह बदली, लेकिन काम करने का तरीका नहीं बदला।
महाराष्ट्र FDA में उनकी नई जिम्मेदारी के बाद यह तेवर एक बार फिर दिखाई दे रहे हैं। खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के पालन पर जोर और बड़े प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई ने उन्हें एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।
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खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में FDA की कार्रवाई आगे भी जारी रहने की संभावना है। हालिया रिपोर्टों में चायनीज फूड और अन्य खाद्य कारोबारों को लेकर भी विभाग की आगामी कार्रवाई के संकेत मिले हैं।
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