कनाडा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के प्रस्तावित कनाडा दौरे को लेकर सियासत तेज हो गई है। कनाडा के 100 से अधिक हिंदू और नागरिक अधिकार संगठनों ने प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार से भागवत को कनाडा आने की अनुमति देने की अपील की है।
संगठनों ने उन मांगों को खारिज किया है, जिनमें भागवत को कनाडा में प्रवेश के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग की जा रही थी।
प्रधानमंत्री कार्नी को भेजा संयुक्त पत्र
रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न संगठनों ने प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ-साथ कनाडा के वरिष्ठ मंत्रियों को संयुक्त पत्र भेजा है।
पत्र में कहा गया है कि भागवत से संबंधित किसी भी इमिग्रेशन या सार्वजनिक सुरक्षा संबंधी फैसले को राजनीतिक दबाव के बजाय विश्वसनीय सबूत, उचित प्रक्रिया और कनाडाई कानून के आधार पर लिया जाना चाहिए।
संगठनों ने विशेष रूप से कहा कि किसी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगाने जैसा कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता और समान व्यवहार से जुड़े गंभीर सवाल पैदा कर सकता है।
हिंदू संगठनों ने क्या कहा?
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले संगठनों का कहना है कि मोहन भागवत का प्रस्तावित दौरा कनाडा के हिंदू समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है।
उनके मुताबिक कनाडा में बड़ी संख्या में हिंदू समुदाय रहता है और RSS को सामाजिक सेवा, सामुदायिक गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा सार्वजनिक विमर्श से जुड़ा संगठन बताया गया है।
प्रवेश पर रोक की मांग का विरोध
रिपोर्ट के मुताबिक कनाडा की कुछ राजनीतिक आवाजों और संगठनों की ओर से भागवत को देश में प्रवेश से रोकने की मांग की गई थी।
इसके जवाब में समर्थक संगठनों ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई ठोस प्रमाण और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होनी चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव के आधार पर।
अब नजर कनाडा सरकार के फैसले पर
इस पूरे मामले में अब निगाह कनाडा सरकार के अगले कदम पर है। यदि भागवत के दौरे को अनुमति मिलती है तो यह कनाडा में भारतीय मूल के हिंदू समुदाय और RSS से जुड़े समूहों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा।
वहीं, यदि सरकार प्रवेश को लेकर कोई प्रतिबंध लगाती है तो यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर नई बहस को जन्म दे सकता है।
ACTION BHARAT के 5 बड़े सवाल
- क्या मोहन भागवत को कनाडा दौरे की अनुमति मिलेगी?
- किन आधारों पर उनके प्रवेश पर रोक की मांग की गई?
- क्या कनाडा सरकार ठोस सबूतों के आधार पर फैसला करेगी?
- 100+ संगठनों की अपील का सरकार पर कितना असर पड़ेगा?
- क्या यह मुद्दा भारत-कनाडा संबंधों में नया राजनीतिक विवाद बन सकता है?
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