वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव का एक नया मोर्चा अब साइबर स्पेस में दिखाई दे रहा है। अमेरिकी बुनियादी ढांचे, खासकर जल और अपशिष्ट जल प्रणालियों पर लगातार हो रहे साइबर हमलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने Minnesota में हुए बड़े साइबर हमले के पीछे ईरान की संभावित भूमिका का आकलन किया है, हालांकि जांच अभी जारी है और सार्वजनिक रूप से अंतिम जिम्मेदारी तय नहीं की गई है।
30 से ज्यादा जल प्रणालियां बनीं निशाना
26 और 27 जुलाई 2026 को Minnesota की 30 से अधिक सामुदायिक जल प्रणालियों को एक समन्वित साइबर हमले में निशाना बनाया गया। राज्य की IT एजेंसी के अनुसार, हमलावरों ने उन तकनीकी प्रणालियों तक अनधिकृत पहुंच बनाई, जिनका इस्तेमाल जल संयंत्रों के उपकरणों की निगरानी और नियंत्रण के लिए किया जाता है।
कुछ स्थानों पर ऑपरेटरों को स्वचालित नियंत्रण से हटकर मैनुअल तरीके अपनाने पड़े। हालांकि बड़े पैमाने पर पेयजल की गुणवत्ता प्रभावित होने की सूचना नहीं मिली, लेकिन इस घटना ने अमेरिका की स्थानीय जल प्रणालियों की साइबर सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ईरानी हैकर्स पर क्यों है शक?
अमेरिकी अधिकारियों ने हाल के महीनों में ईरान से जुड़े साइबर समूहों द्वारा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की चेतावनी दी थी। खासतौर पर इंटरनेट से जुड़े Programmable Logic Controllers (PLCs) को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है।
ये उपकरण जल संयंत्रों, ऊर्जा सुविधाओं और अन्य औद्योगिक प्रणालियों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 19 अगस्त को जारी अमेरिकी सरकारी चेतावनी में Siemens S7 Series PLCs को सक्रिय साइबर खतरे के बीच बताया गया।
साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने Minnesota हमलों के तरीके को ईरान से जुड़े CyberAv3ngers समूह की पिछली गतिविधियों से मिलता-जुलता बताया है। हालांकि, यह शोधकर्ताओं का आकलन है और अमेरिकी राज्य एवं संघीय एजेंसियों ने अभी तक Minnesota हमले के लिए किसी समूह को सार्वजनिक रूप से अंतिम जिम्मेदार नहीं ठहराया है।
कम से कम 12 राज्यों तक पहुंचा खतरा
जल और अपशिष्ट जल सुविधाओं को निशाना बनाने वाले साइबर हमलों का दायरा Minnesota तक सीमित नहीं है। अमेरिकी रिपोर्टों के मुताबिक कम से कम 12 राज्यों में जल प्रणालियों को साइबर हमलों का सामना करना पड़ा है।
अमेरिकी संघीय एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि इंटरनेट से जुड़े औद्योगिक नियंत्रण उपकरणों में सेंध लगाकर हमलावर पानी के दबाव, पंप और अन्य परिचालन प्रक्रियाओं में बाधा पैदा कर सकते हैं। कुछ मामलों में सिस्टम को मैनुअल मोड में डालना पड़ा।
मेडिकल सेक्टर भी साइबर हमले की जद में
ईरान से जुड़े हैकरों पर अमेरिकी मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी Stryker को निशाना बनाने का भी आरोप लगा था। मार्च 2026 में कंपनी पर हुए साइबर हमले के बाद उसके वैश्विक नेटवर्क में व्यवधान आया था। ईरान से जुड़े Handala समूह ने हमले की जिम्मेदारी का दावा किया था।
Stryker अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के लिए मेडिकल उपकरण उपलब्ध कराती है। ऐसे हमले यह दिखाते हैं कि आधुनिक साइबर युद्ध केवल सरकारी वेबसाइटों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य और आपूर्ति श्रृंखला जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकता है।
AI ने बढ़ाई साइबर युद्ध की चुनौती
अमेरिकी अधिकारियों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता का एक कारण यह भी है कि हमलावर AI आधारित उपकरणों का इस्तेमाल कर अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं।
हालिया अमेरिकी चेतावनियों में बताया गया है कि AI की मदद से औद्योगिक नियंत्रण प्रणालियों को निशाना बनाने वाले मालवेयर को विकसित और तैनात करना पहले की तुलना में आसान हो सकता है। इससे कम तकनीकी क्षमता वाले हमलावर भी अधिक जटिल साइबर हमले करने में सक्षम हो सकते हैं।
साइबर युद्ध का नया चेहरा
ईरान और अमेरिका के बीच साइबर संघर्ष कोई नई घटना नहीं है। पिछले वर्षों में दोनों देशों से जुड़े साइबर अभियानों में सरकारी संस्थानों, वित्तीय क्षेत्र, ऊर्जा और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने के आरोप लगते रहे हैं।
अब जल संयंत्रों जैसे स्थानीय और छोटे स्तर के बुनियादी ढांचे पर हमले इस खतरे को और गंभीर बना रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हमलों का उद्देश्य हमेशा बड़े पैमाने पर तबाही मचाना नहीं होता। कई बार कुछ घंटों के लिए सिस्टम को बाधित करना भी जनता में भय और प्रशासन पर दबाव पैदा करने के लिए पर्याप्त होता है।
फिलहाल Minnesota हमलों की जांच जारी है। लेकिन एक बात साफ है—आधुनिक युद्ध अब केवल मिसाइलों और टैंकों से नहीं लड़ा जा रहा। कंप्यूटर स्क्रीन के पीछे बैठा एक हमलावर भी किसी देश की पानी, बिजली, स्वास्थ्य और संचार व्यवस्था को निशाना बना सकता है।
