नई दिल्ली | ‘वंदे मातरम’ को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब व्यक्तिगत बयानबाजी तक पहुंच गया है। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के विदेशी मूल को लेकर तीखी टिप्पणी की और आरोप लगाया कि कांग्रेस को राष्ट्रीय गीत के सम्मान को लेकर संकीर्ण मानसिकता नहीं दिखानी चाहिए। उनके बयान के बाद कांग्रेस ने भी कड़ा पलटवार किया।
🔥 कुमारस्वामी ने क्या कहा?
कुमारस्वामी ने सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि वह भारत की हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी शादी के बाद भारत आईं और “उनकी रगों में इतालवी खून” बहता है। उन्होंने इसी आधार पर वंदे मातरम विवाद में उनकी भूमिका पर सवाल उठाया।
कुमारस्वामी का आरोप था कि कांग्रेस नेताओं को राष्ट्रीय गीत के मामले में “संकीर्ण मानसिकता” नहीं दिखानी चाहिए और देश के राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान किया जाना चाहिए।
🇮🇳 आखिर शुरू कैसे हुआ वंदे मातरम विवाद?
विवाद 15 अगस्त 2026 को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान सामने आया। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में वंदे मातरम के पूरे संस्करण के गायन के दौरान सोनिया गांधी ने इसे रोकने का संकेत दिया।
कांग्रेस ने इस आरोप को खारिज किया। पार्टी का कहना था कि वंदे मातरम को रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई थी और सोनिया गांधी केवल लंबे समय से खड़े कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था करने को कह रही थीं।
⚔️ कांग्रेस का पलटवार
कुमारस्वामी के बयान पर कांग्रेस की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई। कर्नाटक के मंत्री रिजवान अरशद ने उन्हें “हताश व्यक्ति” बताते हुए कहा कि सोनिया गांधी ने भारत के लिए लंबे समय तक काम किया है।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि सोनिया गांधी के पति और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी, इसलिए उनके भारतीय होने पर सवाल उठाना अनुचित है।
📢 कुमारस्वामी ने फिर बढ़ाया हमला
कांग्रेस की प्रतिक्रिया के बाद भी कुमारस्वामी अपने बयान पर कायम रहे। उन्होंने सवाल किया कि सोनिया गांधी ने देश के लिए क्या बलिदान दिया और आरोप लगाया कि वंदे मातरम के मुद्दे पर उनकी आपत्ति भारतीय भावनाओं के खिलाफ है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वंदे मातरम का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से गहरा ऐतिहासिक संबंध रहा है और इसे कांग्रेस के ऐतिहासिक अधिवेशनों में भी गाया गया था।
🏛️ अब विवाद सिर्फ गीत तक सीमित नहीं
इस पूरे घटनाक्रम ने बीजेपी और कांग्रेस के बीच राष्ट्रवाद, राष्ट्रीय प्रतीकों और राजनीतिक विरासत को लेकर बहस को और तेज कर दिया है।
बाद में कांग्रेस कार्यसमिति ने पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम की पहली दो कड़ियां गाने के अपने पुराने रुख को दोहराया, जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कांग्रेस के फैसले की आलोचना की।
Action Bharat की नजर
यह विवाद अब दो अलग सवालों में बंट गया है—
एक तरफ: क्या राष्ट्रीय गीत के गायन को लेकर किसी तरह की आपत्ति या व्यवधान हुआ?
दूसरी तरफ: क्या इस राजनीतिक विवाद में नेताओं द्वारा किसी व्यक्ति के विदेशी मूल को निशाना बनाना उचित है?
फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और ‘वंदे मातरम’ का मुद्दा राजनीतिक टकराव का नया केंद्र बन गया है।
