नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से LPG आपूर्ति पर बने जोखिम के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पहली बार अलग-अलग रिफाइनरियों और तेल-गैस कंपनियों के लिए facility-wise LPG production targets तय किए हैं। 13 अगस्त 2026 के सरकारी आदेश के तहत 21 रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए कुल 63,810 टन प्रतिदिन का LPG उत्पादन लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस व्यवस्था का मकसद यह है कि भविष्य में विदेशी LPG आपूर्ति में अचानक बाधा आती है तो घरेलू उत्पादन तेजी से बढ़ाकर करोड़ों परिवारों के लिए रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखी जा सके।
🚨 रिलायंस जामनगर को सबसे बड़ा लक्ष्य
इस पूरी योजना में Reliance Industries की जामनगर रिफाइनरी को सबसे बड़ा उत्पादन लक्ष्य दिया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर जामनगर की घरेलू बाजार के लिए संचालित रिफाइनरी को 18,000 टन प्रतिदिन तक LPG उत्पादन करना होगा। यह निर्धारित कुल लक्ष्य का सबसे बड़ा हिस्सा है।
वहीं, Nayara Energy की Vadinar refinery के लिए 4,480 टन प्रतिदिन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सरकारी क्षेत्र की रिफाइनरियों के लिए भी बड़ा उत्पादन लक्ष्य रखा गया है और सार्वजनिक क्षेत्र की 18 रिफाइनरी इकाइयों को मिलाकर करीब 31,470 टन प्रतिदिन उत्पादन का लक्ष्य बताया गया है।
एक महत्वपूर्ण बात
रिलायंस की जामनगर में मौजूद निर्यात-केंद्रित दूसरी रिफाइनरी के लिए इस व्यवस्था में अलग उत्पादन लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है।
🇮🇳 भारत LPG के लिए कितना आयात पर निर्भर है?
यही इस पूरे फैसले की सबसे बड़ी वजह है।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में LPG की खपत लगभग 3.32 करोड़ टन रही। इसके मुकाबले घरेलू उत्पादन करीब 1.31 करोड़ टन था, जबकि लगभग 2.13 करोड़ टन LPG का आयात किया गया।
यानी भारत की रसोई गैस जरूरत का बड़ा हिस्सा अभी भी विदेशी आपूर्ति पर निर्भर है।
यही निर्भरता होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में किसी भी बड़े व्यवधान को भारत की energy security के लिए गंभीर बना देती है।
🌊 होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खाड़ी क्षेत्र और दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान इस रास्ते से LPG की आवाजाही प्रभावित हुई थी।
भारत सरकार के अनुसार, संकट के दौरान देश की LPG आपूर्ति को बनाए रखने के लिए घरेलू उत्पादन को काफी बढ़ाया गया था। एक सरकारी अपडेट के मुताबिक घरेलू LPG उत्पादन लगभग 32 हजार टन प्रतिदिन से बढ़ाकर करीब 52 हजार टन प्रतिदिन तक किया गया था।
सरकार का नया आदेश इसी तरह की आपात स्थिति को भविष्य के लिए अधिक व्यवस्थित और स्थायी व्यवस्था में बदलने की कोशिश माना जा रहा है।
🔥 सिर्फ उत्पादन नहीं, स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट पर भी जोर
सरकार ने कंपनियों से केवल LPG उत्पादन बढ़ाने को नहीं कहा है। नए फ्रेमवर्क में LPG storage, evacuation और transportation infrastructure को पर्याप्त स्तर पर बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है।
इसका मतलब है कि LPG का उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उसे स्टोर करके जरूरत वाले क्षेत्रों तक तेजी से पहुंचाने की क्षमता भी तैयार करनी होगी।
जरूरत पड़ने पर कंपनियों को तकनीकी रूप से व्यवहार्य उपायों के जरिए LPG उत्पादन बढ़ाने के विकल्प तलाशने होंगे। इनमें कुछ मामलों में नैफ्था को LPG में बदलना और Fluid Catalytic Cracking जैसी इकाइयों को अपग्रेड करना भी शामिल हो सकता है।
🔄 हर छह महीने में होगी समीक्षा
यह कोई एक बार तय करके हमेशा के लिए लागू रहने वाला आंकड़ा नहीं है।
सरकार उत्पादन लक्ष्यों की हर छह महीने में समीक्षा करेगी। नई रिफाइनरी, नए तेल-गैस क्षेत्रों या तकनीकी अपग्रेड से अतिरिक्त उत्पादन क्षमता आती है तो उसे भी इस व्यवस्था में शामिल किया जा सकता है।
इसका सीधा अर्थ है कि सरकार LPG supply security को एक dynamic system के रूप में विकसित करना चाहती है।
🏭 भारत की LPG रणनीति में बड़ा बदलाव
भारत लंबे समय से LPG के मामले में आयात पर निर्भर रहा है। पहले जहां विदेशी आपूर्ति में बाधा आने पर तत्काल उपाय करने पड़ते थे, अब सरकार घरेलू उत्पादन क्षमता को पहले से तैयार रखने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
यह कदम तीन स्तरों पर महत्वपूर्ण है—
पहला: घरेलू LPG की उपलब्धता सुरक्षित करना।
दूसरा: अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान आयात पर निर्भरता का जोखिम कम करना।
तीसरा: रिफाइनरियों में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता और infrastructure को पहले से तैयार रखना।
भारत सरकार ने 2026 के संकट के दौरान भी घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने और आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए थे।
👨👩👧👦 आम परिवारों के लिए इसका क्या मतलब?
इस पूरी नीति का सबसे महत्वपूर्ण असर घरेलू LPG उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
अगर भविष्य में होर्मुज या किसी दूसरे अंतरराष्ट्रीय मार्ग से LPG आयात प्रभावित होता है, तो घरेलू उत्पादन बढ़ाने की क्षमता भारत को अचानक पैदा होने वाली कमी से निपटने में मदद कर सकती है।
हालांकि इसका यह मतलब नहीं है कि LPG की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से पूरी तरह अलग हो जाएंगी। भारत अभी भी LPG के लिए बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भर है और अंतरराष्ट्रीय कीमतों का घरेलू बाजार पर प्रभाव बना रहेगा। सरकार ने भी पहले बताया है कि भारत अपनी LPG जरूरत का लगभग 60% आयात करता है।
💰 रिलायंस के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
रिलायंस को सबसे बड़ा उत्पादन लक्ष्य मिलने से जामनगर रिफाइनरी की भूमिका भारत की domestic LPG supply security में और महत्वपूर्ण हो सकती है।
रिलायंस ने मार्च 2026 में भी कहा था कि वह सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जामनगर के refining और petrochemical complexes से LPG उत्पादन को अधिकतम करने के लिए कदम उठा रही है।
इसलिए सरकार का नया framework रिलायंस के लिए सिर्फ एक उत्पादन लक्ष्य नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा में कंपनी की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है।
📌 बड़ी तस्वीर क्या है?
भारत की LPG कहानी अब सिर्फ “सस्ता सिलेंडर और ज्यादा कनेक्शन” तक सीमित नहीं है। देश में LPG की खपत लगातार बढ़ी है और करोड़ों परिवार इस ईंधन पर निर्भर हैं। PPAC के अनुसार, 1 जुलाई 2026 तक भारत में 33.14 करोड़ से अधिक active domestic LPG connections थे, जबकि PMUY connections की संख्या करीब 10.57 करोड़ थी।
ऐसे में सरकार का नया कदम LPG को राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा के नजरिए से देखने की दिशा में बड़ा बदलाव है।
Action Bharat का निष्कर्ष
होर्मुज संकट ने भारत को यह दिखा दिया कि LPG के लिए सिर्फ आयात पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। अब सरकार ने 21 कंपनियों और रिफाइनरी इकाइयों के लिए उत्पादन लक्ष्य तय कर घरेलू supply buffer मजबूत करने की कोशिश शुरू की है।
और इस पूरी व्यवस्था में रिलायंस जामनगर को 18,000 टन प्रतिदिन का सबसे बड़ा लक्ष्य मिलना सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है।
फिर भी, इसे यह दावा करना सही नहीं होगा कि “अब होर्मुज संकट भारत को बिल्कुल परेशान नहीं करेगा”। आयात निर्भरता अभी भी काफी अधिक है। नया सिस्टम मुख्य रूप से किसी भविष्य की supply disruption के असर को कम करने और घरेलू आपूर्ति को अधिक resilient बनाने की कोशिश है।
🔥 Action Bharat Headline
LPG Crisis से निपटने का मास्टरप्लान! रिलायंस जामनगर को 18,000 टन/दिन का टारगेट, सरकार ने तय किए 63,810 टन के उत्पादन लक्ष्य
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