यूपी के 103 सर्वोदय विद्यालयों में अब खाली नहीं रहेंगे शिक्षक पद, CM योगी ने दिए सख्त निर्देश

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लखनऊ | (एक्शन भारत) उत्तर प्रदेश के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में निर्देश दिया है कि विद्यालयों में शिक्षकों के सभी रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरा जाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों के मुताबिक शिक्षकों के साथ-साथ अन्य जरूरी मानव संसाधन की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि कोई भी शिक्षक पद खाली नहीं रहना चाहिए, ताकि इन आवासीय विद्यालयों का संचालन व्यवस्थित तरीके से हो और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

93 से बढ़कर 103 हुए सर्वोदय विद्यालय

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री को बताया गया कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में 93 जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय संचालित थे। वर्ष 2025-26 तक इनकी संख्या बढ़कर 103 हो चुकी है।

इनमें:

  • 59 विद्यालय CBSE से संबद्ध
  • 44 विद्यालय UP Board से संबद्ध

हैं।

यानी प्रदेश में सर्वोदय विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा है और ऐसे में शिक्षकों तथा अन्य स्टाफ की पर्याप्त उपलब्धता को लेकर सरकार ने अब विशेष जोर दिया है।

खाली पदों पर तेजी से होगी नियुक्ति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिक्षकों के रिक्त पदों पर चयन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाए

उन्होंने कहा कि केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की जरूरत के अनुसार अन्य आवश्यक स्टाफ और मानव संसाधन भी उपलब्ध कराया जाए।

सर्वोदय विद्यालयों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी आवासीय व्यवस्था में रहते हैं। इसलिए स्कूलों में शिक्षकों के अलावा प्रशासनिक और अन्य जरूरी सुविधाओं का पर्याप्त होना भी महत्वपूर्ण है।

आवासीय और गैर-आवासीय विद्यार्थियों पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि समाज कल्याण विभाग के विद्यालयों में पढ़ने वाले आवासीय और गैर-आवासीय विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

इसका सीधा असर विद्यालयों में पढ़ाई के माहौल, विद्यार्थियों की निगरानी और रोजमर्रा की व्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।


विद्यालयों के संचालन में बड़ा बदलाव

मुख्यमंत्री ने सर्वोदय विद्यालयों के संचालन को और बेहतर बनाने के लिए व्यापक बदलाव की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं।

इसके लिए:

स्पष्ट नियमावली तैयार करने और
सोसाइटी के गठन की कार्रवाई करने

को कहा गया है।

सरकार का उद्देश्य विद्यालयों के संचालन और प्रबंधन को ज्यादा व्यवस्थित बनाना है।


वृद्धावस्था पेंशन पर भी CM का फोकस

समीक्षा बैठक में केवल विद्यालयों की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि वृद्धावस्था पेंशन की भी समीक्षा की गई।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि अब तक पेंशन से वंचित पात्र बुजुर्गों के आवेदनों का समयबद्ध सत्यापन कराया जाए और पात्र लोगों को जल्द पेंशन का लाभ दिया जाए।

बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के लाभार्थियों की संख्या वर्ष 2017-18 में 37.47 लाख थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 67.50 लाख हो गई।

हालांकि वर्तमान में लगभग 11.50 लाख नए आवेदन लंबित हैं।

मुख्यमंत्री ने सत्यापन से लेकर पेंशन स्वीकृति तक पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।


मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना का भी विस्तार

बैठक में मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना की भी समीक्षा की गई।

यह योजना प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि UPSC, PCS, NEET, JEE और NDA-CDS जैसी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और अनुभवी शिक्षकों व विशेषज्ञों की सेवाओं का अधिकतम लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

प्रदेश में 163 केंद्र संचालित

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों में 163 केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।

इन केंद्रों पर:

  • 1,783 इम्पैनल्ड शिक्षक
  • 23,801 पंजीकृत विद्यार्थी
  • UPSC, PCS, NEET, JEE, NDA-CDS समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी

कराई जा रही है।

इसके अलावा विभाग की ओर से चार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी संचालित किए जा रहे हैं।


बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद

समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण, मुख्य सचिव और समाज कल्याण विभाग के सचिव अनुराग यादव समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

एक्शन भारत की नजर

सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन निर्देशों को जमीनी स्तर पर लागू करने की है। 103 सर्वोदय विद्यालयों में शिक्षक पदों को भरने के साथ-साथ अन्य जरूरी स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित होने पर विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकता है। खासकर आवासीय विद्यालयों में यह व्यवस्था और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ उनकी रोजमर्रा की जरूरतों की जिम्मेदारी भी संस्थान पर होती है।

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