Action Bharat | राष्ट्रीय क्राइम डेस्क यूएई से भारत समेत कई देशों में कथित तौर पर ड्रग्स की सप्लाई करने वाले वीरेंद्र सिंह बसोया उर्फ वीरू की गिरफ्तारी के बाद भारतीय जांच एजेंसियों की जांच अब उसके पूरे नेटवर्क तक पहुंच गई है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि भारत में ड्रग्स की सप्लाई के पीछे कौन-कौन लोग, कंपनियां और स्थानीय नेटवर्क काम कर रहे थे।
जांच का फोकस केवल भारत तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, इस नेटवर्क के तार यूएई, यूके, मलेशिया, थाईलैंड और पाकिस्तान समेत कई देशों से जुड़े होने की बात सामने आई है।
🔴 NCB और स्पेशल सेल की जांच तेज
रिपोर्ट के मुताबिक, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की मुंबई जोनल टीम के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल भी बसोया को अपने मामले में गिरफ्तार कर पूछताछ करेगी।
जांच एजेंसियां उसकी गिरफ्तारी को इसलिए अहम मान रही हैं क्योंकि इससे कथित तौर पर भारत में चल रहे कोकेन सप्लाई नेटवर्क के कई अहम कड़ियों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
एजेंसियों की नजर अब उसके सहयोगियों, वित्तीय लेनदेन, अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और भारत में मौजूद सप्लाई नेटवर्क पर है।
📦 पहले भी बड़ी मात्रा में ड्रग्स बरामद
जांच अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2024 में बसोया सिंडिकेट से जुड़े कई कथित तस्करों की गिरफ्तारी हुई थी। दिल्ली और मुंबई पुलिस की कार्रवाई में बड़ी मात्रा में कोकेन, थाईलैंड का गांजा और मेफेड्रोन बरामद किए जाने की बात सामने आई थी।
इन गिरफ्तारियों के बाद कथित सिंडिकेट की भारत में ड्रग्स सप्लाई क्षमता प्रभावित हुई।
दिल्ली में कोकेन बरामदगी के आंकड़े
रिपोर्ट में दिए गए पुलिस आंकड़ों के अनुसार:
- 2025: दिल्ली पुलिस ने पूरे साल में 12.649 किलो कोकेन बरामद की।
- 2026: जनवरी से जून तक 6.691 किलो कोकेन बरामद की गई।
पुलिस का कहना है कि 2024 से पहले बरामदगी का स्तर इससे काफी अधिक था।
💰 शुद्ध कोकेन की जगह मिलावटी ड्रग्स का आरोप
NCB अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि शुद्ध कोकेन बेहद महंगी होती है और भारत में इसकी कीमत बहुत अधिक पड़ती है।
इसी वजह से जांच एजेंसियों को संदेह है कि कथित सिंडिकेट भारत में मिलावटी कोकेन की सप्लाई करता था।
हालांकि, किसी विशेष बरामदगी या मामले में ड्रग्स की वास्तविक संरचना और मात्रा का अंतिम निर्धारण संबंधित जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट से ही होगा।
🌍 भारत से बाहर तक फैले नेटवर्क की जांच
अक्टूबर 2024 में केंद्रीय एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने कथित तौर पर तुषार गोयल समेत 15 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
पूछताछ में जांच एजेंसियों के सामने कथित नेटवर्क की व्यापक तस्वीर सामने आई।
रिपोर्ट के अनुसार, नेटवर्क के तार:
दिल्ली → मुंबई → पंजाब → हरियाणा → राजस्थान
समेत कई बड़े भारतीय शहरों तक जुड़े होने की बात सामने आई।
वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूके, यूएई, मलेशिया, थाईलैंड और पाकिस्तान से संपर्कों की जांच की गई।
🚚 लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग चैनलों के इस्तेमाल का आरोप
जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कथित सिंडिकेट ने ड्रग्स की सप्लाई के लिए सामान्य कारोबारी नेटवर्क का इस्तेमाल किया।
रिपोर्ट के अनुसार, इसमें लॉजिस्टिक्स कंपनियों, फूड पैकेट, स्नैक्स/नमकीन पैकेट और स्थानीय डिस्ट्रीब्यूटर्स जैसे माध्यमों के इस्तेमाल की बात सामने आई।
इस तरह के मामलों में एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश करती हैं कि किस स्तर पर किस व्यक्ति या कारोबारी इकाई की भूमिका थी और क्या उन्हें ड्रग्स की वास्तविक सामग्री की जानकारी थी।
👨👦 परिवार तक नेटवर्क पहुंचने का आरोप
जांच अधिकारियों के हवाले से यह भी दावा किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कथित ड्रग्स कारोबार में पैठ बनाने के बाद बसोया ने अपने दो बेटों को भी इस नेटवर्क में शामिल किया।
इस दावे की वास्तविक पुष्टि जांच एजेंसियों की पूछताछ, दस्तावेजों और अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों से होगी।
🌎 कोकेन का अंतरराष्ट्रीय स्रोत क्या है?
रिपोर्ट के अनुसार, अवैध कोकेन का उत्पादन मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिका के एंडीज क्षेत्र में होता है।
कोका पौधे की पत्तियों से कोकेन तैयार की जाती है। अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स कारोबार में कोलंबिया, पेरू और बोलीविया प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों के रूप में जाने जाते हैं।
कोलंबिया वैश्विक अवैध कोकेन उत्पादन में सबसे महत्वपूर्ण देशों में से एक है। इसके बाद पेरू और बोलीविया का भी बड़ा योगदान माना जाता है।
यही वजह है कि भारत में सामने आने वाले अंतरराष्ट्रीय कोकेन मामलों की जांच अक्सर दक्षिण अमेरिका से लेकर मध्य-पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैली सप्लाई चेन को ध्यान में रखकर की जाती है।
🔎 अब एजेंसियों के सामने सबसे बड़े सवाल
बसोया की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां मुख्य रूप से इन सवालों के जवाब तलाश रही हैं:
- भारत में उसका सबसे बड़ा सप्लाई नेटवर्क कौन संभालता था?
- विदेशों से ड्रग्स की कथित सप्लाई किस माध्यम से होती थी?
- नेटवर्क में कितने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोगी शामिल थे?
- ड्रग्स कारोबार से जुड़े पैसों का लेनदेन किन चैनलों से होता था?
- भारत के किन शहरों में नेटवर्क सबसे ज्यादा सक्रिय था?
- क्या इस नेटवर्क के और बड़े संचालक अभी भी एजेंसियों की पकड़ से बाहर हैं?
🚨 Action Bharat निष्कर्ष
वीरेंद्र बसोया की गिरफ्तारी को जांच एजेंसियां कथित अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क की एक बड़ी कड़ी तक पहुंचने के मौके के तौर पर देख रही हैं। अब असली चुनौती सिर्फ आरोपी से पूछताछ नहीं, बल्कि उसके पीछे मौजूद फाइनेंसर, सप्लायर, स्थानीय वितरक और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों तक पहुंचना है।
महत्वपूर्ण: ऊपर दी गई जानकारी आपके साझा किए गए समाचार विवरण पर आधारित है। जिन आरोपों की अदालत में पुष्टि नहीं हुई है, उन्हें आरोप/जांच एजेंसियों के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
