नई दिल्ली। अमेरिकी टेक दिग्गज Microsoft को चीन में लगातार बदलते कारोबारी माहौल और घरेलू टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने वाली नीतियों के कारण बड़ा झटका लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी को पिछले करीब पांच वर्षों में कम से कम 15 ब्रांच ऑफिस और ज्वाइंट वेंचर बंद करने पड़े हैं। हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट ने अभी चीन से पूरी तरह बाहर निकलने का फैसला नहीं किया है।
🇨🇳 चीन में क्यों कमजोर हुई Microsoft की पकड़?
चीन पिछले कुछ वर्षों से सरकारी खरीद में घरेलू और सुरक्षित तकनीक को प्राथमिकता दे रहा है। इसका सीधा असर माइक्रोसॉफ्ट के विंडोज और दूसरे सॉफ्टवेयर कारोबार पर पड़ा है।
रॉयटर्स की समीक्षा के मुताबिक, दिसंबर 2023 से मई 2026 के बीच जारी चीन की छह सरकारी कंप्यूटर-सिस्टम खरीद गाइडलाइंस में से पांच में माइक्रोसॉफ्ट के सॉफ्टवेयर की सिफारिश नहीं की गई। इससे सरकारी क्षेत्र में कंपनी के कारोबार पर दबाव बढ़ा है।
💻 चीन की घरेलू कंपनियां बनी चुनौती
चीन में घरेलू टेक कंपनियां और AI मॉडल तेजी से मजबूत हो रहे हैं। Kimi जैसे AI मॉडल पश्चिमी विकल्पों को टक्कर दे रहे हैं और अपेक्षाकृत कम लागत पर उपलब्ध हैं।
ऐसे में माइक्रोसॉफ्ट के Azure Cloud और विदेशी AI मॉडल पर आधारित कारोबार के सामने लंबी अवधि की चुनौती बढ़ गई है।
🇺🇸 अमेरिका-चीन तनाव ने बढ़ाई मुश्किल
माइक्रोसॉफ्ट के लिए समस्या सिर्फ चीन की घरेलू नीतियां नहीं हैं। अमेरिका द्वारा एडवांस्ड चिप और AI तकनीक के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों ने भी चीन में कंपनी के अत्याधुनिक AI कारोबार को प्रभावित किया है।
कंपनी के चीन स्थित इंजीनियरों की एडवांस्ड चिप और AI तकनीक तक पहुंच भी सीमित हुई है। 2024 में माइक्रोसॉफ्ट ने करीब 1,000 शीर्ष इंजीनियरों को अमेरिका और कुछ पश्चिमी देशों में जाने का विकल्प दिया था।
🤖 फिर चीन छोड़ क्यों नहीं रही Microsoft?
चीन में चुनौतियों के बावजूद माइक्रोसॉफ्ट पूरी तरह बाजार छोड़ने के बजाय अपने कारोबार को छोटा करके ज्यादा मुनाफे वाले हिस्सों पर ध्यान दे रही है।
कंपनी को Azure Cloud और AI सेवाओं के जरिए चीनी कंपनियों से कारोबार अभी भी मिल रहा है। कुछ चीनी कंपनियां अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार के लिए माइक्रोसॉफ्ट की क्लाउड सेवाओं का इस्तेमाल करती हैं।
इसके अलावा चीन का विशाल टेक टैलेंट पूल भी माइक्रोसॉफ्ट के लिए महत्वपूर्ण है। कंपनी की चीन रिसर्च लैब से निकले कई लोग बाद में बड़ी AI कंपनियों में पहुंचे हैं।
🇮🇳 क्या भारत बन सकता है नया सहारा?
चीन में विदेशी टेक कंपनियों के सामने बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है। भारत का बड़ा डिजिटल बाजार, तेजी से बढ़ता AI इकोसिस्टम और टेक्नोलॉजी टैलेंट इसे वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक बनाते हैं।
हालांकि, मौजूदा रिपोर्ट में यह पुष्टि नहीं है कि Microsoft चीन से कारोबार हटाकर भारत को अपना नया मुख्य केंद्र बनाने जा रही है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित अवसर के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
Microsoft के सामने अब तीन बड़ी चुनौतियां
- 🇨🇳 चीन की घरेलू टेक कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा
- 🇺🇸 अमेरिका-चीन टेक वॉर और निर्यात प्रतिबंध
- 🤖 AI और क्लाउड कारोबार को चीन में बनाए रखने की चुनौती
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