नई दिल्ली। बांग्लादेश इन दिनों गंभीर बिजली और ऊर्जा संकट से जूझ रहा है। गैस की कमी और ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान के चलते कई इलाकों में लंबे समय तक बिजली कटौती हो रही है। कुछ क्षेत्रों में 8 से 10 घंटे तक, जबकि कुछ रिपोर्टों में इससे भी लंबी कटौती की बात सामने आई है। संकट का असर घरों से लेकर उद्योगों और कारोबार तक दिखाई दे रहा है।
बिजली संकट के बीच बांग्लादेश ने भारत से अतिरिक्त डीजल आपूर्ति का अनुरोध किया है। भारत ने इस अनुरोध पर विचार करने की बात कही है।
क्यों गहराया बांग्लादेश का ऊर्जा संकट?
बांग्लादेश की बिजली व्यवस्था में गैस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। मौजूदा संकट में गैस की उपलब्धता घटने से बिजली उत्पादन पर भी दबाव बढ़ा है।
बांग्लादेश के एक नीति-विमर्श में बताया गया कि 11 अगस्त तक बिजली संयंत्रों को उनकी जरूरत का केवल करीब 29 प्रतिशत गैस मिल रही थी। इससे बिजली उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ा है।
इसके अलावा LNG आपूर्ति में व्यवधान ने भी स्थिति को मुश्किल बनाया है। अगस्त के मध्य में एक LNG टर्मिनल से आपूर्ति रुकने के बाद गैस संकट और बढ़ने की आशंका जताई गई थी।
मॉल और बाजारों के समय में कटौती
बिजली बचाने के लिए बांग्लादेश सरकार ने ऊर्जा खपत कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक शॉपिंग मॉल, बाजार और दुकानों को रात 8 बजे तक बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। विज्ञापन बोर्ड और सजावटी रोशनी बंद रखने जैसे उपाय भी किए जा रहे हैं।
इसका सीधा असर व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ रहा है। बिजली की कमी के कारण उद्योगों और कारखानों के उत्पादन पर भी दबाव है।
संकट से निकलने में लग सकते हैं कम से कम दो साल
बांग्लादेश के वित्त मंत्री अमीर खुसरो महमूद चौधरी ने कहा है कि बिजली और गैस की समस्या को स्थायी रूप से दूर करने में कम से कम दो साल लग सकते हैं।
उनके मुताबिक LNG से जुड़ी नई सुविधाएं और अन्य बुनियादी ढांचे तैयार करने में समय लगेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार समस्या के समाधान के लिए तेजी से काम कर रही है।
भारत से क्या मांगी गई मदद?
ऊर्जा संकट के बीच बांग्लादेश ने भारत से अतिरिक्त डीजल आपूर्ति का अनुरोध किया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस अनुरोध पर विचार किए जाने की जानकारी दी है।
यह मामला सिर्फ बिजली संकट तक सीमित नहीं है। ईंधन की उपलब्धता बिजली उत्पादन, परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों से सीधे जुड़ी है। इसलिए अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति बांग्लादेश को तत्काल राहत देने में मदद कर सकती है।
भारत का क्या है रुख?
भारत और बांग्लादेश के बीच पहले से ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग है। नई दिल्ली की ओर से बांग्लादेश के अतिरिक्त ऊर्जा अनुरोध को अपनी उपलब्धता और घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए देखने की बात सामने आई है।
यानी भारत की ओर से तत्काल किसी बड़े अतिरिक्त ऊर्जा पैकेज की घोषणा नहीं हुई है, बल्कि अनुरोध पर समीक्षा/विचार की प्रक्रिया की बात सामने आई है।
संकट का असर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर
बिजली और गैस की कमी का असर बांग्लादेश के उद्योगों पर भी पड़ रहा है। खासकर कपड़ा और निर्यात आधारित उद्योगों के लिए ऊर्जा आपूर्ति महत्वपूर्ण है।
गैस और बिजली की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो उत्पादन में कटौती, लागत बढ़ने और निर्यात प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने भी ऊर्जा संकट के समाधान के लिए त्वरित कदमों के साथ दीर्घकालिक सुधारों की जरूरत बताई है।
भारत के सामने क्या चुनौती?
भारत के लिए यह मामला केवल पड़ोसी देश की ऊर्जा जरूरत का नहीं, बल्कि क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों से भी जुड़ा है।
एक तरफ बांग्लादेश को तत्काल ऊर्जा राहत की जरूरत है, वहीं भारत को अपनी घरेलू मांग और उपलब्ध संसाधनों को भी ध्यान में रखना होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में नई दिल्ली का निर्णय दोनों देशों के ऊर्जा सहयोग के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
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